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पद्मश्री सम्मान से पहले नंदी मुद्रा में प्रणाम कर दुनिया को दिखाई अपने योग की कला

Wed, 23 Mar 2022 01:33 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 01:33 AM IST
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Before the Padma Shri award, he showed the world the art of his yoga by bowing in Nandi posture.
संयम, योग और सादगी ने अविभाजित बंगाल के शिवानंद को काशी में बाबा शिवानंद बना दिया। 126 साल की उम्र में पद्मश्री सम्मान पाने वाले काशी के बाबा शिवानंद की फुर्ती ऐसी कि देखने वाले दंग रह जाएं। वाराणसी के दुर्गाकुंड इलाके में स्थित आश्रम में तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में निवास करने वाले बाबा शिवानंद दिन में तीन से चार बार बिना किसी सहारे के सीढ़ियां चढ़ते और उतरते हैं।
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चार वर्ष की उम्र में अपने परिवार से अलग हो गए बाबा शिवानंद ने छह वर्ष की उम्र से ही योग को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया। तब से ही उन्होंने पवित्र जीवन जीने की ठानी, वह भी बिल्कुल सामान्य वेशभूषा में और आज तक उसका पालन करते हैं। जीवन के 126 वसंत देख चुके बाबा शिवानंद छह वर्ष की आयु से ही संयमित दिनचर्या का पालन कर रहे हैं। पूरी तरह स्वस्थ बाबा ब्रह्म् मुहूर्त में तीन बजे ही चारपाई छोड़ देते हैं। स्नान-ध्यान के बाद नियमित एक घंटे योग करते हैं। भोजन में बहुत कम नमक में उबला आलू, दाल का सेवन करते हैं। बाबा के शिष्यों ने बताया कि वे फल और दूध का भी सेवन नहीं करते हैं। उन्होंने विवाह नहीं किया है। उनके मुताबिक, ईश्वर की कृपा से उनको कोई बीमारी और तनाव नहीं है। बाबा शिवानंद की मानें तो वे कभी स्कूल नहीं गए, जो कुछ सीखा वह अपने गुरु से ही। उन्हें अंग्रेजी का भी अच्छा ज्ञान है।
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बाबा शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को अविभाजित बंगाल के श्रीहट्ट जिले के ग्राम हरिपुर (थाना क्षेत्र बाहुबल) में एक गोस्वामी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मौजूदा समय में यह जगह बांग्लादेश में है। बाबा ने बताया कि उनके माता-पिता भीख मांगकर गुजारा करते थे। चार साल की उम्र में माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए उन्हें नवद्वीप निवासी बाबा ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया। शिवानंद छह साल के थे, तभी उनके माता-पिता और बहन का भूख के चलते निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने गुरु के सानिध्य में आध्यात्म की दीक्षा लेनी शुरू की।
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365 दिन ठंडे पानी से स्नान, 12 महीने एक ही वस्त्र
बाबा शिवानंद के शिष्य दीपक विश्वास ने बताया कि स्वामी जी वर्ष के 365 दिन ब्रह्म मुहूर्त में ठंडे पानी से स्नान करते हैं। हर मौसम में एक ही जैसे वस्त्र धारण करते हैं। सर्दियों में भी वे कुर्ता और धोती ही पहनते हैं। 126 वर्ष की अवस्था में भी बिना चश्मे के ही स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। सुबह एक घंटे योग के बाद वे एक घंटे तक उसी कमरे में चहलकदमी करते हैं। शाम होने के बाद कुछ भी ग्रहण नहीं करते हैं। रात में 10 बजे वे सोने के लिए जाते हैं।
कई देशों में हैं बाबा के आश्रम
बाबा शिवानंद केआश्रम अमेरिका, जर्मनी और बांग्लादेश में भी हैं। वे समय-समय पर अपने इन आश्रमों में भी प्रवास के लिए जाते हैं। बाबा शिवानंद ने बताया कि उन्हें मिलने वाले दान को वे गरीबों में ही वितरित करते हैं। 126 साल के बाबा शिवानंद के बारे में शिष्यों का दावा है कि वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग इंसान हैं। उनके आधार कार्ड और पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि आठ अगस्त 1896 दर्ज है। इस रिकार्ड को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने की भी कवायद की जा रही है।

तीन बार नंदीवत प्रणाम से मोहा दुनिया का मन
राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित समारोह में पद्म सम्मान के लिए अपने नाम की घोषणा सुनने के बाद अपने स्थान से खड़े हुए बाबा शिवानंद ने राष्ट्रपति के पास पहुंचने तक तीन बार नंदीवत योग की मुद्रा में प्रणाम कर दुनिया का मन मोह लिया। पहले पीएम के सामने दोनों पैर मोड़कर हाथों को आगे कर प्रणाम किया तो पीएम मोदी ने भी झुककर उनका अभिवादन किया। इसके बाद राष्ट्रपति के सामने पहुंचने पर उन्होंने इसी मुद्रा में प्रणाम किया और पास पहुंचने के बाद फिर झुके तो राष्ट्रपति ने उन्हें आगे बढ़कर सहारा दिया। इस घटनाक्रम के जरिए भी बाबा ने योग कला को दुनिया के सामने रखा।
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