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Varanasi News: 9 साल बाद पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर श्रीहरि की पूजा, आज करेंगे स्नान-दान
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वाराणसी। पुरुषोत्तमी पूर्णिमा (अधिकमास पूर्णिमा) नौ साल बाद आई है। शनिवार को व्रत के साथ पूर्णिमा का पूजन शुरू हो गया। शिवयोग में पूजन-अर्चन होगा। व्रतियों ने संकल्प के साथ व्रत रखकर भगवान श्रीहरि का पूजन-अर्चन किया। रविवार को स्नान-दान की पूर्णिमा मनाई जाएगी। श्रद्धालु मां गंगा में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे। सुबह घाटों पर स्नान के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी।
हर तीन साल में एक बार आने वाला विशेष पुरुषोत्तम मास स्नान, दान और पुण्य कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। ज्येष्ठ मास में नौ साल बाद पुरुषोत्तमी पूर्णिमा आई है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और दान का अत्यधिक महत्व है। अधिकमास की पूर्णिमा तिथि शनिवार को शुरू हो गई। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा तिथि सुबह 11:57 बजे से शुरू होकर रविवार को दोपहर 2:14 बजे तक रहेगी।
व्रत की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देवों की पूजा कर व्रत का संकल्प लिया। दिनभर व्रत रखा, सत्यनारायण कथा का श्रवण किया और चंद्रमा को अर्घ्य दिया। विष्णु मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। रविवार को उदया तिथि के अनुसार श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों का तर्पण करेंगे। पुरुषोत्तम मास में शादी, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन दान और पूजा का फल सबसे अधिक मिलता है।
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दीपदान से दूर होते हैं सभी दुख
पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष पुण्यफल मिलता है। पुराणों में वर्णित है कि इस पूर्णिमा पर गंगा, गोदावरी आदि पवित्र नदियों में स्नान, पीपल और तुलसी के पेड़ के नीचे, देवालयों में, घर के पूजाघर तथा मुख्य द्वार पर दीप जलाने का विशेष फल मिलता है। इससे जीवन से जुड़े तमाम तरह के दुख और दोष दूर होते हैं। चंद्र देवता की पूजा से भगवान विष्णु के साथ चंद्र देवता की भी कृपा प्राप्त होती है। इससे मन को शांति तथा सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दान के साथ गायों को खिलाएं हरा चारा
अधिक मास की पूर्णिमा पर स्नान की तरह दान का भी विशेष महत्व माना गया है। व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, जल, वस्त्र और धन आदि का दान करना चाहिए। ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर गायों को हरा चारा खिलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
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हर तीन साल में एक बार आने वाला विशेष पुरुषोत्तम मास स्नान, दान और पुण्य कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। ज्येष्ठ मास में नौ साल बाद पुरुषोत्तमी पूर्णिमा आई है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और दान का अत्यधिक महत्व है। अधिकमास की पूर्णिमा तिथि शनिवार को शुरू हो गई। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा तिथि सुबह 11:57 बजे से शुरू होकर रविवार को दोपहर 2:14 बजे तक रहेगी।
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व्रत की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देवों की पूजा कर व्रत का संकल्प लिया। दिनभर व्रत रखा, सत्यनारायण कथा का श्रवण किया और चंद्रमा को अर्घ्य दिया। विष्णु मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। रविवार को उदया तिथि के अनुसार श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों का तर्पण करेंगे। पुरुषोत्तम मास में शादी, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन दान और पूजा का फल सबसे अधिक मिलता है।
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दीपदान से दूर होते हैं सभी दुख
पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष पुण्यफल मिलता है। पुराणों में वर्णित है कि इस पूर्णिमा पर गंगा, गोदावरी आदि पवित्र नदियों में स्नान, पीपल और तुलसी के पेड़ के नीचे, देवालयों में, घर के पूजाघर तथा मुख्य द्वार पर दीप जलाने का विशेष फल मिलता है। इससे जीवन से जुड़े तमाम तरह के दुख और दोष दूर होते हैं। चंद्र देवता की पूजा से भगवान विष्णु के साथ चंद्र देवता की भी कृपा प्राप्त होती है। इससे मन को शांति तथा सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दान के साथ गायों को खिलाएं हरा चारा
अधिक मास की पूर्णिमा पर स्नान की तरह दान का भी विशेष महत्व माना गया है। व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, जल, वस्त्र और धन आदि का दान करना चाहिए। ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर गायों को हरा चारा खिलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है।