फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Acharya Shukla manuscript displayed first time tomorrow after 90 years litterateurs Nagari Pracharini Sabha

UP: 90 साल बाद आचार्य शुक्ल की पांडुलिपि कल पहली बार दिखेगी, नागरी प्रचारिणी सभा में जुटे साहित्यकार

Wed, 15 Jul 2026 06:25 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 15 Jul 2026 06:25 PM IST
सार

Varanasi News: करीब 90 वर्ष बाद आचार्य रामचंद्र शुक्ल की हिंदी साहित्य के संक्षिप्त इतिहास पर लिखी दुर्लभ पांडुलिपि पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। यह पांडुलिपि नागरी प्रचारिणी सभा में कागजों के अंबार के बीच सुरक्षित मिली थी। साहित्य प्रेमियों और शोधार्थियों के लिए यह ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।

विज्ञापन
Acharya Shukla manuscript displayed first time tomorrow after 90 years litterateurs Nagari Pracharini Sabha
नागरी प्रचारिणी सभा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: नागरी प्रचारिणी सभा के 133वें स्थापना दिवस का शुभारंभ 16 जुलाई को होगा। तीन दिवसीय उत्सव में लगने वाली प्रदर्शनी में 90 साल बाद मिली प्रख्यात साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की हिंदी साहित्य के संक्षिप्त इतिहास पर लिखी पांडुलिपि को प्रदर्शित किया जाएगा। 

विज्ञापन


इसके साथ ही महात्मा गांधी, मुंशी प्रेमचंद, निराला, जयशंकर प्रसाद, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, हीराडोम और मैथिलीशरण गुप्त की हस्तलिखित कलात्मक पांडुलिपियां भी प्रदर्शित की जाएंगी। स्थापना दिवस पर तीन दिनों तक व्याख्यान, शास्त्रीय संगीत, दास्तानगोई, निर्गुण गायन, प्रदर्शनी व चित्र-प्रदर्शनी आदि कार्यक्रम होंगे। 
विज्ञापन


प्रदर्शनी में साहित्य से लेकर देश भर की विभूतियों की पांडुलिपियां पहली बार प्रदर्शित की जा रही हैं। नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने बताया कि सभा ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल की कालजयी साहित्येतिहास-पुस्तक हिंदी साहित्य के इतिहास के संक्षिप्त छात्र संस्करण को ढूंढा है। आचार्य शुक्ल के हाथों से लिखे इस संस्करण के पन्ने को प्रदर्शनी में शामिल किया गया है। इसे अब तक किसी ने न देखा न पढ़ा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

हिंदी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास शीर्षक की इस पांडुलिपि में आचार्य शुक्ल ने अपने मूल इतिहास-ग्रंथ के सारतत्व को सरल शिल्प और कम शब्दों के जरिये छात्रों के लिए दोबारा लिखा था। इस पुस्तक की पांडुलिपि सभा के कागजों के अंबार में कहीं दब गई थी। करीब 90 साल बाद सफाई के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की टीम ने उसे ढूंढ निकाला है।

आज पदयात्रा से शुरू होगा महोत्सव, कल से साहित्यकारों की जुटान : नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को विशेश्वरगंज स्थित नागरी प्रचारिणी सभा से लहुराबीर स्थित राजकीय क्वींस कॉलेज तक पदयात्रा निकाली जाएगी। पदयात्रा सुबह आठ बजे निकलेगी।

प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने बताया कि 16 जुलाई को स्थापना दिवस महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण, वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय और प्रो. कृपाशंकर चौबे मौजूद रहेंगे। इसके बाद अलग-अलग सत्र होंगे। 

1929 में पहली बार हुई थी प्रकाशित
पुस्तक हिंदी साहित्य का इतिहास पहली बार 1929 में प्रकाशित हुई थी। तब से आज तक वह पुस्तक आलोचना और साहित्येतिहास के अनिवार्य आधार ग्रंथ के आसन पर प्रतिष्ठित है। नागरी प्रचारिणी सभा ने उसके अनेक संस्करण प्रकाशित किए। मई 1940 में उसका संशोधित-प्रवर्द्धित संस्करण प्रकाशित हुआ। इसके बाद 10 फरवरी 1941 को आचार्य शुक्ल का निधन हो गया। शुक्ल जी ने नागरी प्रचारिणी सभा के अनुरोध पर इस पुस्तक की भी पांडुलिपि तैयार की थी, लेकिन वह प्रकाशित नहीं हो सकी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed