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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Sawan First-ever ceremonial procession Shiva and Gauri ritual anointing of Baba with water rivers five wells

सावन: पहली बार शिव-गौरी की शोभायात्रा, 5 नदियों व 5 कूपों के जल से बाबा का अभिषेक; चंद्रमौलिश्वर रूप में दर्शन

Sun, 23 Aug 2026 01:10 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 23 Aug 2026 01:10 AM IST
सार

वाराणसी में सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा विश्वनाथ का विशेष अभिषेक पांच नदियों और पांच कूपों के जल से किया जाएगा। बाबा चंद्रमौलिश्वर रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके लिए मंदिर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। विशेष पूजन और श्रृंगार के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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Sawan First-ever ceremonial procession Shiva and Gauri ritual anointing of Baba with water rivers five wells
काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवाधिदेव महादेव की नगरी में सावन में पहली बार शिव-गौरी की शोभायात्रा निकाली जाएगी। काशी के पौराणिक पंचनद तीर्थ (पंचगंगा घाट की पांच नदियां गंगा, यमुना, सरस्वती, किरणा और धूतपापा), पांच कूपों- ज्ञानकूप (ज्ञानवापी), चंद्रकूप, नागकूप, धन्वन्तरि कूप (महामृत्युंजय) और मणिकर्णिका घाट स्थित चक्रपुष्करिणी कूप के जल से अभिषेक होगा। यह अनूठा और मनोहारी दृश्य 25 अगस्त को दिखेगा। बाबा के ससुराल सारंगनाथ में उत्सव जैसा माहौल होगा।

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बाबा भक्तों को ‘चंद्रमौलिश्वर’ स्वरूप में दर्शन देंगे। सारंगनाथ मंदिर परिसर में प्रतीकात्मक रूप से बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ हिंडोले (झूले) पर विराजमान होंगे। प्रदोष काल में सपरिवार भगवान का यह ‘झुलनोत्सव’ काशी की एक अनूठी परंपरा का हिस्सा होगा।
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बाबा विश्वनाथ के पार्थिव शिवलिंग अभिषेक और मनमोहक झुलनोत्सव की झांकी सजेगी। देश-विदेश के 501 परिवार सामूहिक रुद्राभिषेक करेंगे। इसमें अमेरिका और आयरलैंड के अलावा देश के दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू आदि शहरों के श्रद्धालु शामिल होंगे।

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शिव बरात समिति के संरक्षक दिलीप सिंह, सामूहिक रुद्राभिषेक पीठम् के संरक्षक सुधीरानंद महाराज और भानू मिश्रा ने शनिवार को मारवाड़ी युवक भवन में पत्रकारों को बताया कि बाबा की पालकी यात्रा सारनाथ स्थित श्रेयांसनाथ जन्मस्थली से दोपहर तीन बजे निकलेगी। मार्गों में जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायी भी पुष्पवर्षा कर बाबा की पालकी शोभायात्रा की अगवानी करेंगे। विविध वाद्ययंत्रों की गूंज के साथ बाबा की पालकी यात्रा सारंगनाथ महादेव मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी।

पालकी यात्रा के सारंगनाथ मंदिर पहुंचने के बाद मुख्य अनुष्ठान सामूहिक रुद्राभिषेक शुरू होगा। 501 परिवार मिट्टी के पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर विधि-विधान से पूजन करेंगे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक रुद्राभिषेक होगा। उत्सव में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, डुमरांव राजपरिवार, मंत्रियों, मेयर आदि को न्योता दिया गया है। अमेरिका से राजेश कुमार श्रीवास्तव, आयरलैंड से सुरेश चंद्र पाठक और दिल्ली से गौरव कौशिक आदि शामिल होने के लिए आ रहे हैं।

अभिषेक के बाद बाबा विश्वनाथ का अलौकिक शृंगार होगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर को बाबा विश्वनाथ का ससुराल और ऋषि सारंग (माता पार्वती के भाई) की तपोस्थली माना जाता है। इस मंदिर के गर्भगृह में एक ही अरघे के भीतर दो शिवलिंग स्थापित हैं, जिन्हें जीजा (बाबा विश्वनाथ) और साले (ऋषि सारंग) का प्रतीक माना जाता है। सावन और भाद्रपद के महीनों में यहां पूजन का फल काशी विश्वनाथ के दर्शन के समतुल्य माना गया है।

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