आजमगढ़ में कोरोना संदिग्ध की मौत के बाद, परिजनों से टीबी से मौत लिखा कर मौन साध गया प्रशासन
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आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। स्थानीय सीएचसी से कोरोना संदिग्ध बताकर जिला अस्पताल रेफर किये जाने के बाद भी जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा अधेड़ की जांच न कराया जाना स्वास्थ्य महकमे के लापरवाही को उजागर कर रहा है।
जिस 108 एंबुलेंस से उसे सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था, उस पर्ची पर भी संदिग्ध कोरोना पीड़ित लिखा गया था। टीबी और कोरोना के लक्षणों में काफी समानता होती है। इसके बाद भी जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा उसकी जांच न कराया जाना स्वास्थ्य विभाग के कोरोना से लड़ने की तैयारियों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।
दरअसल, एक कोराना संदिग्ध की बृहस्पतिवार को दिन में 11 बजे मौत हो गई। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिजनों से टीबी से ग्रसित होना लिखवा कर शव का अंतिम संस्कार करा दिया। मृत अधेड़ 20 दिनों पूर्व पंजाब से आया था। सीएचसी की टीम ने गांव में जाकर जांच करने के बाद उसे कोरोना संदिग्ध बताते हुए सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया था। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरती और उसकी कोई जांच नहीं कराई और उसे वापस भेज दिया था।
मृत अधेड़ पंजाब प्रांत में रहता था। 20 दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर वह लौटा था। घर पर बुखार व सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजनों स्वास्थ्य महकमे को सूचना दी थी। सीएचसी अहरौला की टीम ने उसकी जांच पड़ताल की और कोरोना संदिग्ध होने की आशंका व्यक्त करते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में उसकी कोई जांच आदि नहीं कराई गई।
बृहस्पतिवार को दिन में 11 बजे उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर एसडीएम बूढ़नपुर के अलावा स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। प्रशासनिक टीम ने परिजनों से यह लिखवा लिया कि टीबी के चलते अधेड़ की मौत हुई है। एसडीएम दिनेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि वह पहले से टीबी का मरीज था और उसका इलाज भी चल रहा था। जिला अस्पताल में टीबी इलाज की जांच रिपोर्ट आदि देख कर डॉक्टरों ने उसे वापस घर भेज दिया था।