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Varanasi News: दुष्कर्म और युवती की मौत मामले में आरोपी मोहम्मद समीर की जमानत अर्जी खारिज
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बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र का हवाला दिया जिसका अभियोजन ने विरोध किया
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्रुतगामी न्यायालय प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत ने दुष्कर्म और युवती की मौत के गंभीर मामले में आरोपी मोहम्मद समीर की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि मामला गंभीर है। प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 10 जून 2026 को सारनाथ क्षेत्र में एक युवती संदिग्ध परिस्थितियों में अचेत मिली थी। वह जेएनएम में प्रशिक्षण ले रही थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। तहरीर के आधार पर सारनाथ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। जांच के दौरान पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिले। इन फुटेज में युवती को आरोपी के हॉस्टल में जाते देखा गया। विवेचना में आरोपी ने दोनों के बीच संबंध होने की बात स्वीकार की। घटना वाले दिन शारीरिक संबंध बनने की बात भी मानी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने युवती का मोबाइल फोन तोड़कर कूलर में छिपा दिया था। बाद में पुलिस ने मोबाइल बरामद कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय राय में युवती की मृत्यु का कारण गंभीर आंतरिक चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है। मेडिकल साक्ष्यों को विवेचना का महत्वपूर्ण आधार माना गया। बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाने की दलील दी। उसने आरोपी की उम्र मात्र 20 वर्ष होने का हवाला भी दिया। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता, मेडिकल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का हवाला दिया। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध हैं। अपराध समाज और महिला के विरुद्ध गंभीर प्रकृति का है। ऐसे मामलों में जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्रुतगामी न्यायालय प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत ने दुष्कर्म और युवती की मौत के गंभीर मामले में आरोपी मोहम्मद समीर की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि मामला गंभीर है। प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 10 जून 2026 को सारनाथ क्षेत्र में एक युवती संदिग्ध परिस्थितियों में अचेत मिली थी। वह जेएनएम में प्रशिक्षण ले रही थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। तहरीर के आधार पर सारनाथ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। जांच के दौरान पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिले। इन फुटेज में युवती को आरोपी के हॉस्टल में जाते देखा गया। विवेचना में आरोपी ने दोनों के बीच संबंध होने की बात स्वीकार की। घटना वाले दिन शारीरिक संबंध बनने की बात भी मानी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने युवती का मोबाइल फोन तोड़कर कूलर में छिपा दिया था। बाद में पुलिस ने मोबाइल बरामद कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय राय में युवती की मृत्यु का कारण गंभीर आंतरिक चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है। मेडिकल साक्ष्यों को विवेचना का महत्वपूर्ण आधार माना गया। बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाने की दलील दी। उसने आरोपी की उम्र मात्र 20 वर्ष होने का हवाला भी दिया। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता, मेडिकल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का हवाला दिया। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध हैं। अपराध समाज और महिला के विरुद्ध गंभीर प्रकृति का है। ऐसे मामलों में जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता।
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