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98 लाख की ठगी: BBA, B.Com और होटल मैनेजमेंट कर चुके जालसाजों ने लगाया ऐसा दिमाग, पुलिस भी हो गई हैरान

Sat, 14 Dec 2024 11:53 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 14 Dec 2024 11:53 AM IST
सार

वाराणसी में नेवी से रिटायर सब लेफ्टिनेंट से 98 लाख की ठगी के लिए जालसाजों ने गजब का दिमार लगाया था। जालसाजों ने 98 लाख की ठगी के लिए 1000 से ज्यादा बैंक खातों का उपयोग किया। 

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BBA BCom and Hotel Management students involved in Cyber crime of 98 lakh varanasi
98 लाख की ठगी मामले में नौ आरोपी अरेस्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेवी से रिटायर सब लेफ्टिनेंट को 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 98 लाख की साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपियों में से तीन ने बीबीए, बीकॉम और होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। गिरफ्तार आरोपियों में चंदौली, मिर्जापुर, वाराणसी, जौनपुर और सीतापुर के शामिल हैं। आरोपियों में गिरोह का मास्टरमाइंड सीतापुर के रामकोटी गौशालापुरवा निवासी संदीप कुमार भी शामिल है।

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ठगी गिरोह की कमान सीतापुर के संदीप को सौंपी 
खाड़ी देशों में बैठे जालसाजों ने यूपी में ठगी गिरोह की कमान सीतापुर के संदीप को सौंपी थी। सिर्फ संदीप और विदेश में बैठे जालसाज के बीच बातचीत होती थी। संदीप के नीचे सभी नेटवर्किंग कंपनी की तरह काम करते हैं। बैंक खातों में गेमिंग और बिजनेस का पैसा मंगाने का हवाला देकर पढ़ने वाले छात्रों और बेरोजगार युवाओं को जोड़ते हैं। पहले उन्हें महंगे होटलों में सेमिनार के माध्यम से जोड़ा जाता है। विमान किराया और होटल खर्च अन्य खर्चे साइबर जालसाज वहन करते हैं। इस तरह विश्वास में लेकर उनके बैंक खातों को इस्तेमाल करना शुरू करते हैं। इस केस में भी यही हुआ। संदीप की नजदीकी चकिया के अभिषेक से हुई थी। इसके बाद अभिषेक ने कुनाल, विकास पटेल और अन्य को जोड़ा।

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98 लाख की ठगी में 1000 से ज्यादा बैंक खातों का उपयोग हुआ

ठगी में दुर्गाकुंड कबीर नगर के रहने वाले इकबाल खान के आईसीआईसीआई खाते का उपयोग मुख्य तौर पर किया गया। ऐसी चेन बनाई कि इकबाल के खाते में पैसा आते ही ऑटोमेटिक रूप से अन्य 50 से ज्यादा खातों में पैसा ट्रांसफर होता गया। 98 लाख की ठगी में 1000 से अधिक बैंक खातों का उपयोग हुआ। साइबर पुलिस ऐसे 50 से ज्यादा खाताधारकों को ट्रेस कर चुकी है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस के अनुसार विदेश में बैठे मुख्य सरगना तक पहुंचना कठिन है, क्योंकि कि वह वर्चुअल नंबर ही उपयोग करता है।

बैंक खातों की सर्विलांस से निगरानी, मोबाइल सीडीआर भी खंगाला
एसीपी ने बताया कि साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्र मुकदमे के विवेचक के तौर पर आरोपियों के बैंक खातों की सर्विलांस के जरिये निगरानी कर रहे थे। चार दिसंबर को मुकदमा दर्ज होने के बाद विभिन्न जनपदों के बैंक और मोबाइल सीडीआर को खंगालते हुए आरोपियों तक पहुंचा गया।

31 जुलाई को हुए थे रिटायर, ट्राई का अधिकारी बन 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट किया

बलिया के फेफना मरगूपुर के मूल निवासी अनुज कुमार यादव वर्तमान में सारनाथ के आशापुर स्थित माधव नगर कॉलोनी में रहते हैं। 31 जुलाई को नेवी से रिटायर हुए थे। साइबर जालसाजों ने ट्राई का अधिकारी बनकर 11 नवंबर से तीन दिसंबर तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया। रिटायर सैन्यकर्मी को नरेश गोयल मनी लॉन्डि्रंग केस में फंसाने की धमकी दी और 98 लाख रुपये विभिन्न बैंकों में ट्रांसफर करवा लिए थे। चार दिसंबर को बेटा घर पहुंचा, तब जाकर अनुज ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, निरीक्षक राजकिशोर पांडेय, निरीक्षक विपिन कुमार, निरीक्षक विजय कुमार यादव, एसआई संजीव कन्नौजिया, सतीश सिंह, शैलेंद्र कुमार, आलोक रंजन सिंह, श्याम लाल गुप्ता, गोपाल चौहान, चंद्रशेखर यादव आदि रहे।

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ड्रैगन एसएमएस और वर्चुअल मशीन का करते थे उपयोग

साइबर विशेषज्ञ श्याम लाल गुप्ता ने बताया कि गिरोह के आरोपियों की ओर से लोगों के मोबाइल नंबर पर ट्राई और सीबीआई अधिकारी बनकर वर्चुअल नंबर से कॉल किया जाता था। जालसाज कहते थे कि आपके नाम से जो सिमकार्ड जारी हुआ है और वह नंबर अवैध गतिविधियां में लिप्त है। इस तरह का झांसा देकर उन्हें वह डिजिटल अरेस्ट करके सत्यापन के नाम पर कथित आरबीआई के बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कराते हैं। फर्जी गेमिंग एप के माध्यम से उन पैसों को उपभोक्ताओं को पे-आउट के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस तकनीक में साइबर अपराधी ईसीएस व ईआईपी सर्विसेज का उपयोग करते हैं। ओटीपी प्राप्त करने के लिए एसएमएस फारवर्डर एप्लीकेशन जैसे ड्रैगन एमएसएस का उपयोग किया जाता है। अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से इस तरह की घटना में फर्जी म्यूल बैंक खातों, फर्जी सिम कार्ड व डिजिटल फुटप्रिंट से बचने के लिए वर्चुअल मशीन का प्रयोग किया जाता है।

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