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खजूर की आवक घटी, व्यापारियों की बढ़ी परेशानी
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वाराणसी। रमजान में रोजेदारों के लिए खजूर का बड़ा महत्व होता है। इफ्तार और सहरी के समय खजूर खाकर ही रोजा खोला जाता है। रोजेदारों के लिए इस समय चिंता की बात यह है कि लॉकडान में खजूर की आवक करीब 80 फीसदी तक कम हो गई है। मुंबई, गुजरात सहित नई दिल्ली की आजाद मंडी से बनारस के नई सड़क, दालमंडी, बेनिया आदि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में पहुंचने वाले खजूर की आवक कम होने से कारोबारी परेशान हैं।
लॉकडाउन के चलते कुछ व्यापारियों ने शुरूआत में ही किसी तरह माल मंगवा लिया था लेकिन अब बहुत से व्यापारियों का माल खत्म हो गया है। शहर सहित अन्य जिलों के व्यापारियों की मांग आ रही है लेकिन खजूर उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। पहले जहां दो से तीन ट्रक माल आता था तो वहीं अब सप्ताह में एक बार छोटे वाहन से खजूर किसी तरह नई दिल्ली से शहर में आ जा रहा है। ऐसी स्थिति में कारोबारियों ने आशंका जताई कि जिस तरह से लॉकडाउन में माहौल बना है, उससे आने वाले सप्ताह में खजूर की आवक बिल्कुल ठप होने का अनुमान है। मांग कम, खपत अधिक होने के कारण खजूर के दाम भी बढ़ रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले खजूर 250 से 350 रुपये किलो में बिक रहे हैं। पहले यही खजूर 120 से 170 रुपये किलो में बिकता था। व्यापारियों के अनुसार ब्लैक शायर खजूर की मांग अधिक होती है। यह खजूर 320 से 350 रुपये किलो में बिकता है। वहीं इससे कम में जैदी खजूर 120 से 160 रुपये किलो तक बिकता है। व्यापारियों के अनुसार इस बार रमजान में खजूर की किल्लत होनी तय है।
विदेशों से आयात होता है खजूर
भारत में ईराक, ईरान, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अल्जीरिया, मलेशिया, इजरायल से मुंबई, नई दिल्ली और गुजरात में खजूर आयात किया जाता है। वहा से खजूर वाराणसी में आता है। पिछले माह से माल की आवक बहुत कम हो गई है। कारोबारियों के अनुसार परिवहन सबसे बड़ी समस्या आ रही है। एक तो मंडियों में मजदूरों की कमी और ऊपर से बड़े वाहनों के नहीं चलने से तमाम दिक्कतें आ रही हैं।
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इस बार खजूर की आवक 80 फीसदी तक ठप है। अरब देशों से होकर मुंबई, नई दिल्ली के रास्ते खजूर आता है लेकिन लॉकडाउन के दौरान इस बार नहीं लगता कि रमजान तक खजूर की आवक रफ्तार पकड़ पाएगी।-शारिक खान, खजूर कारोबारी, दालमंडी
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लॉकडाउन के चलते कुछ व्यापारियों ने शुरूआत में ही किसी तरह माल मंगवा लिया था लेकिन अब बहुत से व्यापारियों का माल खत्म हो गया है। शहर सहित अन्य जिलों के व्यापारियों की मांग आ रही है लेकिन खजूर उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। पहले जहां दो से तीन ट्रक माल आता था तो वहीं अब सप्ताह में एक बार छोटे वाहन से खजूर किसी तरह नई दिल्ली से शहर में आ जा रहा है। ऐसी स्थिति में कारोबारियों ने आशंका जताई कि जिस तरह से लॉकडाउन में माहौल बना है, उससे आने वाले सप्ताह में खजूर की आवक बिल्कुल ठप होने का अनुमान है। मांग कम, खपत अधिक होने के कारण खजूर के दाम भी बढ़ रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले खजूर 250 से 350 रुपये किलो में बिक रहे हैं। पहले यही खजूर 120 से 170 रुपये किलो में बिकता था। व्यापारियों के अनुसार ब्लैक शायर खजूर की मांग अधिक होती है। यह खजूर 320 से 350 रुपये किलो में बिकता है। वहीं इससे कम में जैदी खजूर 120 से 160 रुपये किलो तक बिकता है। व्यापारियों के अनुसार इस बार रमजान में खजूर की किल्लत होनी तय है।
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विदेशों से आयात होता है खजूर
भारत में ईराक, ईरान, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अल्जीरिया, मलेशिया, इजरायल से मुंबई, नई दिल्ली और गुजरात में खजूर आयात किया जाता है। वहा से खजूर वाराणसी में आता है। पिछले माह से माल की आवक बहुत कम हो गई है। कारोबारियों के अनुसार परिवहन सबसे बड़ी समस्या आ रही है। एक तो मंडियों में मजदूरों की कमी और ऊपर से बड़े वाहनों के नहीं चलने से तमाम दिक्कतें आ रही हैं।
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इस बार खजूर की आवक 80 फीसदी तक ठप है। अरब देशों से होकर मुंबई, नई दिल्ली के रास्ते खजूर आता है लेकिन लॉकडाउन के दौरान इस बार नहीं लगता कि रमजान तक खजूर की आवक रफ्तार पकड़ पाएगी।-शारिक खान, खजूर कारोबारी, दालमंडी