नाटी इमली का भरत मिलाप: 479 साल पुरानी लीला को देखने काशी में उमड़ा आस्था का सागर, जीवंत हुई अयोध्या की छवि
विजयादशमी के दूसरे दिन गुरुवार को काशी के लक्खा मेले में शुमार नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में आस्था और श्रद्धा का कोई ओर-छोर नहीं था। गोधूलि बेला में हुए ऐतिहासिक भरत मिलाप के लिए काशीवाशियों में गजब का उत्साह दिखा।
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काशी की 478 साल से भी ज्यादा पुरानी विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली के भरत मिलाप का मंचन गुरुवार को गोधूलि बेला में संपन्न हुई। इस अद्भुत क्षण को देखने के लिए आस्था का सागर उमड़ा। चारों भाइयों का मिलन देख पूरी जनता भगवान राम और बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगाने लगी। भावपूर्ण दृश्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें भी झर-झर हो उठीं। नाटी इमली का मैदान अयोध्या में तब्दील हो गया। लीला के लिए क्या छत, गली, सड़क हर ओर भक्त अलौकिक छठा को नयनों में बसाने के लिए आतुर दिखे।
प्रभु श्रीराम समेत चारों भाइयों के मिलन के समय काशी के लोगों की आस्था जीवंत भाव में दिखी। शाम 04:40 बजे जैसे ही भगवान श्रीराम ने भरत को अपने गले से लगाया तो चारों दिशाओं में जय श्रीराम का जयघोष गूंज उठा। इस दौरान विधि-विधान के साथ भगवान राम और चारों भाइयों का पूजन हुआ और फिर भरत मिलाप की पारंपरिक लीला संपन्न हुई।
अलौकिक लीला देखने के लिए सुबह 11 बजे से आने लगे लोग
विश्व प्रसिद्ध नाटी इमली के भरत मिलाप की अलौकिक लीला देखने के लिए सुबह 11 बजे से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था। शाम के समय लीला प्रारंभ होने के पहले ही हल्की बारिश के बीच भी इलाके की सड़कों से लेकर मकानों की छतों तक लोगों की भीड़ जुट गई। श्रीचित्रकूट रामलीला समिति के तत्वावधान में भरत मिलाप की यह लीला विगत 479 वर्षों से अनवरत होती आ रही है।
चित्रकूट की रामलीला में परंपरा अनुसार आश्विन शुक्ल एकादशी को भरत मिलाप का आयोजन होता है। 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम दशानन का वध करने के बाद अयोध्या की ओर लौटते हैं। पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान पर सवार होकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम भरत मिलाप मैदान पर पहुंचते हैं।
काशी के लक्खा मेले में शुमार नाटी इमली के भरत मिलाप में आस्था और श्रद्धा का कोई ओर-छोर नहीं था। हर तरफ बस राम का नाम और उनका जयघोष। आसपास के मकानों की छतों पर श्रद्धालु टकटकी लगाए प्रभु श्रीराम की लीला का वंदन कर रहे थे।
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