प्रशासनिक पहल: वाराणसी जिले में शामिल होंगे चंदौली के 8 गांव, लोगों में जगी आस- अब होगा चौमुखी विकास
चंदौली के आठ गांव मढ़िया, बहादुरपुर, जलीलपुर, चौरहट, भोजपुर, रतनपुर, सेमरा और कटेसर वाराणसी की सीमा से सटे हैं। जिलाधिकारी चंदौली संजीव सिंह ने रिपोर्ट दी कि इन गांवों को वाराणसी में शामिल किया जा सकता है।
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चंदौली के आठ गांवों को वाराणसी में शामिल करने के दिशा में प्रशासनिक पहल के बाद इन गांवों के लोगों में आस जगी है। वाराणसी की सीमा से सटे इन गांवों के लोग 2015 से लगातार वाराणसी जिले में शामिल होने की मांग कर रहे हैं। चंदौली जिलाधिकारी की ओर से समायोजन के लिए भेजे गए पत्र के बाद डीएम वाराणसी ने इसे कमिश्नर को प्रेषित कर दिया है।
मंडलायुक्त की ओर से नोट रिपोर्ट के साथ शासन को इसी सप्ताह भेजा जाएगा। वाराणसी से चंदौली जिला 1997 में अलग हुआ। चंदौली में शामिल किए गए आठ गांव मढ़िया, बहादुरपुर, जलीलपुर, चौरहट, भोजपुर, रतनपुर, सेमरा और कटेसर वाराणसी की सीमा से सटे हैं।
लोगों को जिला अस्पताल, जिला मुख्यालय, न्यायालय, विकास भवन, जिलाधिकारी कार्यालय आदि जाने के लिए 30 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। शासन में गए इस प्रस्ताव पर जिलाधिकारी चंदौली संजीव सिंह ने रिपोर्ट दी कि इन गांवों को वाराणसी में शामिल किया जा सकता है।
शासन स्तर पर होगा अंतिम निर्णय
इस रिपोर्ट को वाराणसी के डीएम कौशलराज शर्मा को दिया गया और डीएम ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल को शासन स्तर तक पहुंचाने के लिए रिपोर्ट भेजी। यह सूचना मिलने के बाद गांव के लोगों में हर्ष है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि रिपोर्ट राजस्व विभाग को भेजी जाएगी। इस पर शासन स्तर से निर्णय किया जाना है।
जिला मुख्यालय दूर होने से नहीं मिल पाती सुविधाएं
मढ़िया गांव के निवासी भूप नारायण झा ने बताया कि काफी लंबे समय से इन आठ गांवों को वाराणसी में शामिल करने के लिए मांग की जा रही है पर कोई सुनता न था। अगर प्रशासन ने कुछ पहल की है तो यह हमारे लिए सुखद है। वाराणसी में शामिल होने के बाद इन गांवों के लोगों की आधी समस्याएं वैसे ही दूर हो जाएंगी।
चौरहट गांव के निवासी कन्हैया पटेल ने कहा कि चंदौली जिले का मुख्यालय से लेकर न्यायालय और जिला अस्पताल भी गांव से 30 किमी की दूरी पर है। जिससे सुविधाएं नहीं मिल पाती। अगर ये गांव वाराणसी में शामिल हो जाते तो राहत मिलती।
राजेश यादव ने कहा कि सूजाबाद नगर पंचायत के साथ इन गांवों को मिला कर नगरपालिका बन जाता है तो और तेजी से विकास हो पता। बहादुरपुर के रविकांत दुबे ने कहा कि हमारा गांव वाराणसी से सटा हुआ है पर जिला बदलने से सुविधाएं नहीं मिलती।
कटेसर के निजामुल हक ने कहा कि थाना, कचहरी, डीएम कार्यालय, पुलिस ऑफिस के साथ सरकारी कार्यालय बनारस अगर किसी कार्य से जाते हैं तो घर का भी काम बाजार से कर के आ सकते हैं। चंदौली जाने में उल्टा पड़ता है। देव कुमार मौर्य ने बताया कि रतनपुर गांव से सटा हुआ डोमरी और सूजाबाद बांव वाराणसी में हैं। वहां काफी सुविधाएं हैं पर हमें यह सुविधाएं नहीं मिल पाती।