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गंगा के रौद्र रूप ने हजारों लोगों को किया दर-ब-दर
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
Updated Fri, 19 Aug 2016 02:03 AM IST
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काशी में देर रात खतरे के निशान के पार हुई गंगा ने तटीय कॉलोनियों में हाहाकार मचा दिया। गंगा के रौद्र रूप को देख लोग सकते में आ गए। पतितपावनी का रुख सड़कों की ओर होने के साथ ही एक तरफ बाढ़ देखने के लिए विदेशी सैलानियों, देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों की भीड़ लग गई, वहीं दर-ब-दर हुए हजारों लोग सुरक्षित ठांव की तलाश में भटकते नजर आए। मदरवां, सामने घाट से लेकर सूजाबाद तक हजारों लोगों को गंगा की बाढ़ के चलते घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। सड़कों पर नावें हिचकोले खाने लगी हैं। इसी तरह 2013 में भी सड़कों पर गंगा हिलोरें मारने लगी थीं।
केंद्रीय जल आयोग के कंट्रोल रूम के अनुसार इस अवधि तक गंगा के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। विश्वसुंदरी पुल के पास से होते हुए मदरवा, मलहिया टोला, सामने घाट, नगवां, महेश नगर, मारुति नगर से अस्सी के बीच की कॉलोनियों में गंगा के प्रवेश करने से मुसीबत खड़ी हो गई। हालांकि एक दिन पहले से ही रामानुज नगर के कुछ घरों में गंगा के पलट प्रवाह से असि नदी का पानी आने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था लेकिन चार सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दोपहर तीन बजे तक हुए बढ़ाव के चलते पानी तेज गति से कॉलोनियों में घुसने लगा। इससे हड़कंप मच गया।
शाम चार बजे तक 16 परिवारों के 70 से अधिक सदस्यों को अस्सी के गोयनका पाठशाला में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया गया। देर रात तक इस शिविर में लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी था लेकिन सैकड़ों परिवारों ने अपनी गृहस्थी छतों पर पहुंचा दी लेकिन ऐसे लोगों की मुश्किलें शुक्रवार तक बढ़ सकती हैं। अगर इसी तरह से बढ़ाव जारी रहा और गलियों में पानी भर गया तो फिर सब्जी, दूध के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाएगी।
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कालोनियों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद प्रभावित परिवारों के लोग किराये के मकान की तलाश में जुट गए हैं। तमाम लोगों ने घर छोड़ने के बाद रिश्तेदारों और शुभेच्छुओं के यहां शरण लेनी शुरू कर दी है। दूसरी ओर चोर-उचक्कों का भी डर सता रहा है कि कहीं बाढ़ की आड़ में चोर उनके घरों को नावों के जरिए खंगाल कर निकल न जाएं। प्रभु सोनकर, कुमकुम झा, प्रदीप सोनकर, विकाश मिश्रा, राजकुमार कन्नौजिया, अखिलेश कुमार का कहना है कि किराए का मकान ढूंढना मुश्किल हो गया है। इस मुसीबत में लोग दोगुना किराया मांग रहे हैं। नगवा के सभासद के प्रतिनिधि सोनू सोनकर का ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हर कोशिशें की जा रही हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
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केंद्रीय जल आयोग के कंट्रोल रूम के अनुसार इस अवधि तक गंगा के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। विश्वसुंदरी पुल के पास से होते हुए मदरवा, मलहिया टोला, सामने घाट, नगवां, महेश नगर, मारुति नगर से अस्सी के बीच की कॉलोनियों में गंगा के प्रवेश करने से मुसीबत खड़ी हो गई। हालांकि एक दिन पहले से ही रामानुज नगर के कुछ घरों में गंगा के पलट प्रवाह से असि नदी का पानी आने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था लेकिन चार सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दोपहर तीन बजे तक हुए बढ़ाव के चलते पानी तेज गति से कॉलोनियों में घुसने लगा। इससे हड़कंप मच गया।
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शाम चार बजे तक 16 परिवारों के 70 से अधिक सदस्यों को अस्सी के गोयनका पाठशाला में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया गया। देर रात तक इस शिविर में लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी था लेकिन सैकड़ों परिवारों ने अपनी गृहस्थी छतों पर पहुंचा दी लेकिन ऐसे लोगों की मुश्किलें शुक्रवार तक बढ़ सकती हैं। अगर इसी तरह से बढ़ाव जारी रहा और गलियों में पानी भर गया तो फिर सब्जी, दूध के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाएगी।
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कालोनियों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद प्रभावित परिवारों के लोग किराये के मकान की तलाश में जुट गए हैं। तमाम लोगों ने घर छोड़ने के बाद रिश्तेदारों और शुभेच्छुओं के यहां शरण लेनी शुरू कर दी है। दूसरी ओर चोर-उचक्कों का भी डर सता रहा है कि कहीं बाढ़ की आड़ में चोर उनके घरों को नावों के जरिए खंगाल कर निकल न जाएं। प्रभु सोनकर, कुमकुम झा, प्रदीप सोनकर, विकाश मिश्रा, राजकुमार कन्नौजिया, अखिलेश कुमार का कहना है कि किराए का मकान ढूंढना मुश्किल हो गया है। इस मुसीबत में लोग दोगुना किराया मांग रहे हैं। नगवा के सभासद के प्रतिनिधि सोनू सोनकर का ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हर कोशिशें की जा रही हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।