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Fathers Day 2022: संघर्षों की आंधी से टकराकर हौसले की दीवार खड़ी करने वाला का नाम है पिता

Sun, 19 Jun 2022 11:58 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sun, 19 Jun 2022 11:58 AM IST
सार

पिता की सीख और उनके अनुशासन भले ही बचपन में कड़वे लगते हों, लेकिन आपके सफल होने के पीछे वही सख्ती चट्टान की तरह काम करती है। पिता न केवल अभिभावक बल्कि एक दोस्त की भी भूमिका निभाते हैं। समय-समय पर बच्चों को उनकी जरूरतों के मुताबिक कठिन डगर में राह दिखाने का काम करते हैं।

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Fathers Day 2022 varanasi After hitting the storm of struggles, the name of the wall of courage is father.
Fathers day 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिता की सीख और उनके अनुशासन भले ही बचपन में कड़वे लगते हों, लेकिन आपके सफल होने के पीछे वही सख्ती चट्टान की तरह काम करती है। पिता न केवल अभिभावक बल्कि एक दोस्त की भी भूमिका निभाते हैं। समय-समय पर बच्चों को उनकी जरूरतों के मुताबिक कठिन डगर में राह दिखाने का काम करते हैं।

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पिता ने चढ़वाई सफलता की सीढ़ी
दुर्गाकुंड निवासी मंगला सिंह के बेटे विशाल दिव्यांग हैं। वैसे तो मंगला की आर्थिक की स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन बेटे के सपने को पूरा करने के लिए गोद में ले जाकर उसकी पढ़ाई कराई। 12वीं के बाद जब विशाल का चयन आईआईटी गुवाहाटी में हुआ, तब भी वो उसे अपने गोद में लेकर जाते थे।
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आईआईटी के बाद विशाल ने गेट की परीक्षा दी और 329वीं रैंक हासिल की। आईआईटी बीएचयू में एमटेक के बाद विशाल का चयन न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में हुआ। हालांकि, बीमारी की वजह से उन्हें मना कर दिया गया। इसके बाद भी पिता और बेटे का हौसला कम नहीं हुआ। यूपी बोर्ड परीक्षा में मंगला प्रसाद के दूसरे बेटे ने जिले में दसवीं में छठवां स्थान प्राप्त किया है।

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मां ने पिता बनकर पूरा किया सपना

Fathers Day 2022 varanasi After hitting the storm of struggles, the name of the wall of courage is father.
सहायक आचार्य डॉ. राजा पाठक - फोटो : अमर उजाला

संस्कृत धर्म विद्या संस्थान में सहायक आचार्य डॉ. राजा पाठक ने बचपन में कई ठोकरें खाईं पर हिम्मत नहीं हारी। मूलरूप से बिहार निवासी राजा के सिर से पिता का साया ढाई साल की उम्र में ही उठ गया था। मां ने पिता बनकर चार भाई बहनों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी उठाई। वक्त ऐसा भी आया जब मां कलावती पांडेय को अपने जेवर बेचने पड़े।

12वीं के बाद स्नातक में बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म संस्थान में दाखिला प्राप्त किया। प्रथम आने के बाद 2013 में जेआरएफ में सफलता हासिल की। विदेश में भी शिक्षा का अवसर मिल चुका है। वह दूसरे बच्चों को निशुल्क नेट और जेआरएफ की तैयारी करा रहे हैं। राजा अब तक 800 छात्रों को कोचिंग दे चुके हैं। कई नेट और जेआरएफ क्वालीफाई कर चुके हैं।

घड़ी बनाने वाले पिता ने बेटी को बनाया सहायक प्रोफेसर

Fathers Day 2022 varanasi After hitting the storm of struggles, the name of the wall of courage is father.
zvd - फोटो : अमर उजाला

बीएचयू में सहायक प्रोफेसर और खगड़िया निवासी डॉ. श्वेता संगीत की दुनिया में पहचान बनाना चाहती थीं। रिश्तेदार खुश नहीं थे, लेकिन पिता सदा शिव प्रसाद जायसवाल ने बेटी के लगन को देखकर ठाना कि वह उसका सपना पूरा करेंगे। गुरुजी को घर बुलाया और बेटी की शिक्षा-दीक्षा शुरू हुई। घड़ी बनाकर जो भी कमाते शिक्षा के लिए रख देते थे।

श्वेता ने 12 साल में पहला स्टेज शो किया। पिता ने बेटी का प्रवेश भागलपुर विश्वविद्यालय में कराया। स्नातक पूरा करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए बनारस भेजा। रिश्तेदारों ने शादी का दबाव बनाया, लेकिन पिता ने बेटी के सपनों को तवज्जो दी। श्वेता का दाखिला बीएचयू एम म्यूज में प्रवेश हो गया। उन्होंने नेट क्वालीफाई किया और पीएचडी के बाद एमएमवी में संगीत विभाग में सहायक प्रोफेसर की नौकरी मिल गई। श्वेता कहती हैं कि गुरु राम शंकर सिंह का उनकी सफलता में काफी योगदान रहा।

कैंची में धार देकर बेटी को बनाया फुटबॉलर  

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कैंची में धार देकर बेटी को बनाया फुटबॉलर   - फोटो : अमर उजाला

कैंची में धार देने का काम करने वाले पहाड़ी गांव के नरेश शर्मा ने दो बोटियों को खेल के क्षेत्र में आग बढ़ाया। एक बेटी अमृता शर्मा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में यूपी टीम की ओर से गुवाहाटी में खेल रही है। तीन में से दो बेटी फुटबाल खेलती हैं। इनकी प्रतिभा को देख खेलने के लिए प्रेरित किया। नरेश ने कहा कि कैंची में धार लगाकर बेटियों के सपने पूरे कर रहे।

वह जब बाहर खेलने जाती हैं तो गर्व होता है। बेटी का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलना ही पिता दिवस का उपहार है। अमृता ने बताया कि पिता पढ़ाई लिखाई के साथ खेल के लिए भी हमेशा प्रेरित करते हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलकर पिता को उपहार दे सकूं, आगे भी यही प्रयास होगा।

मां की प्रेरणा से बेटे ने पिता का सपना किया पूरा 

आराजीलाइन के बाबूराम पूरा पनियारा गांव की ज्ञांति मिश्रा ने 20 साल पहले पति लल्लन के निधन के बाद कड़ी मेहनत करबेटे को अधिकारी बनाया। छोटे छोटे बच्चों को लेकर खेती की। इस आमदनी से घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई हुई। गोरखपुर में सेल टैक्स विभाग में तैनात पति के अरमान को पूरा करने के लिए ज्ञांति बच्चों को प्रेरित करती रहीं। स्नातक की पढ़ाई के बाद बेटे विपिन कुमार ने लेखपाल की परीक्षा पास की। इसके बाद पीसीएस परीक्षा दी। जिसे पास कर पिता की तरह सेल टैक्स विभाग में नौकरी हासिल कर ली। 

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