ज्ञानवापी: अखिलेश और ओवैसी की ओर से पेश की गई दलील, विवादित बयानबाजी से जुड़ा है मामला; प्रार्थनापत्र स्वीकार
Varanasi News: ज्ञानवापी से जुड़े दो मामलों में वाराणसी की अदालत में सुनवाई हुई। एक मामले में अखिलेश यादव और मुस्लिम नेता ओवैसी ने दलील दाखिल की है। वहीं, दूसरे मामले में कोट ने स्थगन प्रार्थनापत्र स्वीकार कर लिया है।
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ज्ञानवापी परिसर स्थित शिवलिंग जैसी आकृति को लेकर विवादित बयानबाजी और सर्वे के दौरान नारेबाजी के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को लेकर दाखिल निगरानी याचिका पर अपर सत्र न्यायाधीश नवम विनोद कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई।
अदालत में विपक्षी बनाए गए ओवैसी व उनके भाई की तरफ से अधिवक्ता ने पक्ष रखा। कहा कि ज्ञानवापी स्थित वजूखाने के फव्वारा और शिवलिंग को लेकर अभी विवाद है। यह तय होना है कि वहां वास्तव में क्या है। ऐसे में फव्वारा कहने से कोई अपराध नहीं बनता है।
अखिलेश यादव की तरफ से उनके अधिवक्ता ने कहा कि पीपल के पेड़ के नीचे पत्थर रख कर पूजापाठ करने संबंधी बयान से किसी की धार्मिक भावना आहत नहीं होती है। न कोई अपराध बनता है।
उधर, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने कहा कि यह वाद प्रचार पाने के लिए दाखिल किया गया है। एडीजीसी ने कहा कि लोअर कोर्ट का आदेश सही है। लोअर कोर्ट मुकदमा दर्ज करने का आवेदन खारिज कर चुकी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में निगरानीकर्ता हरिशंकर पांडेय मौजूद रहे। आरोपियों के पक्ष का निगरानीकर्ता को जवाब देने के लिए पांच अगस्त की तिथि नियत की गई है।
लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ केस में स्थगन प्रार्थनापत्र स्वीकार
सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ केस की सुनवाई टल गई। इस वाद में पक्षकार बनने के लिए वादी रहे हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी तीन पुत्रियों की ओर से दिए स्थगन प्रार्थनापत्र को अदालत ने मंजूर कर लिया। मुकदमे की सुनवाई की अगली तिथि पांच अगस्त नियत की गई है।