फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Banaras was like the city of Mirza Ghalib's dreams

पुण्यतिथि आज: आए थे तीन दिन के लिए मगर गालिब को काशी ने दो माह तक जाने न दिया 

Tue, 15 Feb 2022 12:02 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Tue, 15 Feb 2022 12:02 PM IST
सार

गालिब की बनारस पर लिखी हुई मसनवी में 108 शेर हैं और ये फारसी से सिर्फ उर्दू ही नहीं बल्कि संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और बहुत सी दूसरी जबानों में तर्जुमा भी हो चुकी है।

विज्ञापन
Banaras was like the city of Mirza Ghalib's dreams
मिर्जा गालिब

विस्तार

हैं और भी दुनिया में सुखनबर बहुत अच्छे, कहते हैं कि गालिब का है अंदाजे बयां और। सच है गालिब ने जिस नजर से दुनिया को देखा वह एकदम अलग है। चिराग ए दैर में गालिब ने अपने दो महीने के काशी वास को शब्दों में पिरोया है।

विज्ञापन


मशहूर शायर मिर्जा गालिब बनारस के बारे में अपनी मसनवी चिराग ए दैर में लिखा है कि इबादत-खाना-ए-नाकूसियानस्त, हमाना काबा ए हिन्दूस्तानस्त... यानी बनारस हम शंख-नवाजों का मंदिर है, हम हिन्दुस्तानियों का काबा है।
विज्ञापन


गालिब की दो महीने की काशी यात्रा ने चिराग-ए-दैर’(मंदिर का दीया) का रूप ले लिया। मिर्जा गालिब की पुण्यतिथि 15 फरवरी को है। गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था। 15 फरवरी 1869 को दिल्ली में उनका निधन हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने बताया कि मिर्जा गालिब के चिराग ए दैर में मंदिर का दीया और हर रंग का बनारस देखा जा सकता है। चिराग ए दैर में पता चलता है कि बनारस गालिब के सपनों के शहर जैसा था। वर्ष 1827 के आखिरी महीनों में कलकत्ते का सफर करते हुए वह करीब दो महीने के लिए बनारस में ठहरे थे।

उन्होंने पहले तो सिर्फ तीन दिनों के लिए काशी में रुकने की तैयारी की थी, लेकिन यहां के सम्मोहन में बंधे हुए गालिब पूरे दो महीने तक यहां ठहर गए। काशी की संस्कृति और जिंदादिली को फारसी मसनवी में समेटा। जिसको पूरी दुनिया चिराग ए दैर के नाम से जानती है।

गालिब की बनारस पर लिखी हुई इस मसनवी में एक सौ आठ शेर हैं और ये फारसी से सिर्फ उर्दू ही नहीं बल्कि संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और बहुत सी दूसरी जबानों में तर्जुमा भी हो चुकी है। शायर हाजी फरमान हैदर ने बताया कि गालिब ने एक दरवेश से पूछा कि तमाम सारे पाप और अपकर्म के बाद भी दुनिया में कयामत क्यों नहीं आती है। दरवेश ने मुस्कुराकर काशी की ओर इशारा करते हुए जवाब दिया कि वजह ये मुकद्दस शहर है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed