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UP: आनंदीबेन बोलीं- उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, शोध, नवाचार बढ़ाना होगा; शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में सुधार हो
Thu, 07 May 2026 06:33 AM IST
Aman Vishwakarma
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Aman Vishwakarma
Updated Thu, 07 May 2026 06:33 AM IST
सार
Varanasi News: बैठक में पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं की स्थिति, स्वीकृत पदों के सापेक्ष भरे एवं रिक्त पद, कार्यशालाएं, सेमिनार, शोध कार्य, पेटेंट, प्रकाशन, संयुक्त शोध एवं संयुक्त प्रकाशनों से संबंधित विषयों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और उससे संबद्ध शासकीय और वित्तोषित महाविद्यालयों में पठन-पाठन, सुविधाओं की बुधवार को कुलाधिपति/राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समीक्षा की। लखनऊ स्थित जनभवन(पहले राजभवन) में हुई समीक्षा में कुलाधिपति ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, शोध, नवाचार बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थी अनुपात में भी सुधार जरूरी है। इस पर गंभीरता से काम करना होगा। इसके अलावा शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में सुधार करना जरूरी है।
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जनभवन में हुई बैठक में काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी, संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्राचार्यों, विवि के अधिकारियों के साथ प्रेजेंटेशन भी दिया गया। साथ ही महाविद्यालयों की ओर से भी अपनी प्रगति रिपोर्ट दी गई। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को नालंदा विविय, बिहार का भ्रमण कराने को कहा।
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उन्होंने गुजरात भ्रमण पर कराने की बात भी कुलपति से कही। जहां वे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, सोमनाथ मंदिर जैसे प्रेरणादायक स्थलों का दर्शन कर सकें। बैठक में राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, डॉ. पंकज एलजानी, उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव बद्री नाथ सिंह, निदेशक उच्च शिक्षा बीएल शर्मा मौजूद रहे।
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इन बिंदुओं पर हुई चर्चा और समीक्षा
राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की कम संख्या, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, महाविद्यालयों को उत्कृष्टता की दिशा में आगे ले जाने में विश्वविद्यालय की भूमिका, पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता, भविष्य की शैक्षणिक योजनाएं तथा विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की कम संख्या, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, महाविद्यालयों को उत्कृष्टता की दिशा में आगे ले जाने में विश्वविद्यालय की भूमिका, पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता, भविष्य की शैक्षणिक योजनाएं तथा विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्यपाल ने दिए सुझाव
- महाविद्यालयों में नैक एवं एनआईआरएफ की तैयारी में जो भी कमियां हैं, उनकी विस्तृत सूची विवि स्तर पर तैयार की जाए।
- विवि में अच्छी शैक्षणिक प्रवृत्तियां हों, वहां महाविद्यालयों को आमंत्रित किया जाए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले विवि से सीख ली जाए।
- विद्यार्थियों को अग्निवीर जैसी प्रशिक्षण योजनाओं की जानकारी देने की जरूरत है। कौशल सीखने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।
- एल्यूमनाई फंड और विद्यार्थियों से संबंधित अन्य निधियों का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ केवल विद्यार्थियों के हित में किया जाए।
- हर विभाग में हर साल बैठक कर वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे परिवर्तनों की समीक्षा की जाए।
- महाविद्यालय गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार कर राज्य एवं केंद्र सरकार को भेजें। इससे विद्यार्थियों के लिए अधिकाधिक फंड मिल पाएगा।
- महाविद्यालय कम से कम दो गांव को गोद लें। विजेताओं को दीक्षांत समारोह में सम्मानित करें। इससे नामांकन भी बढ़ेगा।
- महाविद्यालय को उत्कृष्ट बनाने में योगदान देने वाले शिक्षकों को भी दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया जाना चाहिए।
- विद्यार्थियों को हर दिन पुस्तकालय में कम से कम एक घंटे तक बैठना चाहिए।
- शिक्षकों को व्याख्यान के दौरान पाठ्यक्रम के अतिरिक्त पांच मिनट निकालकर विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान भी देना चाहिए।
- पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपनी माता के नाम पर पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।