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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Application to make ancient Lord Swayambhu Vishweshwar rejected in Gyanvapi Case

Gyanvapi Case: प्राचीन लॉर्ड स्वयंभू विश्वेश्वर में बनाने का आवेदन खारिज, अब इस दिन होगी सुनवाई

Fri, 24 May 2024 05:54 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 24 May 2024 05:54 PM IST
सार

Varanasi News; ज्ञानवापी के इस मसले को लेकर शुक्रवार को भी तीखी बहस हुई। दोनों पक्षों को सुनन के बाद कोर्ट ने अगली तारीख नियत कर दी है।

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Application to make ancient Lord Swayambhu Vishweshwar rejected in Gyanvapi Case
Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक प्रशांत कुमार की अदालत ने शुक्रवार को वर्ष 1991 के प्राचीन स्वयं भू ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर की वाद में शैलेंद्र पाठक व जैलेंद्र पाठक की ओर से पक्षकार बनाने के आवेदन को खारिज कर दिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए दो जुलाई की तिथि नियत की है।

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पिछले दिनों इस अर्जी पर सुनवाई हुई थी। सभी पक्षों के सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश के लिए 24 मई की तिथि नियत की थी। वर्ष 2022 में पंडित सोमनाथ व्यास के नाती शैलेंद्र पाठक व जैलेंद्र पाठक ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि दादा के देहांत के उपरांत मुकदमे में पैरवी के लिए पक्षकार बनाया जाए। दोनों ने वरासत प्रार्थनापत्र भी दाखिल किया था। कोर्ट ने 30 मई 2019 को अर्जी में पैरवी नहीं होने के कारण बालाभाव के आधार पर खारिज कर दी थी।

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शैलेंद्र की ओर से अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी और सुभाष चंद्र चतुर्वेदी ने दलील पेश की थी। उसके बाद इस मामले के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने भी बहस की। उसके बाद प्रतिवादी अंजुमन और सुनी वक्फ बोर्ड की ओर से मुमताज अहमद, मो. अखलाक और मो. तौहीद खान ने पक्षकार बनाने के विरोध किया था।

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लाॅर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी और अंजुमन की ओर से कहा गया था कि शैलेंद्र पाठक अन्य की ओर से कई मुकदमा दाखिल किया गया है, जो ज्ञानवापी से संबंधित है। अपना पक्ष उक्त मुकदमे में रख सकते हैं, जो की इस मुकदमे में पक्षकार बनाने की कोशिश कर रहे। इस मुकदमे में सिर्फ व्यवधान डाला जा रहा है।

इस जनप्रतिनिधित्व वाद में वादी के मृत्यु के बाद उनके व्यक्तिगत वारिसान पक्षकार नहीं बन सकते है। ये विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत नहीं है। शैलेंद्र पाठक को विधिक रूप से कोई अधिकार नहीं है, पक्षकार बनाने के लिए जो उनके तरफ से दी जा रही सिर्फ संवेदन भाव से दी जा रही है, जो कानून के दृष्टि में उचित नहीं है, वादी सोमनाथ व्यास की 28 फरवरी 2000 को मृत्यु हो गईं उसके एक माह पहले का वसीयत नामा दाखिल किया गया, जिसमें वादग्रस्त संपत्ति का कोई जिक्र नहीं, सोमनाथ व्यास के दो भाई, दो पुत्रियां व पत्नी भी जो मूल वरिसान वहीं है।


ऐसे में शैलेंद्र पाठक और अन्य की अर्जी खारिज किये जाने योग्य है। इसके जवाब में शैलेंद्र व्यास की ओर से कहा गया कि उसे न कोई व्यक्तिगत लाभ है, न ही कोई हित है। सिर्फ अपने अधिकार के तहत पक्षकार बनाने की गुहार लगाया ताकि मुकदमे की पैरवी में मजबूती मिले।

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