कोरोना का असर कम होते ही प्रवासियों का पलायन शुरू , वाराणसी से महानगरों को जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग
कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद प्रवासी अब फिर से अपने काम धंधों पर लौटने लगे हैं। कई राज्यों में उद्योग-धंधे व कार्यालय शुरू होने पर वापस घर लौटे मजदूर और नौकरी पेशा वाले फिर से अपने काम पर लौट रहे हैं। ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है।
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कोरोना की दूसरी लहर का ग्राफ गिरते ही लॉकडाउन में ढील के बाद मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों से घर लौटे प्रवासी फिर काम पर लौटने लगे हैं। वाराणसी सहित पूर्वांचल भर के श्रमिकों की भीड़ वाराणसी के कैंट स्टेशन पर बढ़ गई है। महानगरों को जाने वाली ट्रेनों में सीट के लिए अब तत्काल आरक्षण में भी यात्रियों को जूझना पड़ रहा है।
वाराणसी से मुंबई, सूरत, गुजरात, अहमदाबाद, हैदराबाद की ओर जाने वाली ट्रेनों में जहां 15-20 दिन पहले सीटें खाली थीं तो अब वहीं वेटिंग दिखनी शुरू हो गई हैं। खास कर बिहार-झारखंड से होकर बनारस से मुंबई, सूरत और अहमदाबाद जाने वाली ट्रेनों में अगले सप्ताह भर तक जगह नहीं है। वाराणसी कैंट स्टेशन पर हर दिन की अपेक्षा यात्रियों की भीड़ बढ़ रही है।
इसे देखते हुए मेडिकल टीम ने जांच बढ़ा दी और प्रवासियों के नाम भी रजिस्टर में दर्ज किए जा रहे हैं। मुंबई की ओर जाने वाली महानगरी, कमायनी, लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल ट्रेनों में अगले सप्ताह भर तक जगह नहीं है। लगभग सभी श्रेणियों में वेटिंग लिस्ट है। आरक्षित टिकट के लिए मारामारी चल रही है। स्थिति यह है कि ट्रेनों में किसी तरह सवार हो कर यात्री यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
कंपनियों की ओर से आ रहा टिकट और पैसे
वहीं महाराष्ट्र लौटने वाले प्रवासी अपने साथ 48 घंटे का आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट भी लेकर जा रहे हैं। कुछ प्रवासियों ने बताया कि डेढ़ से दो माह तक घर बैठ गए थे। अब महाराष्ट्र में स्थिति सामान्य हो रही है तो उद्योग और धंधे भी खुलने लगे हैं। इसलिए कंपनियों की ओर से बुलावा आ रहा है। टिकट और कोविड जांच रिपोर्ट का भी पैसा कंपनियों की ओर खाते में भेज दिया जा रहा है। वहीं कुछ प्रवासियों ने बताया कि एडवांस सैलरी तक भेजी जा रही है।
आजमगढ़ के रहने वाले अमित कुमार ने बताया कि हैदराबाद जा रहे हैं, वहीं एक कंपनी में काम करते थे। कंपनी की ओर से टिकट भेजा गया। घर परिवार चलाने के लिए काम जरूरी है। कुछ यही कहना जौनपुर के रहने वाले मुकेश प्रजापति का भी रहा। बोले-मुंबई के गोरेगांव में रहकर एक फैक्ट्री में काम करते थे, मालिक ने टिकट और पैसा भेज दिया तो अब वहीं जा रहे हैं।