अपार्टमेंट में आग मामला: बिल्डर आरसी जैन और प्रभात ढंढानिया पर मुकदमा दर्ज, मंजर को याद कर सिहर उठ रहे लोग
अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर अपार्टमेंट में गुरुवार रात लगी आग मामले में पीड़ित फ्लैट मालिक राकेश कुमार गुप्ता की तहरीर पर बिल्डर आरसी जैन और प्रभात ढंढानिया के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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वाराणसी के सिगरा क्षेत्र स्थित अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर अपार्टमेंट में गुरुवार रात लगी आग मामले में प्रशासनिक जांच जारी है। वहीं इस हादसे के लिए पीड़ित फ्लैट मालिक राकेश कुमार गुप्ता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने तफ्तीश शुरू की। पीड़ित के अनुसार 11वीं मंजिल की बिल्डिंग में आग और सुरक्षा से बचाव के इंतजाम होते तो करोड़ों रुपये की क्षति नहीं होती।
हादसे के समय 20 से अधिक लोगों की सांसें अटकी हुई थी। सिगरा इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय के अनुसार पीड़ित फ्लैट मालिक राकेश गुप्ता की तहरीर पर बिल्डर आरसी जैन और प्रभात ढंढानिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की गई है।
जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम भी घटना की तफ्तीश कर रही है। वहीं अपार्टमेंट के लोगों संग बैठक करते हुए उनकी परेशानियों और समस्याओं को सुना गया। हर संभव मदद और न्याय का भरोसा दिलाया गया। पीड़ितों के अनुसार बिल्डिंग में जल्द से जल्द सुरक्षा उपाय होने चाहिए। अपार्टमेंट के अन्य टॉवर में भी आग से बचाव के इंतजाम की मांग की गई।
फायर अलार्म सही होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती
बिल्डिंग के लोगों के अनुसार अगर फायर अलार्म सही होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। वहीं कई बार बिल्डिंग के लोगों ने मालिक को अग्निशमन यंत्र ठीक कराने के लिए कहा था लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अपार्टमेंट के बी ब्लॉक के 11वीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 401 में आग लगी थी। आग की भयावहता को याद कर फ्लैट में रहने वाले लोग सिहर उठते हैं।
बिल्डिंग के बी-ब्लॉक की लिफ्ट अभी 10 से 15 दिन तक काम नहीं करेगी। ब्लॉक की बिजली भी गुल है। ऐसे में लोगों को रहने की बड़ी समस्या है। अपार्टमेंट के कुछ लोगों ने आसपास इलाकों के होटलों और गेस्ट हाउस में कमरा लिया है। ब्लाक के भूतल और दूसरी मंजिल के लोगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर लोग अपने परिचितों और होटलों में ठौर लिया है।
परिसर में अब भी चार से पांच परिवार खुले आसमान के नीचे हैं। फ्लैट नंबर 401 में रहने वाले राकेश व उनकी पत्नी मीना जब भी अपने फ्लैट की ओर देखती हैं, तो उनकी आखों से आंसू आ जाते हैं। मीना का बड़ा बेटा आयुष आईआईटी की तैयारी करने के लिए बोर्ड परीक्षाओं के बाद इंदौर जाने वाला था। कुछ दिनों बाद उसकी दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू होने वाली है। लेकिन उसकी सारी किताबें जलकर खाक हो चुकी है।
तीसरे दिन भी जांच में जुटी रही टीमें
अब तक जांच में यह तो तय हो गया कि बिल्डिंग में आग सुरक्षा उपाय से जुड़े संसाधन नहीं थे। पाइप छोटी थी तो वहीं प्रशिक्षित पंप आपरेटर भी नहीं थे। छत के दरवाजे पर ताला जड़ा हुआ था। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर आने में कई दिक्कतें हुईं। जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम में वीडीए, अग्निशमन विभाग, जिला और पुलिस की संयुक्त टीमें जांच कर रही है।