बनारस लिट फेस्ट: राधा, रुक्मिणी, सत्यभामा संग कृष्ण के रिश्तों ने सिखाया पैशन, कर्मा और यूनिटी; जानें खास
राधा-कृष्ण का प्रेम अटूट एकता को दिखाता है। यानी प्रेम हम लोगों को जोड़कर रखता है। इस पर एक फिल्म बन रही है जो कि 2026 तक रिलीज होगी क्योंकि ये मुद्दा महाभारत में सबसे कम हाईलाइट हुआ।
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बनारस लिट फेस्ट में 11 किताबें लिखने वाले अमीश त्रिपाठी ने कहा कि प्रेम का रिश्ता भगवान कृष्ण के नजरिये से समझे। राधा, रुक्मिणी, सत्यभामा संग कृष्ण के रिश्तों ने पैशन, कर्मा और यूनिटी सिखाई है।
वह भारत नवनिर्माण समिति की ओर से नदेसर स्थित होटल ताज के दरबार हाॅल में बनारस लिट्रेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण के संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे। अमीश ने कहा कि कृष्ण और सत्यभामा के रिश्ते में पैशन है। कृष्ण-रुक्मिणी के बीच का प्रेम कर्म के भाव को दिखाता है।
इससे पहले लिट फेस्ट के उद्घाटन समारोह संबोधित करते हुए असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि काशी साहित्य की नगरी है। यहां के साहित्य को उत्सवी स्वरूप देकर बहुत बड़ा काम हुआ है। काशी में अब भी बहुत सी ऐसी पांडुलिपियां हैं जिन्हें पुस्तक का रूप देने की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि बनारस लिट्रेचर फेस्टिवल इस काम को पूरा करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
परंपरा को आगे बढ़ाने का हो रहा काम
विशिष्ट अतिथि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि मैं इस बात से बहुत प्रसन्न हूं कि डॉ. शिवप्रसाद गुप्त जैसी महान विभूति को इस उत्सव में याद किया गया है। काशी वह धरती है जिसने एक से बढ़कर एक विभूतियों को जन्म दिया है। ऐसी विभूतियों की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम बनारस लिट्रेचर फेस्टिवल के माध्यम से किया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बनारस लिट्रेचर फेस्टिवल के रूप में जो सपना देखा गया है, वह आप सबके समवेत प्रयास से यथार्थ में परिवर्तित हुआ है। इसे निरंतर बनाए रखने के लिए इस सपने को और बड़ा करके देखना होगा। मेरा विश्वास है कि संसार की समस्त समस्याओं का समाधान भारतीय दर्शन में है। दर्शन का मूल हमारे साहित्य में है। साहित्य शब्दों से रचा जाता है। शब्द हमारे अनुभवों को दूसरों तक पहुंचाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी ने कहा कि बनारस भारतीय सभ्यता का सदा से केंद्र रहा है। रचनात्मकता और सृजन का उद्गम इसी भूमि से हुआ है। उद्घाटन सत्र में राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल, डॉ. नीरजा माधव, एनपी सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष दीपक मधोक, उपाध्यक्ष अशोक कपूर, बृजेश सिंह, धवल प्रकाश, धर्मेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
डॉ. भगवान दास ने महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया
काशी के पहले भारत रत्न डॉ. भगवान दास के प्रपौत्र डॉ. पुष्कर रंजन ने कहा कि डॉ. भगवान दास ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एनी बेसेंट के साथ मिलकर सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल सहित कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना की।
राष्ट्ररत्न शिव प्रसाद गुप्त के साथ काशी विद्यापीठ की स्थापना में उनका योगदान उच्च शिक्षा के प्रति उनके समर्पण बताता है। डॉ. रंजन ने कहा कि उनके परदादा डॉ. भगवान दास एक प्रख्यात लेखक भी थे। उन्होंने 42 पुस्तकें लिखीं।
अपनी इच्छा से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने साधु
आध्यात्मिक गुरु कृष्ण पद दास ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर हो रहे हैं। सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को सरल और तार्किक रूप से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वह अपनी इच्छा से साधु बने।
पहले वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। बनारस लिट फेस्ट में वृंदावन से पहुंचे कृष्ण पद दास ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म को सबसे तार्किक तरीके से, कविताओं और छोटे अंशों के माध्यम से प्रस्तुत करना है। उन्होंने आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान के नाम का जाप करने की सलाह दी।
संकट मोचन मंदिर में भोर की आरती किसी का भी जीवन बदल सकती है
अमीश त्रिपाठी ने कहा कि संकट मोचन मंदिर में भोर की आरती किसी का जीवन बदल सकती है। मैं कई बार चुपचाप बनारस आता हूं और लेखन करके वापस चला जाता हूं। इस शहर में बहुत शक्ति है।
अमीश ने कहा कि विदेशों में जाओ तो दिखता है कि 5 हजार साल पहले की सभ्यताएं नष्ट हो गईं, लेकिन भारत में आज भी सब कुछ है। मेरे बाबाजी बीएचयू में मैथ व फिजिक्स पढ़ाया करते थे। कालीदास ने कहा था कि संस्कृत के सबसे बड़े लेखक भाषव थे। भाषव ने अपने नाटक में लिखा कि महाभारत का युद्ध हुआ ही नहीं।
काशी ने मेरे अंदर भरा अशांति का बीज, धर्मवीर को छोड़ा- उप सभापति
राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि 4 दशकों तक पत्रकारिता की। उसके बाद राजनीति में आया। 19 साल में बनारस आया। धर्मवीर भारती के साथ काम करने का मौका मिला। सब छोड़कर पत्रकारिता करने हैदराबाद और बिहार गया। क्योंकि, बनारस ने मेरे अंदर अशांति का बीज भर दिया था।
कहा कि देश की नियति राजनीति ही बदल सकती है। चंद्रशेखर, जॉर्ज फर्नांडीस, अटल बिहारी वाजपेयी, आडवानी के संसद में दिए डिबेट देख लें, ये बात साबित हो जाएगी। उधर, वरिष्ठ पत्रकार केशव कर्ण ने कहा कि मीडिया का मुख्य उद्देश्य सत्य का प्रसारण करना है, लेकिन यह पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार सतीश ने उत्तर दिया कि सोशल मीडिया पर कोई भी कुछ भी पोस्ट कर सकता है, लेकिन मुख्यधारा की मीडिया के संपादकों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
राजस्थान की औरतों की हालत हिरणी जैसी
राजस्थानी फोक-पॉप सिंगर इला अरुण ने कहा कि चोली के पीछे क्या है... बहुत आइकाॅनिक सॉन्ग थ्ाा। उस समय मिडिल क्लास में उसे इतना अच्छा नहीं माना जाता था, लेकिन इस गाने ने मुझे बहुत शोहरत दी। लिट फेस्ट के पहले दिन संवाद सत्र में आईं इला का स्वागत दिल्ली दा सुरमा लगाके... गीत से हुआ। वो नाचती भी रहीं। हर-हर महादेव संग संबोधन शुरू किया। कहा- अंग्रेजी में मेरे हाथ तंग हैं। हम तो हिंदी में ही कहेंगे।
नई जनरेशन हिंदी नहीं इंग्लिश पढ़ना चाहती है। मेरे परिवार और पूर्वज यूपी के कन्नौज से हैं, कान्यकुब्ज ब्राह्मण हूं। लेकिन मुझे प्रसिद्धि राजस्थान ने दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान की औरतों की हालत हिरणी की तरह है। उसे हर जगह रेत पर मृग-मरीचिका की तरह से पानी दिखता है, लेकिन पानी कहीं मिलता नहीं।
मंथन सोमवंशी फ्यूजन-फोक म्यूजिक पर देंगे प्रस्तुति
युवा गायक और इंडीपेंडेंट आर्टिस्ट मंथन सोमवंशी शनिवार को बनारस लिट फेस्ट में सेल्फ कंपोज म्यूजिक पर प्रस्तुति देंगे। अर्थशास्त्र में रिसर्च स्कॉलर मंथन क्लासिकल-वेस्टर्न और फोक म्यूजिक में एक्सपर्ट हैं। वह गीतकार भी हैं। अब वह ईस्टर्न म्यूजिक का एक फ्यूजन के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
इसमें हिंदी, संस्कृत, अवधी और भोजपुरी जैसी बोलियों को मिलाकर एक गाना तैयार कर रहे हैं। इसे वेस्टर्न म्यूजिक के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। फिलहाल मंथन के अब तक 5 गाने रिलीज हो चुके हैं। उनकी संगीत यात्रा 2014 से शुरू हुई। पिछले साल अपना पहला डेब्यू सिंगल, रेनकॉन्ट्रे रिलीज किया। इसके बाद अन्य कई सिंगल गाने भी रिलीज किए। फिलहाल गुजरात सेंट्रल विद्यापीठ में रिसर्च कर रहे हैं। चार गानों का ईपी रिलीज हो चुका है।
आज ये खास...
ज्ञान गंगा : अश्वनी कुमार, बद्री नारायण-10 से 10:30
मदन मोहन दानिश -10:30 से 11
ब्राइडिंग वल्डर्स-11:30 से 12:15
अनंदा-कैनेबिज इन इंडिया-12:15-12:45
नीलेश मिश्रा-3:30 से 4 बजे
चिरैया-नाटक-5:15-6 बजे
सुरप्रवाह : लिलियन बेरी का सूफी व गजल गायन -7 बजे से 7:30
उस्मान मीर-7:30 बज से 9 बजे तक
सारस्वत : तुलसीदास के सगुन और कबीर के निर्गुण-1 से दो बजे तक
कथाकविता - तीन से 3:30 बजे तक
भोजपुरी साहित्य - 4:30 से 5 बजे तक
विजडम पैवेलियन : ब्रोकेन प्रामिस-10:30 बजे से 11 बजे
मल्टी लिंग्युअल पोएट्री : 11 से 11:45