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स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा

Mon, 28 Sep 2020 01:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 01:09 AM IST
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Anti rabies vaccine vaccine at health centers
वाराणसी। कुत्ता काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगाना जरूरी है। मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास वैक्सीन की किल्लत बनी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाने वालों को है। यहां पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से संबंधित मरीज को अस्पताल तक चक्कर काटना मजबूरी है। अगर जल्दी वैक्सीन की समस्या दूर नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
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जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगने की व्यवस्था है, जबकि जिला और मंडलीय अस्पताल में भी हर रोज ओपीडी के समय में ही मरीजों को एआरवी लगाया जाता है। पिछले एक महीने से मरीजों की संख्या बढ़ी है। आम तौर पर जहां मंडलीय-जिला अस्पताल में 60 से 80 मरीज आते थे, वहां संख्या बढ़कर 100 से 120 हो गई है। इसमें स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर लोग भी आ रहे हैं। हालत यह है कि अधिकांश केंद्रों पर कमी की वजह से निर्धारित पांच में से एक डोज लगाया जाता है। इसके बाद मरीज जिला-मंडलीय अस्पताल आ रहे हैं। इस वजह से दबाव बढ़ा है। हालांकि शासन ने दो दिन पहले वैक्सीन जरूर भेजी है लेकिन मरीजों की संख्या के हिसाब से वह अभी नाकाफी है।
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बंदरों का आतंक भी कम नहीं
जिले में कुत्ते काटने के मामले के साथ ही लोग बंदरों के आतंक से भी परेशान हैं। रवींद्रपुरी, चेतगंज, नई सड़क, भेलूपुर, सामने घाट सहित कई ऐसे इलाके हैं जहां बंदरों का आतंक अधिक है। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर प्रसन्न कुमार के मुताबिक एआरवी लगवाने के लिए इधर संख्या भी बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों से भी मरीज यहां आ रहे हैं। यही कारण है कि हर रोज अस्पताल में वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या 120 से 150 तक पहुंच जा रही है। इन मरीजों में 20 से 25 की संख्या तो बंदर काटने वालों की रहती है। नियमानुसार सभी को वैक्सीन लगाने के साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं।
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पशु अस्पताल में है 4000 कुत्तों का पंजीकरण
नगर निगम स्थित पशु चिकित्सालय में पालतू कुत्तों का पंजीकरण करने की व्यवस्था है। अब तक यहां करीब 4000 कुत्तों का पंजीकरण हुआ है जबकि शहर में अभी भी हजारों की संख्या में आवारा कुत्ते घूम रहे हैं, आम तौर पर चौराहों, कॉलोनियों में घूमने वाले कुत्तों के काटने का खतरा रहता है। अपर नगर आयुक्त सुमित कुमार के मुताबिक नगर निगम की ओर से भी पशु सचल दल बनाए गए हैं। रोजाना टीम भी शहर में घूमती है और इसमें कुत्तों को भी पकड़ा पकड़ा जा रहा है। इसके अलावा कुत्ता पालने वाले सभी लोगों को पंजीकरण कराने को भी कहा जाता है।

एंटी रेबीज के पांच डोज है जरूरी
अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के पांच डोज लगाए जाते हैं। नियमानुसार कुत्ता या बंदर काटने के 72 घंटे के भीतर पहला इंजेक्शन लगना बहुत जरूरी होता है। इसके 3 दिन बाद दूसरा और 7 दिन बाद तीसरा जबकि कुत्ता और बंदर काटने के 14 दिन बाद चौथी सुई और पांचवीं सुई 28 दिन के बाद लगाए जाने की व्यवस्था है। अस्पताल में जो पर्ची बनाए जाते हैं उस पर मरीजों के अगली बार के इंजेक्शन लगाने का भी डेट लिखा जाता है।
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