Anant Chaturdashi: कब है अनंत चतुर्दशी? नोट कर लें सही तिथि और पूजन विधि, 14 साल तक बरसेगी प्रभु की कृपा
Anant Chaturdashi: क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर शयन करने वाले भगवान श्री विष्णु की पूजा एवं व्रत पर्व अनंत चतुर्दशी उदया व्यापिनी होने के कारण 28 सितंबर को मनाया जाएगा। व्रत को करने और भगवान विष्णु का पूजन करने से मन की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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अनंत की कथा सुनने, अनंत धारण करने से अनंत दुख और दरिद्रता को दूर करता है। उदया व्यापिनी होने के कारण 28 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का व्रत पूजन होगा। अनंत के दिन मीठा पकवान भगवान विष्णु को अर्पित कर प्रसाद स्वरूप परिजनों संग ग्रहण करना फलदायी होता है।ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि चतुर्दशी तिथि 27 सितंबर को रात्रि 10:19 पर लगेगी और 28 सितंबर को शाम 6:50 बजे तक रहेगी।
उदयव्यापिनी तिथि का महत्व होने के कारण अनंत का व्रत 28 सितंबर को होगा। व्रत को करने और भगवान विष्णु का पूजन करने से मन की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अनंत कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसलिए यह व्रत अनंत व्रत कहलाता है। पुरुष धन-धान्य, पुत्रादि और महिलाएं सौभाग्य की रक्षा व ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के व्रत से व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान विष्णु के आशीर्वाद से जीवन में सुख समृद्धि का सुयोग बना रहता है। अनंत के व्रत को 14 साल तक नियमपूर्वक करने पर जीवन के समस्त दोषों का शमन होता है तथा सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।
अनंत चतुर्दशी का संबंध महाभारतकाल से
कथा अनुसार कौरवों से जुआ हारने के बाद पांडव वन-वन भटक रहे थे तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा हे धर्मराज! जुआ खेलने के कारण देवी लक्ष्मी आप से रुष्ट हो गई हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए आपको अपने भाइयों के साथ अनंत चतुर्दशी का व्रत रखना चाहिए। श्रीकृष्ण के कहने पर सर्वप्रथम पांडवों ने अनंत का व्रत किया, जिससे खोया हुआ राज्य और लक्ष्मी को पुन: प्राप्त किया।
पूजन विधि
प्रात: काल स्नानादि उपरांत भगवान विष्णु का ध्यान कर संकल्प लेना चाहिए। चौकी पर मंडप बनाकर भगवान विष्णु के समक्ष 14 गांठ युक्त अनंत सूत्र जो रेशम या कॉटन का पूजन करना चाहिए। कथा श्रवण करने के उपरांत भगवान विष्णु से मंत्र अनंत संसार महासुमद्रे मग्न समभ्युद्धर वासुदेव। अनंत रूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।। से प्रार्थना करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि अनंत सूत्र कच्चे धागे को गांठ लगाकर बनाया जाता है। तत्पश्चात उसे हल्दी से रंगकर विधि-विधान पूर्वक, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि से पूजा की जाती है। इस सूत्र को अनंत सूत्र कहते हैं। इस सूत्र को पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ की भुजा में धारण करती हैं। व्रतकर्ता को व्रत वाले दिन, दिन में शयन नहीं करना चाहिए। अनंत सूत्र को 14 दिन तक धारण करने के पश्चात 15वें दिन गंगाजी, नदी, सरोवर अथवा स्वच्छ जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। व्रत के दिन नमक ग्रहण नहीं किया जाता है।