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बनारस साड़ी उद्योग पर 'कोरोना अटैक', 200 करोड़ के कारोबार और सात लाख की रोजी-रोटी पर संकट

Wed, 05 Feb 2020 01:15 PM IST
गीतार्जुन गौतम ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला, वाराणसी
ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 05 Feb 2020 01:15 PM IST
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Banarasi Saree Textile Industry affected by coronavirus of china silk in varanasi
कोरोना वायरस से प्रभावित हुआ बनारसी साड़ी उद्योग। - फोटो : अमर उजाला।

देश-दुनिया में मशहूर बनारसी साड़ी वस्त्र उद्योग कोरोना के हमले से संकट में है। चीन में फैले कोरोना वायरस को देखते हुए 10 फरवरी तक 1500 टन सिल्क आयात पर चीन के रोक लगाने से बनारस के सात लाख परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यदि प्रतिबंध तिथि और आगे तक बढ़ती है तो फिर प्रति माह 200 करोड़ रुपये का आर्डर प्रभावित होना तय है।

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होली करीब होने से भी बनारसी साड़ी कारोबारियों की धड़कनें तेज हैं। वहीं सिल्क को बढ़ावा देने के लिए हर साल के हर फरवरी माह में चीन में आयोजित सिल्क फेयर को निरस्त कर दिया गया है। इस सिल्क फेयर में बनारस सहित देश दुनिया के सिल्क आयातक-निर्यातक का जुटान होता है।  
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तो ठप हो जाएंगे 40 हजार हथकरघा 
चीन से आने वाले रेशम को बनारसी साड़ी में बुनने वाले जिले के परोक्ष-अपरोक्ष रूप से सात लाख लोग जुड़े हुए हैं। जिले के करीब 40 हजार हथकरघा पर बनारसी वस्त्र तैयार होते हैं। इन हथकरघों पर अभी तो रेशम स्टाक में है लेकिन कोरोना वायरस को देखते हुए सिल्क आयात पर प्रतिबंध लगने के बाद बुनकरों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।

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यदि 10 फरवरी के बाद प्रतिबंध बढ़ाया गया तो फिर एक माह बाद पड़ने वाले होली त्योहार पर बनारसी वस्त्रों का आर्डर कैसे पूरा किया जाएगा। इस बात को लेकर बुनकरों सहित गद्दीदारों में उहापोह की स्थिति है। ऐसे में 40 हजार हथकरघा ठप होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।

सिल्क ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्षपाल कपूर ने बताया कि चीने ने कोरोना वायरस को देखते हुए दस फरवरी तक सिल्क के निर्यात पर रोक लगा दी है। इससे बनारसी साड़ी का कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया है। फरवरी माह में चीन में आयोजित सिल्क फेयर भी स्थगित कर दिया गया है। प्रतिबंध से आने वाले दिनों में रोजी-रोटी पर संकट तय है।

बनारस वस्त्र उद्योग का प्रति माह करीब 200 करोड़ का कारोबार है। जिले के करीब सात लाख लोग परोक्ष-अपरोक्ष रूप से बनारसी वस्त्र उद्योग से जुड़े हैं। कोरोना वायरस के चलते चीन से सिल्क आना बंद हो गया है। यदि इसकी जल्दी काट नहीं ढूंढी गई तो फिर साड़ी उद्योग का नुकसान तय है। एक माह बाद होली है। ऐसे में यह बड़ा संकट बनारसी वस्त्र उद्योग पर आने वाला है। - राजन बहल, महामंत्री- बनारसी साड़ी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन

एक नजर
जिले में प्रतिमाह 200 करोड़ का है बनारसी साड़ी का कारोबार
बनारसी वस्त्र उद्योग से सात लाख लोगों की चलती है रोजी-रोटी
जिले में 40 हजार हथकरघा पर बनती है बनारसी साड़ी
एक लाख से अधिक जुड़े हैं बुनकर
चीन से हर माह 1500 टन आयात होता है सिल्क 
चीन में आयोजित सिल्क फेयर निरस्त, बनारस के कारोबारी भी लेते हैं हिस्सा

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