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भव्य शोभायात्रा के साथ तीन दिवसीय कार्यकम का हुआ समापन
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स्वर्ण शताब्दी वैदिक धर्म महासम्मेलन के समापन पर नरिया रामनाथ वाटिका से निकली शोभायात्रा
महर्षि दयानंद सरस्वती के काशी शास्त्रार्थ की 150वें वर्ष पर आयोजित स्वर्ण शताब्दी वैदिक धर्म महासम्मेलन का समापन भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा नरिया से निकलकर आनंद बाग पहुंची। इस दौरान आर्य समाज के वैदिक चिंतकों ने विश्व में काशी से वेदों का डंका फिर से बजाने का आह्वान किया।
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा एवं उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा के संयुक्त तत्वावधान में नरिया में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव में देश और विदेशों से भी आर्य समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। रविवार को नरिया से शोभायात्रा आरंभ हुई। शोभायात्रा जहां से भी गुजरी लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। आर्य वीर दल एवं आर्य वीरांगना दल की ओर से किए गए योग, तलवारबाजी और करतब हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।
शोभायात्रा में शामिल आर्य समाज के लोग ऊं ध्वज, केसरिया टोपी और पगड़ी पहने हुए चल रहे थे। रास्ते भर वह महर्षि दयानंद की जय, भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। आनंद बाग में जनसभा को संबोधित करते हुए सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान सुरेशचंद्र आर्य ने कहा कि काशी नगरी से ही स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों की ओर लौटने का नारा बुलंद किया था।
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आर्य समाज के उदय होने में काशी नगरी का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्तर प्रदेश प्रतिनिधि सभा के महामंत्री धर्मेश्वरानंद, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान धर्मपाल आर्य ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाना है तो अंधविश्वास पाखंड को मिटाना होगा। भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र के नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी को साथ आना होगा।
आधुनिक भारत में छुआछूत और जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। शोभायात्रा का संचालन धर्मपाल आर्य ने किया। अध्यक्षता सुरेशचंद्र आर्य ने किया। इस दौरान प्रमोद आर्य, सुरेश गुप्ता, प्रकाश आर्य, विनय आर्य, आचार्य नंदिता शास्त्री, आचार्य अन्नपूर्णा, आचार्य देवव्रत, सतीश, स्वामी संपूर्णानंद आदि मौजूद रहे।
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सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा एवं उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा के संयुक्त तत्वावधान में नरिया में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव में देश और विदेशों से भी आर्य समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। रविवार को नरिया से शोभायात्रा आरंभ हुई। शोभायात्रा जहां से भी गुजरी लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। आर्य वीर दल एवं आर्य वीरांगना दल की ओर से किए गए योग, तलवारबाजी और करतब हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।
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शोभायात्रा में शामिल आर्य समाज के लोग ऊं ध्वज, केसरिया टोपी और पगड़ी पहने हुए चल रहे थे। रास्ते भर वह महर्षि दयानंद की जय, भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। आनंद बाग में जनसभा को संबोधित करते हुए सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान सुरेशचंद्र आर्य ने कहा कि काशी नगरी से ही स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों की ओर लौटने का नारा बुलंद किया था।
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आर्य समाज के उदय होने में काशी नगरी का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्तर प्रदेश प्रतिनिधि सभा के महामंत्री धर्मेश्वरानंद, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान धर्मपाल आर्य ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाना है तो अंधविश्वास पाखंड को मिटाना होगा। भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र के नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी को साथ आना होगा।
आधुनिक भारत में छुआछूत और जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। शोभायात्रा का संचालन धर्मपाल आर्य ने किया। अध्यक्षता सुरेशचंद्र आर्य ने किया। इस दौरान प्रमोद आर्य, सुरेश गुप्ता, प्रकाश आर्य, विनय आर्य, आचार्य नंदिता शास्त्री, आचार्य अन्नपूर्णा, आचार्य देवव्रत, सतीश, स्वामी संपूर्णानंद आदि मौजूद रहे।