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रोक के बाद भी धधक रहीं भट्ठियां
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 24 Jan 2017 01:50 AM IST
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कोयला
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रामीण इलाकों के होटलों-ढाबों और रेस्टोरेंटों में कोयले और केरोसिन तेल के इस्तेमाल पर रोक लगाई है लेकिन जिले में खुलेआम इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हाईवे और उसके आसपास के हिस्सों में संचालित अधिकतर होटल-ढाबों पर केरोसिन और कोयले की भट्ठियां रोजाना धधकती हैं। एनजीटी की रोक का पालन कराने के लिए शासन के अपर मुख्य सचिव ने पत्र भी भेजा है मगर प्रशासनिक अधिकारी इससे बेखबर हैं।
एनजीटी के निर्देश के तहत अपर मुख्य सचिव चंचल कुमार तिवारी ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र भेजकर इसका अनुपालन कराने को कहा है लेकिन यहां हालात दूसरे हैं। कछवा रोड इलाके में नेशनल हाईवे के किनारे लगभग एक दर्जन ढाबों पर कोयले की भट्टी पर ही भोजन बनाया जा रहा है। बीहड़ा गांव के सामने आधा दर्जन और तमाचावाद में दो तथा चित्रसेनपुर गांव के सामने चार ढाबे हैं, सभी जगह केरोसिन और कोयले का इस्तेमाल होता है। कपसेठी मार्ग, छतेरी और जोगियापुर सहित अन्य ढाबों पर भी यही हाल है।
कुछ ढाबों पर तो एलपीजी की व्यवस्था के बाद भी अधिकतर काम कोयले कीभट्टी पर किया जाता है। मिर्जामुराद क्षेत्र के खजुरी स्थित ढाबा संचालक लक्ष्मन यादव और रखौना ढाबा के चंद्रकेश प्रसाद का कहना है कि कोयला के उपयोग पर पाबंदी संबंधी शासनादेश की जानकारी नहीं है। जब रोक जारी होगी तो दूसरी व्यवस्था की जाएगी। चौबेपुर इलाके में वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर चद्रंावती, ढकवां, राजवारी, उगापुर, बहरामपुर, संदहा, रूस्तमपुर स्थित ढाबों पर रोक के बाद भी कोयले की भट्ठियां धधक रही हैं। रोहनिया, बड़ागांव क्षेत्र के कई ढाबों पर धड़ल्ले से कोयले का इस्तेमाल होता है। कभी कोई रोकटोक नहीं होती।
एनजीटी के निर्देश के तहत अपर मुख्य सचिव चंचल कुमार तिवारी ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र भेजकर इसका अनुपालन कराने को कहा है लेकिन यहां हालात दूसरे हैं। कछवा रोड इलाके में नेशनल हाईवे के किनारे लगभग एक दर्जन ढाबों पर कोयले की भट्टी पर ही भोजन बनाया जा रहा है। बीहड़ा गांव के सामने आधा दर्जन और तमाचावाद में दो तथा चित्रसेनपुर गांव के सामने चार ढाबे हैं, सभी जगह केरोसिन और कोयले का इस्तेमाल होता है। कपसेठी मार्ग, छतेरी और जोगियापुर सहित अन्य ढाबों पर भी यही हाल है।
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कुछ ढाबों पर तो एलपीजी की व्यवस्था के बाद भी अधिकतर काम कोयले कीभट्टी पर किया जाता है। मिर्जामुराद क्षेत्र के खजुरी स्थित ढाबा संचालक लक्ष्मन यादव और रखौना ढाबा के चंद्रकेश प्रसाद का कहना है कि कोयला के उपयोग पर पाबंदी संबंधी शासनादेश की जानकारी नहीं है। जब रोक जारी होगी तो दूसरी व्यवस्था की जाएगी। चौबेपुर इलाके में वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर चद्रंावती, ढकवां, राजवारी, उगापुर, बहरामपुर, संदहा, रूस्तमपुर स्थित ढाबों पर रोक के बाद भी कोयले की भट्ठियां धधक रही हैं। रोहनिया, बड़ागांव क्षेत्र के कई ढाबों पर धड़ल्ले से कोयले का इस्तेमाल होता है। कभी कोई रोकटोक नहीं होती।
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