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Varanasi News: सदन से मिलेगी मंजूरी, जल्द जारी होगा नगर निगम का बॉन्ड
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नगर निगम बांड जारी होने में राह में जो सबसे बड़ी बाधा थी सदन से मंजूरी न मिलना। अब ये अड़चन दूर हो गई है। पिछले कार्यकाल में सदन में बहुमत न होने के कारण यह अटक रहा था। इस बार सदन में 63 सीटें होने के कारण भाजपा बहुमत में है। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह के बाद होने वाली सदन की बैठक में इस पर चर्चा होगी और इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मेयर अशोक तिवारी ने भी इसके संकेत दिए हैं। इसके जरिए नगर निगम फंड जुटाएगा और इसका इस्तेमाल शहर के विकास में करेगा।
इसके पहले प्रक्रियाओं को पूरी करने में नगर निगम जुटा है। अब तक बांड एडवाइजर के लिए केवल नौ संस्थाओं को भाग लेने की इजाजत थी। अब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए नियम से कोई भी संस्था बांड एडवाइजर बन सकती है। इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी करके निगम सारे दस्तावेज सेबी को भेजेगा। लखनऊ और गाजियाबाद दो ऐसे शहर हैं, जो अपना बांड जारी कर चुके हैं। तकरीबन 800 से एक हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है। पिछले दिनों मुंबई में सेबी के सेमिनार में वाराणसी नगर निगम के बांड की रूपरेखा तैयार जा चुकी है। निगम ने खुद का बांड जारी करने की तैयारी 2017 में प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद ही शुरू की थी, लेकिन तमाम दिक्कतों के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। कोरोना के चलते भी यह काम रुक गया था। अब लेखा विभाग काम को मुकम्मल करने में जुट गया है।
शहर के विकास में बॉन्ड की होगी अहम भूमिका
आने वाले दिनों मेंं नगर निगम बैलेंस शीट को भी एकदम पारदर्शी बनाएगा। पिछले दिनों बैलेंस शीट वगैरह के वेरिफिकेशन का काम हुआ था। अब सेबी की तरफ से यह काम किया जाएगा। निगम 100 करोड़ रुपये बांड के रूप में कलेक्ट करना चाह रहा है। इस दिशा में किया जा रहा प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक वित्त आयोग समेत अवस्थापना निधि, राज्य या केंद्र सरकार के बजट के जरिए नगर निगम विकास कार्यों को आगे बढ़ाता रहा। लेकिन, अब निगम बाजार से पैसा जुटाकर बांड के जरिये आने वाली धनराशि से शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
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नगर निगम बांड जारी करने से पूर्व की सभी प्रक्रियाएं पूरी कराई जा रही हैं। बांड से नगर निगम धन जुटाएगा। इसका इस्तेमाल शहर के विकास कार्य में किया जाएगा। इससे नगर निगम को अतिरिक्त फंड मिलेगा। -शिपू गिरि, नगर आयुक्त
बॉन्ड के फायदे
पारदर्शिता से निगम को काम में आसानी होगी
कर लाभ का फायदा निवेशकों को मिलेगा
न्यूनतम जोखिम निगम की ओर से जारी किए जाएंगे
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इसके पहले प्रक्रियाओं को पूरी करने में नगर निगम जुटा है। अब तक बांड एडवाइजर के लिए केवल नौ संस्थाओं को भाग लेने की इजाजत थी। अब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए नियम से कोई भी संस्था बांड एडवाइजर बन सकती है। इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी करके निगम सारे दस्तावेज सेबी को भेजेगा। लखनऊ और गाजियाबाद दो ऐसे शहर हैं, जो अपना बांड जारी कर चुके हैं। तकरीबन 800 से एक हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है। पिछले दिनों मुंबई में सेबी के सेमिनार में वाराणसी नगर निगम के बांड की रूपरेखा तैयार जा चुकी है। निगम ने खुद का बांड जारी करने की तैयारी 2017 में प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद ही शुरू की थी, लेकिन तमाम दिक्कतों के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। कोरोना के चलते भी यह काम रुक गया था। अब लेखा विभाग काम को मुकम्मल करने में जुट गया है।
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शहर के विकास में बॉन्ड की होगी अहम भूमिका
आने वाले दिनों मेंं नगर निगम बैलेंस शीट को भी एकदम पारदर्शी बनाएगा। पिछले दिनों बैलेंस शीट वगैरह के वेरिफिकेशन का काम हुआ था। अब सेबी की तरफ से यह काम किया जाएगा। निगम 100 करोड़ रुपये बांड के रूप में कलेक्ट करना चाह रहा है। इस दिशा में किया जा रहा प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक वित्त आयोग समेत अवस्थापना निधि, राज्य या केंद्र सरकार के बजट के जरिए नगर निगम विकास कार्यों को आगे बढ़ाता रहा। लेकिन, अब निगम बाजार से पैसा जुटाकर बांड के जरिये आने वाली धनराशि से शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
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नगर निगम बांड जारी करने से पूर्व की सभी प्रक्रियाएं पूरी कराई जा रही हैं। बांड से नगर निगम धन जुटाएगा। इसका इस्तेमाल शहर के विकास कार्य में किया जाएगा। इससे नगर निगम को अतिरिक्त फंड मिलेगा। -शिपू गिरि, नगर आयुक्त
बॉन्ड के फायदे
पारदर्शिता से निगम को काम में आसानी होगी
कर लाभ का फायदा निवेशकों को मिलेगा
न्यूनतम जोखिम निगम की ओर से जारी किए जाएंगे