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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Banaras Lit Fest He left IIT to join army was shot five times no technology can replace soldier

बनारस लिट् फेस्ट- IIT छोड़कर सेना में आया, पांच गोलियां लगीं; कोई भी तकनीक फौजी का विकल्प नहीं

Sun, 01 Feb 2026 06:06 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 01 Feb 2026 06:06 AM IST
सार

Banaras Lit Fest: बनारस लिट् फेस्ट में आए पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अरूण अनंत नारायण ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि बहादुरी और बेवकूफी दोनों साथ-साथ चलती है। फौज में कोई अटेडेंस नहीं होती है, फिर भी सबसे ज्यादा अनुशासन और काम यहीं रहता है।

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Banaras Lit Fest He left IIT to join army was shot five times no technology can replace soldier
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अरुण अनंत नारायण। - फोटो : संवाद

विस्तार

बनारस लिट् फेस्ट–4 में शनिवार को पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अरुण अनंत नारायण ने कहा, आईआईटी छोड़कर फौज में गया और मुझे पांच बार गोली भी लग चुकी है। आप कहोगे कि ये बेवकूफी है, मगर बहादुरी और बेवकूफी दोनों साथ-साथ चलती है। अनंत नारायण ने आगे कहा कि फौज में कोई अटेडेंस नहीं होती, फिर भी सबसे ज्यादा अनुशासन और काम यहीं है। इसीलिए आईआईटी छोड़कर गया था।

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हमारे फौजियों को कोई भी तकनीक नहीं हटा सकती। योद्धा के अंदर अंदर मानवों का गुण चाहिए। तकनीक युद्ध की रणनीति बदल सकती है। तकनीक आएंगी-जाएंगी लेकिन फौजी इंसान ही रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय मामलों में हाथ में लठ और चेहरे पर सामान्य भाव लेकर चलें। देश को हम यहां तक लेकर आए हैं लेकिन छात्रों अब आपको भारत को आगे लेकर जाना है।

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शिक्षा के 2 फीसदी बजट पर जताया दुख

दरबार हॉल में साहित्य कला और समाज : बदलते संबंधों की पड़ताल की गई। प्रसिद्ध कवि और निबंधकार उदयन बाजपेयी ने शिक्षा के लिए बजट में प्रतिशत देने पर दुख जताया। साथ ही न्यू इंडिया के औचित्य पर सवाल पूछा। कहा कि साहित्य मनुष्य के उस अंतस को छूता है, जो बदलता नहीं है। रचना और आलोचना पर मंथन कर विकास कुमार झा ने एक ट्रेन यात्रा को किस्सों से जोड़ा। कहा कि बाजारवाद से वर्तमान समाज को बचाने और संजोने का कार्य साहित्य और कला द्वारा ही संभव है।

कलाकार की दुनिया ही रंगरेज की दुनिया
प्रसिद्ध हिंदी कवयित्री, कथाकार और उपन्यासकार ममता कालिया ने कलाकार की दुनिया को रंगरेज की दुनिया बताया। कहा कि भारतीय समाज परंपरा और नवीनता दोनों को साथ लेकर चलता है। उन्होंने साहित्य को बदलते मानवीय संबंधों का दर्पण बताया। उनके अनुसार भारत निरंतरता में विश्वास करता है जो परंपराएं पहले थीं, वे भी हमारे साथ भी हैं।

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साहित्य-कला ने बदले रूझान
कथाकार अशोक ने कहा कि साहित्य और कला के प्रति समाज के रुझान में बदलाव हुआ है। अब वो लगाव और वो समझदारी नजर नहीं आती, जो होनी चाहिए। पत्रकार और लेखक पंकज चतुर्वेदी ने युवाओं को कालिदास जैसे क्लासिक साहित्यकारों को पढ़ने की सलाह दी। साहित्य उसे ही बदल सकता है, जो बदलने के लिए प्रस्तुत हो या बदलाव के लिए तैयार हो।

बनारस लिट फेस्ट - 4000 साल में कई बार बदली हैं भाषाएं : पेगी मोहन
बनारस लिट फेस्ट में प्रख्यात लेखिका पेगी मोहन ने युवानिका चोपड़ा के साथ संवाद किया। भारत और दक्षिण एशिया की भाषाई परंपराओं की बात की। पेगी मोहन ने कहा कि पंजाबी, भोजपुरी सहित कई भारतीय भाषाओं की जड़ें वैदिक और संस्कृत परंपरा में निहित हैं। 4000 वर्षों में ऐतिहासिक घटनाओं और सांस्कृतिक मेल-जोल के कारण भाषाओं में बदलाव होता रहा है। सम्राट अशोक के अभिलेखों का उल्लेख करते हुए पेगी मोहन ने बताया कि लिपि और बोली ने एक-दूसरे को प्रभावित किया है। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाएं न केवल प्राचीन विरासत की वाहक हैं, बल्कि आज भी जीवंत और प्रासंगिक हैं।

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