फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Amar Ujala Dialogue Trinetra Centre used not just issuing challans but also resolving traffic jams

अमर उजाला संवाद: त्रिनेत्र सेंटर चालान के लिए ही नहीं, जाम के समाधान के लिए भी हो उपयोग; विचार-विमर्श

Sun, 19 Jul 2026 03:02 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 19 Jul 2026 03:02 PM IST
सार

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों और कांवड़िया समितियों के प्रतिनिधियों ने पार्किंग और जाम की समस्या उठाई। वक्ताओं ने कहा कि त्रिनेत्र सेंटर का उपयोग केवल चालान काटने तक सीमित न रहे, बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन और जाम के त्वरित समाधान के लिए भी प्रभावी ढंग से किया जाए।

विज्ञापन
Amar Ujala Dialogue Trinetra Centre used not just issuing challans but also resolving traffic jams
अमर उजाला संवाद में शामिल लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

सावन शुरू होने में अब केवल 10 दिन शेष हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और कांवड़िये श्री काशी विश्वनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए वाराणसी आते हैं। ऐसे में सावन की तैयारियों को लेकर अमर उजाला की ओर से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शहर के व्यापारी, कांवड़िया समितियों के प्रतिनिधि, ट्रैफिक पुलिस और बिजली निगम के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। संवाद में त्रिनेत्र सेंटर को लेकर चर्चा हुई। इसे केवल चालान के लिए जाम और समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयोग में लाना चाहिए।

विज्ञापन




व्यापारी प्रीतम गुप्ता ने कहा, शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम है। इसके अलावा अनधिकृत टोटो भी जाम का प्रमुख कारण हैं। सड़क किनारे लगने वाले ठेले-खोमचे भी यातायात बाधित करते हैं। प्रतीक गुप्ता ने कहा, अधिकारी हर बार व्यापारियों को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। पहले चौराहों से 50 मीटर तक वाहन खड़ा न करने का नियम था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। 

विज्ञापन

मनोज कपूर ने कहा, छुट्टा पशु भी शहर में जाम का बड़ा कारण हैं। इसके अलावा अधिकांश क्षेत्रों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। शशांक साहू ने कहा कि शहर के बीच स्थित टाउनहॉल की पार्किंग सुबह ही भर जाती है। इसके बाद बाहर से आने वाले वाहन सड़क किनारे खड़े होते हैं, जिससे जाम लगता है।

पंकज अग्रवाल ने कहा, सबसे पहले शहर में यू-टर्न वाले स्थान चिह्नित किए जाने चाहिए। अशोक जायसवाल ने कहा, शहर में यातायात व्यवस्था सुगम नहीं है। रोपवे निर्माण के कारण कांवड़ियों को दिक्कत होगी। रजनीश कन्नौजिया ने कहा, शनिवार और रविवार को शहर में अत्यधिक भीड़ होती है, लेकिन लोगों को पार्किंग स्थलों की जानकारी नहीं मिल पाती। इसके लिए प्रमुख स्थानों पर साइनेज बोर्ड लगाए जाने चाहिए। 

सावन में जाम की समस्या से बचने के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। सभी प्रमुख सड़कों और चौराहों के ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी भी साझा की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों पर ऐसे मैप लगाए जाएंगे, जिनमें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाने और लौटने का मार्ग दर्शाया जाएगा। त्रिनेत्र सेंटर को लेकर उठे सवाल पर उन्होंने कहा कि इसी केंद्र से पुलिस को सूचनाएं मिलती हैं। इसकी निगरानी पुलिस आयुक्त करते हैं। - अंशुमान मिश्रा, डीसीपी ट्रैफिक

जितने भी बिजली के खंभे हैं, उन पर प्लास्टिक कोटिंग की जा रही है। इस पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का नाम भी अंकित किया जा रहा है, जिससे यह देखने में बेहतर लगेगा और लोगों की सुरक्षा भी होगी। हमारी टीमें टेस्ट किट के साथ लगातार सड़कों पर पेट्रोलिंग कर रही हैं। श्री काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र के सभी बिजली के तार भूमिगत किए जा चुके हैं। मंदिर और प्रमुख कांवड़िया शिविर क्षेत्रों के बिजलीघरों से 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। - नीरज बिंद, उपखंड अधिकारी, लोहता 

 

सावन शहर का सबसे बड़ा मेला होता है। अभी तीन दिन के रथयात्रा मेले में ही जाम की स्थिति बनी हुई है, जबकि सावन पूरे महीने चलेगा। इसलिए बेहतर प्रबंध जरूरी हैं। त्रिनेत्र सेंटर का उपयोग केवल चालान के लिए नहीं, बल्कि यातायात प्रबंधन के लिए भी होना चाहिए। रोपवे के नीचे की सड़कें ठीक कराई जाएं। खराब सड़क से डाक बम कांवड़ियों को परेशानी होगी। रैन बसेरों और पेयजल की भी पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए। - श्रीनारायण खेमका, व्यापारी

विज्ञापन

शिविर के लिए स्थान मिले तो न लगे जाम
कांवड़िया समिति के उमेश चंद्र ने कहा, महमूरगंज फ्लाईओवर से उतरते ही शिविर लगता है, जिससे जाम बढ़ता है। प्रशासन यदि शिविर के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध करा दे तो काफी सुविधा होगी। प्रमोद मौर्य ने कहाकि सड़कें खराब हैं और उन पर गिट्टियां बिखरी रहती हैं। कांवड़ियों के मार्ग पर भारी वाहनों से गिट्टियां फैल जाती हैं, जिससे नंगे पैर चलने वाले कांवड़ियों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं और चोट लगती है। संबंधित विभागों को इस पर ध्यान देना चाहिए। प्रेमचंद ने कहा कि कांवड़ियों को सबसे अधिक परेशानी धूप में होती है, विशेषकर फ्लाईओवर पर नंगे पैर चलने के दौरान।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed