{"_id":"601469bc8ebc3e5685795c10","slug":"bcom-llb-stamped-in-kashi-vidyapeeth-varanasi-news-vns571768770","type":"story","status":"publish","title_hn":"काशी विद्यापीठ में बीकॉम एलएलबी पर लगी मुहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी विद्यापीठ में बीकॉम एलएलबी पर लगी मुहर
विज्ञापन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शुक्रवार को कार्यपरिषद ने विद्यापरिषद व पूर्व की कार्यपरिषद की संस्तुतियों पर मुहर लगा दी। नए कोर्स के साथ कई संशोधन लागू कर दिए गए हैं। वहीं भैरव तालाब स्थित कृषि संस्थान का नाम राजा बलवंत सिंह इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी रखा गया है। विश्वविद्याल परिसर में नई शिक्षा के साथ ही बीकॉम एलएलबी और गंगापुर कैंपस में पांच वर्षीय बीए एलएलबी कोर्स के संचालन पर भी मुहर लग गई। इसके अलावा गंगापुर व एनटीपीसी कैंपस में डिप्लोमा इन साइकोथेरेपी शुरू करने पर मुहर लगी।
शुक्रवार को कुलपति प्रो. टीएन सिंह की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक संपन्न हुई। इस दौरान 39 प्रस्तावों पर सहमति बनी। इस दौरान चार वर्षीय बीए बीएड, बीएससी बीएड, बीकॉम एलएलबी और बीए एलएलबी समेत कई डिप्लोमा व सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों को संचालित करने पर सहमति बनी। कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य ने बताया कि बीकॉम एलएलबी व बीए एलएलबी कोर्स के संचालन की अनुमति के बाद इसे बार काउंसिंल को भेजा जाएगा। इसके बाद अगले सत्र से यह पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय परिसर में दिव्यांग अध्ययन विभाग खोलने पर सहमति बनी। इसकेसाथ ही दिव्यांगजनों केपुनर्वास के लिए व्यावसायिक एकेडमिशियन तैयार किए जाएंगे। इसकेअलावा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा केंद्र को स्वतंत्र विभाग और योग विषय में स्नातक व स्नातकोत्तर के रूप में संचालन की स्वीकृति मिली। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी की मांग पर पंजाबी भाषा को उर्दू की तरह स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में लागू किया जाएगा। बैठक के दौरान संकायाध्यक्ष मौजूद रहे।
चार साल बाद काशी विद्यापीठ शोध अध्यादेश में बदलाव
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ प्रशासन ने चार साल बाद शोध अध्यादेश में बदलाव कर दिया। विद्यापरिषद की मुहर के बाद कार्यपरिषद ने भी इसे पास कर दिया है। यह शोध अध्यादेश सम्बद्ध महाविद्यालयों पर भी लागू होगा। नया शोध अध्यादेश लागू होने के बाद होने वाली शोध की प्रवेश परीक्षा नए नियमों से संचालित होगी।
विज्ञापन
बैठक के प्रमुख बिंदु
-बीएड, एमएड इंटीग्रेटेड त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम
-छह सप्ताह का सर्टिफिकेट कोर्स इन योगा
-महाविद्यालयों में दस साल से नियमित रूप से कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षक भी बन सकेंगे शोध निर्देशक
-समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र एवं मनोविज्ञान विभाग केस्नातक स्तरीय यूनिफाइड पाठ्यक्रम पारित
-चार वर्षीय एकीकृत बीए बीएड और बीएससी बीएड पाठ्यक्रम का अनुमोदन
-स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संचालित होंगे नव प्रवर्तन उद्यमिता पाठ्यक्रम
-एमफिल पाठ्यक्रम को समाप्त करने पर सहमति
-हिंदी को अनिवार्य विषय केरूप में किया जाएगा लागू
- महाविद्यालयों में संचालित होंगे डिप्लोमा कोर्स
- 15 कर्मचारियों को स्थायी किया गया
- कर्मचारियों के मुद्दे पर कमेटी का गठन
- महाविद्यालयों की संबद्धता पर भी कार्यपरिषद ने लगाई मुहर
- कई विभागाध्यक्ष व संकायाध्यक्ष की नियुक्ति पर मुहर
- उर्दू विभाग में तीन असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति निरस्त करने पर लगी मुहर
विज्ञापन
शुक्रवार को कुलपति प्रो. टीएन सिंह की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक संपन्न हुई। इस दौरान 39 प्रस्तावों पर सहमति बनी। इस दौरान चार वर्षीय बीए बीएड, बीएससी बीएड, बीकॉम एलएलबी और बीए एलएलबी समेत कई डिप्लोमा व सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों को संचालित करने पर सहमति बनी। कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य ने बताया कि बीकॉम एलएलबी व बीए एलएलबी कोर्स के संचालन की अनुमति के बाद इसे बार काउंसिंल को भेजा जाएगा। इसके बाद अगले सत्र से यह पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय परिसर में दिव्यांग अध्ययन विभाग खोलने पर सहमति बनी। इसकेसाथ ही दिव्यांगजनों केपुनर्वास के लिए व्यावसायिक एकेडमिशियन तैयार किए जाएंगे। इसकेअलावा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा केंद्र को स्वतंत्र विभाग और योग विषय में स्नातक व स्नातकोत्तर के रूप में संचालन की स्वीकृति मिली। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी की मांग पर पंजाबी भाषा को उर्दू की तरह स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में लागू किया जाएगा। बैठक के दौरान संकायाध्यक्ष मौजूद रहे।
विज्ञापन
चार साल बाद काशी विद्यापीठ शोध अध्यादेश में बदलाव
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ प्रशासन ने चार साल बाद शोध अध्यादेश में बदलाव कर दिया। विद्यापरिषद की मुहर के बाद कार्यपरिषद ने भी इसे पास कर दिया है। यह शोध अध्यादेश सम्बद्ध महाविद्यालयों पर भी लागू होगा। नया शोध अध्यादेश लागू होने के बाद होने वाली शोध की प्रवेश परीक्षा नए नियमों से संचालित होगी।
विज्ञापन
बैठक के प्रमुख बिंदु
-बीएड, एमएड इंटीग्रेटेड त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम
-छह सप्ताह का सर्टिफिकेट कोर्स इन योगा
-महाविद्यालयों में दस साल से नियमित रूप से कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षक भी बन सकेंगे शोध निर्देशक
-समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र एवं मनोविज्ञान विभाग केस्नातक स्तरीय यूनिफाइड पाठ्यक्रम पारित
-चार वर्षीय एकीकृत बीए बीएड और बीएससी बीएड पाठ्यक्रम का अनुमोदन
-स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संचालित होंगे नव प्रवर्तन उद्यमिता पाठ्यक्रम
-एमफिल पाठ्यक्रम को समाप्त करने पर सहमति
-हिंदी को अनिवार्य विषय केरूप में किया जाएगा लागू
- महाविद्यालयों में संचालित होंगे डिप्लोमा कोर्स
- 15 कर्मचारियों को स्थायी किया गया
- कर्मचारियों के मुद्दे पर कमेटी का गठन
- महाविद्यालयों की संबद्धता पर भी कार्यपरिषद ने लगाई मुहर
- कई विभागाध्यक्ष व संकायाध्यक्ष की नियुक्ति पर मुहर
- उर्दू विभाग में तीन असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति निरस्त करने पर लगी मुहर