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संकटमोचन संगीत समारोह: बोले अरमान, मेरा बस चले तो मैं बनारस में ही बस जाऊं

Wed, 01 May 2024 03:58 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 01 May 2024 03:58 PM IST
सार

Varanasi News: संकट मोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देने आए अरमान खान को सुनने को लेकर उत्सुकता दिखी। उनके आवाज सुनते ही दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए। तालियों के साथ वाह-वाह की भी आवाज उठती रही।

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Arman Khan performed in Sankat Mochan Sangeet Samaroh
अरमान खान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरा बस चले तो मैं बनारस में ही बस जाऊं। यहां आकर जो प्यार, सुकून और आशीर्वाद मिलता है उसका कोई जवाब नहीं है। इसलिए यहां बार-बार आने का मन करता है। बनारस का कोई जवाब ही नहीं है। संकटमोचन के मंच पर प्रस्तुति देना तो हर कलाकार की ख्वाहिश होती है। यह कहना है शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खां के पुत्र अरमान खान का।
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संकटमोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देने के बाद बातचीत के दौरान अरमान खान ने कहा कि मेरी आज की प्रस्तुति के वक्त बाबा ने जो भी सिखाया था वह दिमाग में था। एक झलक उनकी बार-बार आ रही थी। आज एक सा रे गा.. भी लगा रहा हूं तो यह उनकी ही देन है। मैं तो इस काबिल भी नहीं हूं कि इतने बड़े मंच पर बैठ सकूं। 
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आज एक खालीपन सा लग रहा था लेकिन महसूस हो रहा था कि उनका हाथ सिर पर है। बाबा और संकटमोचन महाराज के आशीर्वाद से ही मैं अपनी प्रस्तुति दे सका हूं। गिटार मेरा एक्सपेरिमेंट इंस्ट्रूमेंट है। रस्म पगड़ी के बाद पहली बार संकटमोचन के दरबार में आना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। ऐसे लोग हैं जो इतना अच्छा सुनते हैं। 

बनारस आकर मन हल्का हो जाता है। अगर मेरा शहर होता तो मैं यहां शिफ्ट हो जाता। यहां मुझको बहुत प्यार मिलता है। यहां से जाने का मन नहीं करता है। बाबा की कृपा रही तो आते रहेंगे बनारस। आज जो भी हूं वह बड़ों के आशीर्वाद से हूं।


चौथी निशा की चौथी प्रस्तुति लेकर मंचासीन हुईं मुंबई की अमृता चटर्जी ने राग पूरिया कल्याण की अवतारणा की। जनम भयो... बंदिश को उन्होंने राग के स्वरूप के अनुरूप ही श्रोताओं तक पहुंचाया। राग यमन और राग पूरिया धनाश्री का मिश्रण उनके गायन के दौरान मुखर महसूस हुआ।

यही नहीं गायन में राग कल्याण का भी समावेश दिखा। इसके बाद राग मिस्रपीलू में अंग सोहे... की सुमधुर प्रस्तुति की। तान से गायन को विस्तार देने के बाद समापन तराना की प्रभावकारी प्रस्तुति से किया।
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