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टफंड ग्लास के घेरे में अशोक स्तंभ के अवशेष
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2015 02:21 AM IST
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वाराणसी। सारनाथ स्थित पुरातात्विक अवशेषों को सुरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग की योजना साकार होने लगी है। मूल गंध कुटी विहार स्थित अशोक स्तंभ के अवशेषों को टफंड ग्लास के घेरे से सुरक्षित कर दिया गया है। यही नहीं, धमेख स्तूप, पंचायतन मंदिर सहित कई अन्य अवशेषों के चारों ओर लकड़ी की रेलिंग लगा दी गई है।
खुले में होने के कारण खंडहर परिसर में स्थित पुरातात्विक अवशेषों पर मौसम की मार पड़ रही थी। भारतीय पुरातत्व विभाग ने कई महीने पूर्व ऐसी योजना बनाई थी, जो पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण बढ़ाने के साथ ही इन अवशेषों को सुरक्षा प्रदान करे। इसी महत्वाकांक्षी योजना के जहां अशोक स्तंभ
को टफंड ग्लास से घेर दिया गया है। इस ग्लास के घेरे में अवशेष जहां सुरक्षित रहेंगे, वहीं पर्यटकों को इनका दीदार करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। इसी प्रकार पंचायतन मंदिर, प्राचीन मूलगंध कुटी विहार मंदिर एवं धमेख स्तूप को लकड़ी की रेलिंग से सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है। अधीक्षण पुरातत्वविद अजय श्रीवास्तव ने बताया कि अवशेषों की सुरक्षा के लिए ग्लास और रेलिंग लगाने का काम पूरा हो गया है।
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खुले में होने के कारण खंडहर परिसर में स्थित पुरातात्विक अवशेषों पर मौसम की मार पड़ रही थी। भारतीय पुरातत्व विभाग ने कई महीने पूर्व ऐसी योजना बनाई थी, जो पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण बढ़ाने के साथ ही इन अवशेषों को सुरक्षा प्रदान करे। इसी महत्वाकांक्षी योजना के जहां अशोक स्तंभ
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को टफंड ग्लास से घेर दिया गया है। इस ग्लास के घेरे में अवशेष जहां सुरक्षित रहेंगे, वहीं पर्यटकों को इनका दीदार करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। इसी प्रकार पंचायतन मंदिर, प्राचीन मूलगंध कुटी विहार मंदिर एवं धमेख स्तूप को लकड़ी की रेलिंग से सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है। अधीक्षण पुरातत्वविद अजय श्रीवास्तव ने बताया कि अवशेषों की सुरक्षा के लिए ग्लास और रेलिंग लगाने का काम पूरा हो गया है।
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