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वर्षों पुरानी परंपरा: आज वाराणसी में धधकती चिताओं के बीच सजेगी नगरवधुओं की महफिल, भव्य होगा आयोजन
Fri, 08 Apr 2022 12:49 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 12:49 PM IST
सार
नवरात्र की सप्तमी तिथि पर आज महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर नगरवधुओं का नृत्य होगा। बाबा मसाननाथ के सामने गणिकाएं मुक्ति की कामना के लिए अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। यह वर्षों पुरानी परंपरा है।
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मणिकर्णिका घाट पर नृत्य प्रस्तुत करतीं नगरवधुएं।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर आज रात वाराणसी में धधकती चिताओं के बीच गणिकाओं का नृत्य होगा। बाबा मसाननाथ के सामने गणिकाएं मुक्ति की कामना के लिए अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले साल बाबा मसाननाथ के इस उत्सव से आम श्रद्धालुओं को दूर रहने की अपील की गई थी, लेकिन इस बार आयोजन भव्य स्वरूप में होगा।
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बाबा मसान नाथ के तीन दिवसीय शृंगार महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को भव्य शृंगार हुआ। देर शाम को बाबा मसान नाथ का शिव व शक्ति के स्वरूप में शृंगार किया गया। इस दौरान आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने बाबा का प्रसाद ग्रहण किया।
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बृहस्पतिवार को दूसरी निशा के पूर्व बाबा की मध्याह्न भोग आरती उतारी गई। इसमें बाबा को बाबा को पक्का भोजन, मीठे का भोग लगाकर चैनू प्रसाद गुप्ता ने भंडारे की शुरुआत की। शाम को बाबा का शिव शक्ति स्वरूप में शृंगार किया गया। आरती मंदिर के पुजारी लल्लू महाराज ने उतारी। इसके बाद भोजपुरी लोकगीत का आयोजन किया गया।
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राजा मानसिंह ने शुरू कराई थी परंपरा
साढ़े तीन सौ साल से ज्यादा की परंपरा के तहत शुक्रवार रात नगर वधुएं बाबा मशाननाथ के दरबार में नृत्य की भावांजलि प्रस्तुत करेंगी। रात में शुरू हुआ यह आयोजन मंगला आरती तक चलेगा।
मान्यता है कि अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने प्राचीन नगरी काशी में भगवान शिव के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इस मौके पर राजा मानसिंह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कराना चाह रहे थे, लेकिन कोई भी कलाकार इस श्मशान में आने और अपनी कला के प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं हुआ।
इसकी जानकारी काशी की नगरवधुओं को हुई तो वे स्वयं ही श्मशान घाट पर होने वाले इस उत्सव में नृत्य करने को तैयार हो गईं। इस दिन से धीरे-धीरे यह उत्सवधर्मी काशी की ही एक परंपरा का हिस्सा बन गई। तब से आज तक चैत्र नवरात्रि की सातवीं निशा में हर साल यहां श्मशानघाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
मान्यता है कि अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने प्राचीन नगरी काशी में भगवान शिव के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इस मौके पर राजा मानसिंह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कराना चाह रहे थे, लेकिन कोई भी कलाकार इस श्मशान में आने और अपनी कला के प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं हुआ।
इसकी जानकारी काशी की नगरवधुओं को हुई तो वे स्वयं ही श्मशान घाट पर होने वाले इस उत्सव में नृत्य करने को तैयार हो गईं। इस दिन से धीरे-धीरे यह उत्सवधर्मी काशी की ही एक परंपरा का हिस्सा बन गई। तब से आज तक चैत्र नवरात्रि की सातवीं निशा में हर साल यहां श्मशानघाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।