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IIT BHU: आईआईटी में एएनआरएफ देगा शोध को बढ़ावा, सीईओ ने किया दौरा; वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए अपने रिसर्च

Wed, 20 Aug 2025 06:44 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 20 Aug 2025 06:44 PM IST
सार

आईआईटी बीएचयू में रिसर्च इकोसिस्टम बेहतर होगा। एएनआरएफ यहां शोध को बढ़ावा देगा। इसे लेकर सीईओ ने आईआईटी बीएचयू का दौरा किया। उन्होंने लैब में मशीनों और रिसर्च का निरीक्षण किया। 

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ANRF will promote research in IIT BHU in varanasi
आईआईटी बीएचयू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. शिवकुमार कल्याणारामन ने मंगलवार को आईआईटी बीएचयू का दौरा किया। संस्थान के सभी विभागों और प्रयोगशालाओं में चल रहे रिसर्च और मशीनों को देखा। 

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प्रो. गोपाल त्रिपाठी सभागार में एक संवाद कार्यक्रम में भी भाग लेने पहुंचे, जहां पर प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों ने अपने शोध को प्रस्तुत किया। यहां पर निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि एएनआरएफ के साथ आगामी सहयोग से हम प्रभावी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देंगे, जो समाज की प्रगति और तकनीकी आत्मनिर्भरता में बढ़ावा देगा। उन्होंने एएनआरएफ के साथ संभावित सहयोग पर चर्चा की। एक दीर्घकालीन सहयोगी नेटवर्क स्थापित करने पर सहमति बनी।
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भारत में बन रहा रिसर्च-इनोवेशन इको सिस्टम
डॉ. कल्याणारामन ने कहा कि भारत में रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार करने के लिए एएनआरएफ बनाया गया है। ये रिसर्च को फंड की व्यवस्था कराता है। अंतरविषयक सहयोग को प्रोत्साहित कर, उच्च स्तरीय अनुसंधान को जमीन पर उतारने में मदद करता है। उद्योग और सरकार के बीच मजबूत पुल बनाकर यह तय किया जाता है कि भारतीय विज्ञान और नवाचार का वैश्विक स्तर पर प्रभाव हो। युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर उनके प्रोजेक्ट्स को समर्थन दिया जाता है। जिससें राष्ट्रीय महत्व की चुनौतियों के लिए टिकाऊ और व्यावहारिक समाधान विकसित हो।

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ताइवान से बीएचयू पहुंचे नौ शिक्षाविद, साझा अध्ययन-शोध के लिए होगा समझौता

बीएचयू और ताइवान के शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझा अध्ययन और शोध के लिए समझौता किया जाएगा। पालि भाषा से लेकर बौद्ध व जैन धर्म को लेकर बीएचयू और ताइवान के प्रोफेसर और शोधकर्ता जल्द ही एक साथ एक मंच पर काम करेंगे। इसके लिए मंगलवार को बीएचयू के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में मंगलवार को ताइवान से नौ सदस्यीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल पहुंचा।

विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने ताइवान के शिक्षाविद प्रो. मास्टर होंग सोंग, उ पेई चेन, वांग पन, ई छन, सिन मिन, वेई जिंग, क्वांग, चेई सिन का स्वागत किया। यहां पर जैन और बौद्ध धर्म पर व्याख्यान में 50 से ज्यादा छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विद्यार्थियों और अध्यापकों से संवाद कर पालि भाषा और साहित्य, ध्यान, बौद्ध अध्ययन, भारतीय संस्कृति, अकादमिक सहयोग और भावी शैक्षणिक गतिविधियों पर एक साथ काम करने पर सहमति बनाई। इस दौरान बीएचयू के पालि विभाग और ताइवान के शैक्षणिक संस्थानों के बीच एमओयू (समझौता ज्ञापन) किए जाने पर चर्चा हुई। डॉ. बुद्ध घोष ने कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शैलेंद्र सिंह ने किया।

विद्यापीठ में तीन दिन बीए में होगी काउंसिलिंग
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सत्र 2025-26 में यूजी पाठ्यक्रमों में मंगलवार को कुल 175 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराकर प्रवेश लिया। इसके साथ ही बीकॉम में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो गई और अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय में बीए, बीएफए, बीएससी, बीकॉम समेत 13 कोर्स में दाखिले के लिए 18 अगस्त से प्रक्रिया शुरू हुई है। प्रवेश सेल के समन्वयक प्रो. बंशीधर पांडेय ने बताया कि 20 अगस्त को बीलिबआईएससी, एमलिबआईएससी की काउंसिलिंग की जाएगी। प्रवेश सेल के सदस्य प्रो. नलिनी श्याम कामिल ने बताया कि ई-मेल में दिए गए लिंक पर जाकर अभ्यर्थी गेट पास डाउनलोड कर सकते हैं। बिना गेट पास के काउंसिलिंग सेंटर में अभ्यर्थियों का प्रवेश प्रतिबंधित होगा। 
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