फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Another death in trauma centre who injured in bhadohi school van fire

भदोही वैन हादसे में झुलसे दो और बच्चों की मौत, अब तक तीन की गई जान

Sat, 19 Jan 2019 12:05 PM IST
shashikant misra न्यूज डेस्क,अमर उजाला,भदोही/वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,भदोही/वाराणसी Published by: shashikant misra Updated Sat, 19 Jan 2019 12:05 PM IST
विज्ञापन
Another death in trauma centre who injured in bhadohi school van fire
रानी और आयुष - फोटो : file photo
भदोही में 12 जनवरी को स्कूल वैन में आग लगने की घटना में झुलसे दो और बच्चों की शुक्रवार को मौत हो गई। घटना के एक सप्ताह बाद लगातार दो दिन में तीन बच्चों की मौत होने से परिजन इलाज में लापरवाही की आशंका जता रहे हैं। अभी छह बच्चे आईसीयू में भर्ती हैं।
विज्ञापन


परिजनों का कहना है कि भर्ती बच्चों को देखने तक नहीं दिया जा रहा। वह किस हाल में हैं। उनका इलाज कैसे हो रहा है। शुक्रवार सुबह आईसीयू में भर्ती आयुष (7) की मौत हो गई। भदोही के भगवास निवासी सुरेंद्र यादव के बेटे आयुष को पहले ही दिन आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन


शाम को आयुष के परिजन अभी दाह संस्कार कर ट्रामा सेंटर लौटे ही थे कि आईसीयू में भर्ती एक और बच्ची रानी (5) की मौत की खबर मिली। गुरुवार को भी आईसीयू में भर्ती दिशा यादव (6) की मौत हो गई थी। दो दिन में एक के बाद एक आईसीयू में भर्ती तीन बच्चों की मौत के बाद से बच्चों के परिजन जैसे सदमे में आ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


आयुष की बहन माही (7) भी गंभीर रूप से झुलसी है और आईसीयू में भर्ती है। 12 जनवरी की दोपहर में 19 बच्चों को भदोही से बीएचयू ट्रामा सेंटर लाया गया था। इनमें गंभीर रूप से झुलसे नौ बच्चों को आईसीयू में भर्ती किया गया था, बाकी का इलाज जनरल सर्जरी वार्ड में चल रहा है। 

पोस्टमार्टम के लिए भी तीन घंटे इंतजार कराया  

एक ओर बच्चे की मौत से परिजन दुखी है, वहीं बीएचयू में व्यवस्थागत लापरवाही से उनकी दिक्कतें और बढ़ गई हैं। आयुष की मौत के बाद परिजन दो घंटे तक पोस्टमार्टम के लिए इंतजार कराया गया। इस दौरान शव नीचे ही रखा रहा। आयुष की मौत सुबह 6:25 बजे हो गई।

ट्रामा सेंटर में औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिजन दोपहर 12 बजे ही उसका शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे लेकिन यहां तीन घंटे तक बाहर ही इंतजार करना पड़ा। इस बीच कई बार आयुष के चाचा सत्य प्रकाश ने अंदर बात करने की कोशिश की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

लिहाजा बाहर ही शव रखकर अंदर बुलाने का इंतजार करते रहे। शाम करीब तीन बजे पोस्टमार्टम शुरू हुआ, इसके बाद परिजन शव लेकर अंतिम संस्कार करने गए। इलाज के दौरान दो दिन में तीन बच्चों की मौत पर ट्रामा सेंटर प्रशासन कुछ भी बताने से बच रहा है।

परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार चालीस फीसदी से ज्यादा बर्न होने पर बच्चों के लिए खतरा अधिक रहता है। आग में झुलसने के बाद शरीर के कई अंग ठीक से काम नहीं कर पाते। धुआं फेफड़ों में चला जाता है।

स्कूल वैन हादसे में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा

स्कूल वैन हादसे में मासूम बच्चों की मौत के बाद प्रबंधक, चालक, वाहन मालिक और प्रधानाचार्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सभी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में शुक्रवार को पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धाराएं बढ़ा दी। प्रकरण में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है जबकि दो अब भी फरार हैं।

12 जनवरी को एससी कान्वेंट स्कूल के वाहन में आग लगने से 19 मासूम बच्चे झुलस गए थे। जिला अस्पताल के बाद सभी बच्चों को बीएचयू रेफर किया गया था। घटना के बाद एआरटीओ, बीएसए की तहरीर पर पुलिस ने प्रबंधक सुशील कुमार दूबे, वाहन मालिक अशोक कुमार दूबे और चालक मनोज यादव के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

बीएचयू के ट्रामा सेंटर के आईसीयू में भर्ती छात्रा दिशा के बाद आयुष और रानी की मौत हो गई। बृहस्पतिवार को दिशा की मौत के बाद ही पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धाराओं को बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी थी। शुक्रवार को चारों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 और 308 को बढ़ा दी गईं।

आरोपी चालक मनोज कुमार यादव को और प्रबंधक सुशील कुमार दूबे को गिरफ्तार कर लिया गया है। वाहन मालिक अब भी फरार है। सीओ ज्ञानपुर यादवेंद्र कुमार ने कहा कि स्कूल वैन हादसे में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। बचे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।  

ताबड़तोड़ कार्रवाई से सहमे अमान्य स्कूल संचालक 

लखनो वैन हादसे के बाद प्रशासन और विभाग की ओर से युद्ध स्तर पर कार्रवाई करते हुए 100 अमान्य स्कूलों को सील किए गए। हालांकि अब भी चौरी, सुरियावां, औराई और डीघ के सीमावर्ती इलाकों में कुछ अमान्य स्कूल अब भी संचालित हो रहे हैं। ताबड़तोड़ हुई कार्रवाई से मान्यता प्राप्त विद्यालय के संचालक भी सहम गए हैं।

जिले में 1143 परिषदीय विद्यालयों के अलावा पांच सौ से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। शिक्षा विभाग की जानकारी के अनुसार जिले में 180 से अधिक अमान्य विद्यालय संचालित हो रहे थे। पूर्व के वर्षो में नोटिस भेजकर विभाग शांत हो जाता था, लेकिन लखनों में हुई घटना के बाद जिले के सभी छह ब्लॉकों में युद्ध स्तर पर कार्रवाई कर 100 अमान्य स्कूलों को सील किया गया।

एसडीएम समेत पुलिस बल के साथ की गई कार्रवाई के बाद अमान्य स्कूलों के संचालक इन्हें खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वृहद स्तर पर अभियान चलने से पांचवीं की मान्यता लेकर आठवीं तक स्कूल चलाने वाले प्रबंधक भी सहमे-सहमे से नजर आ रहे हैं। अमान्य स्कूलों में न तो बच्चों के लिए पठन-पाठन की बेहतर सुविधाएं होती है और न वाहन ही ठीक ठाक होते हैं।

चौरी, डीघ, औराई और सुरियावां ब्लॉक के सीमावर्ती क्षेत्रों में अब भी कुछ अमान्य स्कूल संचालित हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि 35 स्कूलों को सत्र में मान्यता मिली है जबकि 25 की फाइल लंबित है। 100 स्कूलों पर कार्रवाई की जा चुकी है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जो स्कूल मानक पूर्ण नहीं कर रहे उन पर कार्रवाई करें।

लखनो स्कूल हादसे में दो बच्चों की मौत के बाद भी मान्यता प्राप्त एवं कान्वेंट स्कूलों के प्रबंधक संवेदनहीन बने हुए हैं। बच्चों के गम में किसी प्रबंधक ने अब तक स्कूल में अवकाश करने की जहमत नहीं उठाई। एक स्कूल प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पैसे कमाने के पीछे सब संवेदनहीन हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह बच्चों की याद में दो दिनों तक स्कूल में अवकाश कर दिया है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed