'ऑपरेशन यूपी' में शाह ने साधा अपना दल, अनुप्रिया से मुलाकात में इस बात पर बनी सहमति
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह(Amit Shah) ने ऑपरेशन यूपी को सफल बनाने के लिए एक कदम बढ़ा दिया है। इसी क्रम में अमित शाह(Amit Shah) ने अपना दल (सोनेलाल) अध्यक्ष आशीष पटेल(Ashish patel) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल(anupriya patel) के साथ बैठक की।
इस बैठक में भाजपा और अपना दल (सोनेलाल) के बीच लोकसभा चुनाव साथ लड़ने पर सहमति बन गई है। इसके साथ ही अपना दल(एस) की गुरुवार को लखनऊ में बुलाई गई बैठक भी रद्द कर दी गई है। अपना दल की ओर से 9 वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल हुए।
डेढ़ घंटे चली बातचीत में अमित शाह(Amit Shah) ने अनुप्रिया पटेल(anupriya patel) और आशीष पटेल(Ashish patel) द्वारा प्रदेश सरकार की उपेक्षा का मुद्दा उठाया और कहा कि अगर इसे बंद नहीं किया गया तो गठबंधन को जारी रखना मुश्किल होगा। अमित शाह(Amit Shah) ने उन्हें आश्वासन दिया है कि एनडीए(NDA) की अगली सरकार बनाने के लिए उनके सभी मुद्दों का हल जल्द से जल्द निकाला जाएगा।
अभी औरों को मनाना है बाकी
लोकसभा चुनाव में पिछड़ी जातियों खासतौर से पटेल और राजभर बिरादरी को साधने की कावयद भाजपा ने शुरू कर दी है। भाजपा से नाराज चल रहे अपना दल (सोनेलाल) को अमित शाह(Amit Shah) ने मना लिया, लेकिन अभी कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) को मनाना बाकी है। जिसके तहत बुधवार शाम को ही अमित शाह(Amit Shah) ओमप्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) से मिलेंगे।
शाह से मुलाकात के पहले सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) ने अपना ‘मांग पत्र’ तैयार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक सुभासपा दो सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ी है। सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद प्रदेश के मतदाताओं की सोच पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद फिर बदल गई है। अब सुभासपा भाजपा पर ‘सीमित दबाव’ ही डाल पाएगी।
सुभासपा ने रैली करके दिखाया था जनाधार
बहरहाल, राजभर को साथ रखना भाजपा की सियासी मजबूरी है वहीं, सुभासपा अध्यक्ष की ओर से भी ऐसे संकेत फिलहाल नहीं मिले हैं जिनसे यह माना जाए कि वे एनडीए से अगल हो रहे हैं। अब सबकी नजर अमित शाह से ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात पर है, जिसके बाद सूबे के सियासी परिदृश्य में बदलाव दिख सकता है।
एक बात तो तय है कि सुभासपा अध्यक्ष की नजर 2019 नहीं बल्कि 2022 पर है, जब सूबे में विधानसभा के चुनाव होंगे। पार्टी अगले चुनाव के लिए इतनी मजबूत जमीन तैयार करना चाहती है कि 2022 में सभी दल उससे तालमेल के लिए मजबूर हो जाएं।