फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   banarasi sari

बनारसी साड़ी की 80,000 इकाइयों के शटर डाउन, एक लाख का धंधा चौपट

Wed, 20 May 2020 12:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2020 12:57 AM IST
विज्ञापन
banarasi sari
वाराणसी। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन से बनारसी साड़ी की अस्सी हजार से ज्यादा इकाइयों के शटर डाउन हैं। 375 बड़ी फैक्ट्रियों के अलावा बुनकरी की पचास हजार पंजीकृत और तीस हजार से ज्यादा गैर पंजीकृत इकाइयों प्रभावित हुई हैं। 23 हजार से ज्यादा निर्यातक, थोक और फुटकर विक्रेताओं का धंधा भी चौपट हो गया है। कोरोना के चलते साड़ी उद्योग से जुड़े पांच लाख लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है।
विज्ञापन

पूर्वी उत्तर प्रदेश में साड़ी उद्योग सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। कोरोना के कारण यह उद्योग बंद है, जिससे पांच लाख से ज्यादा लोग मुश्किलों से जूझ रहे हैं। बनारसी साड़ी उद्योग से जुड़े लोगों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि चीन से रेशम का आयात बंद है। लगातार आर्डर कैंसिल होने से निर्यातकों से लेकर बुनकरों तक निराश हैं। हथकरघा कारखाने भी बंद पड़े हैं। प्रतिदिन लगभग 24 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि पांच अरब रुपये से ज्यादा का सालाना साड़ी का कारोबार है। इससे करीब छह हजार करोड़ रुपये सालाना आय होती है। साल में 250 दिन बिक्री होती है, जबकि 100 दिन धंधा बंद रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब अक्तूबर तक ही उठ पाएगा उद्योग
जनवरी से ही चीनी रेशम का आयात बंद है। जनवरी से अब तक हुए नुकसान और आने वाले वक्त को देखकर लगता है कि अक्टूबर से पहले साड़ी उद्योग फिर से खड़ा नहीं हो पाएगा। साड़ी उद्योग के लिए यह सबसे मुश्किल भरा दौर है।
चीनी रेशम के कारण विदेशी बायर्स में भय है कि कहीं रेशम से तैयार वस्त्र संक्रमित तो नहीं। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। हालात जल्दी नहीं सुधरे तो स्थिति और भयावह हो जाएगी। बनारसी साड़ी उद्योग में रेशम की खपत में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी चीन की होती है। बाकी माल बंगलुरू, मालदा, उड़ीसा और अन्य शहरों से आता है। सिर्फ वाराणसी में ही हैंडलूम, सेमी हैंडलूम और पावर लूम को मिलाकर 80 हजार से अधिक इकाइयां हैं जो प्रभावित हुई हैं। -राजन जायसवाल, साड़ी निर्यातक
अधिकतर मैटीरियल चीन से आयात किया जाता है। अब चाइनीज रेशम का अभाव होने लगा है। बनारस में रोजाना नौ से 10 टन रेशम की खपत होती है। चाइनीज रेशम पर लगी रोक नहीं हटती है तो आगे व्यापार और प्रभावित होगा। चीनी रेशम की क्वॉलिटी अच्छी होती है, इसलिए साड़ी के ताने में इसका प्रयोग होता है। बाना देश के विभिन्न शहरों से आने वाले रेशम से तैयार होता है। चाइनीज रेशम की कमी का असर बनारसी साड़ी उद्योग पर पड़ रहा है। -शैलेंद्र रस्तोगी, साड़ी निर्माता
चीन में जनवरी मध्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से समूचा बाजार सहमा हुआ है। इस बीच वियतनाम के रास्ते रेशम आया, जिसे दक्षिण भारत के कुछ कारोबारियों ने चीन का रेशम बताकर वाराणसी के उद्यमियों को थमा दिया। वियतनाम से आने वाले घटिया स्तर के रेशम के चलते आर्डर कैंसिल होने लगे और कारोबारियों व लूम संचालकों पर दोहरी मार पड़ी। यदि सरकार ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो बनारसी साड़ी उद्योग पर छाया संकट और गहरा जाएगा। -राहुल मेहता, साड़ी निर्माता व निर्यातक
बनारसी साड़ी उद्योग से बनारस में एक लाख परिवार जुड़े हुए हैं। उनकी आजीविका इसी पर आधारित है। इसीलिए यदि साड़ी कारोबार पर कोई प्रभाव पड़ता है तो उसका असर अन्य चीजों पर भी दिखता है। चाइनीज रेशम के आयात पर लगी रोक का असर साड़ी उद्योग पर दिखने लगा है। ज्यादातर बनारसी साड़ी और ड्रेस मैटीरियल में इस्तेमाल होने वाला रेशम चीन से ही आता है। साड़ी उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है। -अशोक धवन, बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के संरक्षक
चाइनीज रेशम पर लगी रोक नहीं हटती है तो साड़ी कारोबार कम हो जाएगा। काम करने वालों को काम नहीं मिलेगा। इस बारे में सरकार को कदम उठाने चाहिए। नहीं तो बुनकर बेरोजगार हो जाएंगे। बुनकर भूखे सो रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई पूछने वाला नहीं है। पांच लाख से अधिक बुनकर बनारसी बिनकारी का काम हैंडलूम और पावरलूम पर करते हैं। मगर, लॉकडाउन में सभी लूम लॉक हो चुके हैं। -सैयद मेराज अली, बुनकर, लोहता

इन इलाकों में होती बुनकरी
सरैया, जलालीपुरा, अमरपुर बटलोहिया, कोनिया, शक्कर तालाब, नक्की घाट, जैतपुरा, अलईपुरा, बड़ी बाजार, पीलीकोठी, छितनपुरा, काजीसादुल्लापुरा, जमालुद्दीनपुरा, कटेहर, खोजापुरा, कमलगड़हा, पुरानापुल, बलुआबीर, नाटीईमली रामनगर, मदनपुरा, बजरडीहा, रेवड़ीतालाब, सोनारपुरा, शिवाला, बड़ी बाजार, लोहता।
इन साड़ियों की है पहचान
सिल्क, कॉटन, बूटीदार, जंगला, जामदानी, जामावार, कटवर्क, सिफान, तनछुई, कोरांगजा, मसलिन, नीलांबरी, पीतांबरी, श्वेतांबरी और रक्तांबरी।
इन देशों में होता है व्यापार
साड़ियों का व्यापार श्रीलंका, स्वीटजरलैंड, कनाडा, मारीशस, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, नेपाल समेत अन्य देशों में भी फैला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed