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रेड जोन में बनारस, एयर क्वालिटी इंडेक्स 325
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वाराणसी। शासन-प्रशासन की कवायद के बाद भी हवा में सुधार नहीं हो रहा है। शहर की हवा अब रेड जोन में पहुंच चुकी है। बुधवार को प्रदेश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में बनारस 13वें नंबर पर रहा। जबकि सर्वाधिक प्रदूषित शहर बुलंदशहर को माना गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार रात 8 बजे बनारस में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया और एयर क्वालिटी इंडेक्स 325 रहा। पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 364 और न्यूतनम मात्रा 284 रही। वहीं, पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 375 और न्यूनतम मात्रा 166 रही। हवा में नाइट्रोजन की अधिकतम मात्रा 143 और न्यूनतम मात्रा 72 दर्ज की गई। ओजोन की मात्रा भी 245 रही। पिछले शुक्रवार 28 नवंबर को बनारस प्रदेश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर था और एयर क्वालिटी इंडेक्स 355 तक पहुंच गया था। दूसरे दिन भी बनारस रेड जोन में बना रहा। देव दीपावली के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स 271 और एक दिसंबर को 261 पहुंचा था।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि खुदाई बंद होने और लगातार पानी के छिड़काव के कारण वायु गुणवत्ता सुधरी थी, लेकिन फिर से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
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मानक
मानक के मुताबिक, 50 से 100 के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स है बेहतर।
कार्रवाई के बाद भी सुधार नहीं
खराब हवा को सुधारने के लिए प्रशासन ने सख्ती शुरू की। शासन के निर्देश पर 17 से ज्यादा विभागों और संस्थानों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति का नोटिस भेजा। चार एसटीपी, पांच अस्पताल, बीएचयू कैंपस, रामनगर में दो उद्योग और कार्यदायी संस्थानों में निर्माण निगम, नगर निगम, अंडरग्राउंड बिजली का काम करने वाली संस्था पर कार्रवाई हुई। प्रदूषण फैलाने में 1500 से अधिक वाहनों का चालान भी किया जा चुका है। लेकिन हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है।
धूल और धुआं खराब कर रहे हवा
बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार, बनारस में वायु प्रदूषण के दो प्रमुख कारणों में धूल और धुआं शामिल हैं। निर्माण स्थलों पर मानकों का पालन न होना, सड़कों से उठने वाली धूल और जाम के कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा को खराब करते हैं। ठंड बढ़ने के कारण प्रदूषक तत्व वायुमंडल में घुल नहीं पा रहे हैं और हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है।
शहर एक्यूआई
बुलंदशहर 471
गाजियाबाद 418
कानपुर 416
ग्रेटर नोएडा 408
नोएडा 390
मुजफ्फरनगर 382
लखनऊ 378
मेरठ 365
बागपत 361
फतेहाबाद 352
आगरा 341
फरीदाबाद 329
वाराणसी 325
मुरादाबाद 325
गुरुग्राम 324
वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉॅ. अजय ने बताया कि ठंड में सांस रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। उन्होंने बचाव के ये उपाय सुझाए हैं।
ये न करें
पटाखे, लकड़ी, सूखी पत्तियों, कूड़ा और कृषि उत्पादों को न जलाएं।
बाहर होने वाले खेल, शारीरिक व्यायाम आदि गतिविधियों से परहेज करें।
सुबह और देर शाम दरवाजे, खिड़कियां मत खोलें। दिन में 12 से 4 बजे के बीच अवश्य खोलें।
ये करें
घर से निकलते समय उचित गुणवत्ता का मास्क पहनें।
अधिकतर समय घर में रहें।
सांस, फेफड़े और हृदय रोगी सदैव अपने साथ दवा रखें।
शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए लगातार पानी पीते रहें।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार रात 8 बजे बनारस में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया और एयर क्वालिटी इंडेक्स 325 रहा। पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 364 और न्यूतनम मात्रा 284 रही। वहीं, पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 375 और न्यूनतम मात्रा 166 रही। हवा में नाइट्रोजन की अधिकतम मात्रा 143 और न्यूनतम मात्रा 72 दर्ज की गई। ओजोन की मात्रा भी 245 रही। पिछले शुक्रवार 28 नवंबर को बनारस प्रदेश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर था और एयर क्वालिटी इंडेक्स 355 तक पहुंच गया था। दूसरे दिन भी बनारस रेड जोन में बना रहा। देव दीपावली के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स 271 और एक दिसंबर को 261 पहुंचा था।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि खुदाई बंद होने और लगातार पानी के छिड़काव के कारण वायु गुणवत्ता सुधरी थी, लेकिन फिर से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
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मानक
मानक के मुताबिक, 50 से 100 के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स है बेहतर।
कार्रवाई के बाद भी सुधार नहीं
खराब हवा को सुधारने के लिए प्रशासन ने सख्ती शुरू की। शासन के निर्देश पर 17 से ज्यादा विभागों और संस्थानों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति का नोटिस भेजा। चार एसटीपी, पांच अस्पताल, बीएचयू कैंपस, रामनगर में दो उद्योग और कार्यदायी संस्थानों में निर्माण निगम, नगर निगम, अंडरग्राउंड बिजली का काम करने वाली संस्था पर कार्रवाई हुई। प्रदूषण फैलाने में 1500 से अधिक वाहनों का चालान भी किया जा चुका है। लेकिन हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है।
धूल और धुआं खराब कर रहे हवा
बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार, बनारस में वायु प्रदूषण के दो प्रमुख कारणों में धूल और धुआं शामिल हैं। निर्माण स्थलों पर मानकों का पालन न होना, सड़कों से उठने वाली धूल और जाम के कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा को खराब करते हैं। ठंड बढ़ने के कारण प्रदूषक तत्व वायुमंडल में घुल नहीं पा रहे हैं और हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है।
शहर एक्यूआई
बुलंदशहर 471
गाजियाबाद 418
कानपुर 416
ग्रेटर नोएडा 408
नोएडा 390
मुजफ्फरनगर 382
लखनऊ 378
मेरठ 365
बागपत 361
फतेहाबाद 352
आगरा 341
फरीदाबाद 329
वाराणसी 325
मुरादाबाद 325
गुरुग्राम 324
वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉॅ. अजय ने बताया कि ठंड में सांस रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। उन्होंने बचाव के ये उपाय सुझाए हैं।
ये न करें
पटाखे, लकड़ी, सूखी पत्तियों, कूड़ा और कृषि उत्पादों को न जलाएं।
बाहर होने वाले खेल, शारीरिक व्यायाम आदि गतिविधियों से परहेज करें।
सुबह और देर शाम दरवाजे, खिड़कियां मत खोलें। दिन में 12 से 4 बजे के बीच अवश्य खोलें।
ये करें
घर से निकलते समय उचित गुणवत्ता का मास्क पहनें।
अधिकतर समय घर में रहें।
सांस, फेफड़े और हृदय रोगी सदैव अपने साथ दवा रखें।
शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए लगातार पानी पीते रहें।