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रात को मकर की कक्षा में प्रवेश करेंगे सूर्य
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2015 02:19 AM IST
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वाराणसी। सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में शाम के बाद प्रवेश करेंगे। ऐसे में सभी विद्वान इस बात पर एकमत है कि सायंकाल के बाद संक्रांति लगने की वजह से स्नान, दान का पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह शुरू होगा।
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तिथि समाधान के ग्रंथ निर्णय सिंधु के मुताबिक गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने का फल गुरुवार को ही मिलेगा। अयनांश में वृद्धि के चलते आने वाले वर्षों में संक्रांति पर्व की तिथि में वृद्धि होने का अनुमान है। खरमास उतरने के साथ ही शुभ घड़ी भी आ जाएगी। शादी के अलावा अन्य मांगलिक कार्य शुरू होंगे। काशी में गंगा स्नान के लिए देश के कोने-कोने से स्नानार्थियों का रेला उमड़ने की उम्मीद है।
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काशी समेत पूर्वांचल में प्रचलित महावीर पंचांग और गणेश आपा पंचांग में 14 जनवरी की रात क्रमश: 1:20 और 12:34 पर लग रही है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी के मारतंड पंचांग में संक्रांति शाम को 7:27 पर और ब्रजभूमि पंचांग में 7:26 पर लग रही है।
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ऐसे में काशी के ज्योतिषियों ने 15 जनवरी को ही पुण्य की डुबकी लगाने की घोषणा की है। तिथियों के समाधान के लिए प्रचलित ग्रंथ निर्णय सिंधु के पृष्ठ संख्या-325 पर दिए गए श्लोक-यद्यस्तम य वेलायाम मकरमयति भास्कर: प्रदोषेवा अर्धरात्रो वा स्नानम दानम परेअहनि...।
इसका आशय है कि प्रदोष का, सायंकाल या अर्धरात्रि के बाद जब संक्रांति लगती है तब मकर स्नान का पुण्यकाल दूसरे दिन शुरू होता है। महावीर पंचांग के संपादक ज्योतिषाचार्य डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा के अनुसार काशी में मकर संक्रांति का विशेष पुण्य काल 15 जनवरी को सुबह से मध्याह्न दो बजे तक रहेगा।
काशी में मकर स्नान का विशेष महत्व है। इसलिए यहां डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचेंगे। लोग गंगा में गोता लगाने के बाद पुण्य के लिए चूड़ा, तिल और मूंग के लड्डू के अलावा कंबल भी दान करेंगे। मकर संक्रांति लगने के साथ ही खरमास उतर जाएगा। इससे महीने भर से शादियों के लिए इंतजार करने वाले गहने, कपड़े और अन्य उपहारों की खरीद के लिए बाजार की ओर रुख कर सकेंगे।