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बग्घी और घोड़ों पर सवार होकर निकले काशी के संत
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2015 02:19 AM IST
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वाराणसी। रामभक्ति धारा के प्रवर्तक रामानंदाचार्य की जयंती पर सोमवार को वैष्णव संप्रदाय के संतों ने शाही अंदाज में शोभायात्रा निकाली। कुछ संत घोड़ों पर सवार होकर निकले तो कुछ रथों और बग्घियों पर।
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बाजेगाजे पर झूमने-थिरकने के माहौल के बीच उत्सव जैसा माहौल बना रहा। अस्सी पर हुई सभा में रामभक्ति परंपरा पर विस्तार से रोशनी डाली गई।
दशाश्वमेध स्थित चितरंजन पार्क से दिन के 10:30 बजे हथियाराम मठ के महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति ने शोभायात्रा को रवाना किया। इसी के साथ बैंडबाजा की धुन पर झूमते हुए संत आगे बढ़े।
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गोदौलिया से गुरुबाग, भेलूपुर, आईपी विजया तिराहा होते हुए भदैनी से होकर शोभायात्रा राघव मंदिर अस्सी पहुंची। शोभायात्रा में घोड़े पर तो संत सवार थे ही, बग्घियों पर महंत केके दास, महंत राम लखन दास, महंत देवादास बैठे थे। एक रथ पर राम, लक्ष्मण, सीता की झांकी थी तो दूसरे पर रामानंदाचार्य का चित्र।
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राघव मंदिर में हुई सभा में पतालपुरी पीठ के महंत बालक दास ने कहा कि रामानंदाचार्य ने भक्ति वह प्रेममयी गंगा बहाई है जिसने एक संस्कृति को रोप दिया है। इस मौके पर वैष्णव विरक्त संत समाज के महामंत्री शर्वेश्वर शरण, महंत सियाराम दास, महंत श्रवण दास, महंत ईश्वर दास, महंत हरिदास, राजकुमार दास, दीनबंधु दास,राम लोचन दास, अवध बिहारी दास समेत तमाम महंत उपस्थित थे।