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रंगभरी एकादशी: 350 साल बाद कश्मीर की लकड़ी से तैयार हुआ बाबा विश्वनाथ का नया रजत सिंहासन 

Sun, 13 Mar 2022 10:40 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 13 Mar 2022 10:40 AM IST
सार

रंगभरी एकादशी महोत्सव के लिए गठित ‘शिवांजलि’ के माध्यम से कश्मीर के बाबा भक्त मनीष पंडित ने चिनार और अखरोट की लकड़ी सिंहासन के लिए उपलब्ध कराई है।

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Baba kashi Vishwanath's new silver throne made of Kashmir wood after 350 years
बाबा विश्वनाथ की बरात के लिए तैयार हुअा नया सिंहासन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्री काशी विश्वनाथ रंगभरी एकादशी पर गौरा को नए रजत सिंहासन पर विदा कराकर कैलाश ले जाएंगे। बाबा की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा के लिए महंत परिवार ने नया रजत सिंहासन तैयार कराया है। शनिवार की शाम को शिवांजलि की ओर से बाबा को नवनिर्मित रजत सिंहासन अर्पित किया गया।

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कश्मीर से मंगवाई गई लकड़ी से 350 साल बाद महंत परिवार ने बाबा का नया रजत सिंहासन बनवाया है। रंगभरी एकादशी पर 14 मार्च को बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा नए रजत सिंहासन पर निकलेगी।
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क्षतिग्रस्त हो गया था बाबा की रजत पालकी का सिंहासन
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि दो वर्ष पूर्व विश्वनाथ मंदिर स्थित महंत आवास का हिस्सा कॉरिडोर विस्तारीकरण के दौरान अचानक गिर जाने के कारण बाबा की रजत पालकी का सिंहासन एवं शिवाला क्षतिग्रस्त हो गया था। रंगभरी एकादशी महोत्सव के लिए गठित ‘शिवांजलि’ के माध्यम से कश्मीर के बाबा भक्त मनीष पंडित ने चिनार और अखरोट की लकड़ी सिंहासन के लिए उपलब्ध कराई है। काशी के जगतगंज निवासी काष्ठ शिल्पी शशिधर प्रसाद ‘पप्पू’ ने सिंहासन को आकार दिया है।

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दिल्ली व कश्मीर के भक्तों ने किया सहयोग

सिंहासन को दशाश्वमेध के कारीगर अशोक कसेरा ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिल कर तैयार किया है। खास बात यह है कि शशिधर प्रसाद और अशोक कसेरा दोनों ने ही बाबा का सिंहासन तैयार करने के एवज में कोई मेहनताना नहीं लिया है। इन दोनों का कहना है कि बाबा की सेवा का अवसर जीवन में पहली बार मिला है। यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

‘शिवांजलि’ के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि बाबा की पालकी में लगने वाले नए सिंहासन के लिए लखनऊ के शिवम मिश्रा के माध्यम से दिल्ली व कश्मीर के भक्तों ने सिंहासन के लिए काष्ठ व रजत की व्यवस्था की है। ‘शिवांजलि’ के सदस्यों ने शनिवार को बाजे-गाजे के साथ नए सिंहासन को टेढ़ी नीम महंत आवास में डॉ. कुलपति तिवारी को सौंप दिया।

गयास अहमद तैयार कर रहे बाबा विश्वनाथ की पगड़ी

रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ हाजी गयास के हाथों तैयार शाही पगड़ी पहनकर तैयार होंगे। श्री काशी विश्वनाथ की शाही पगड़ी ढाई सौ साल से हाजी गयास का परिवार बनाता आ रहा है। हर साल की तरह मखमल के साथ जरी, बूटा, नगीना, फलंगी एवं सुरखाब के पंख से बाबा की पगड़ी बनकर तैयार है। रविवार को महंत आवास पर विधि विधान से पगड़ी की पूजा की जाएगी।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि हाजी गयास के परदादा जब लखनऊ से आए थे तो यहीं के होकर रह गए। उन्होंने पहली बार बाबा की पगड़ी बनाने की पेशकश की तो उसको स्वीकार कर लिया गया था। वहां से चली आ रही सद्भाव की यह परंपरा आज तक कायम है।

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