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यूपी: जेल से छूटते ही किशोरी को फिर ले गया युवक, माता-पिता बता रहे नाबालिग, मेडिकल में उम्र 18 वर्ष

Sun, 22 Nov 2020 01:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 22 Nov 2020 01:37 PM IST
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Accused man taken back to teenager girl as soon as he was released from jail in bhadohi up
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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में जिस किशोरी को भगा ले जाने के आरोप में युवक ने जेल की हवा खाई थी, जेल से छूटने के बाद उसे बहला फुसलाकर कर फिर ले गया। माता-पिता और स्कूल के अनुसार, लड़की की उम्र 15 साल के आसपास है, जबकि रेडियोलॉजिस्ट की जांच में लड़की की उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच आंकी गई है।

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परिजनों ने पुलिस पर चिकित्सक से मिलीभगत कर उम्र में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। मामला गोपीगंज थानाक्षेत्र के एक गांव का है। लड़के और लड़की के अलग-अलग समुदाय से जुड़े होने के कारण मामला संवेदनशील माना जा रहा है।
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लोगों की जुबान पर चर्चा बनी है कि पुलिस अगर ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करें तो क्राइम पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। गोपीगंज थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी शाहिद दूसरे समुदाय की लड़की को बहला फुसलाकर दोबारा भगा ले गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन पाक्सो एक्ट की धाराएं नहीं लगाई गईं।
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लड़की के परिजनों ने पुलिस और सोनभद्र में मेडिकल करने वाले चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों की मिलीभगत से उसकी बेटी को बालिग करार किया गया। जबकि आधार कार्ड और विद्यालय के रिकार्ड में उसकी बेटी अभी महज 15 साल की है।

पिता की तहरीर पर 12 नवंबर को गोपीगंज के ज्ञानपुर रोड निवासी आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया, जो अपने ननिहाल में रहता है। लेकिन, अभी तक इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और नाबालिग की बरामदगी नहीं हुई है।

नाबालिग के पिता ने बताया कि थाने, चौकी का चक्कर लगा रहा है, जहां चौकी इंचार्ज के छुट्टी पर जाने और वापस लौटने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है। आरोप है कि संवेदनशील मामले में भी इस तरह की लापरवाही आखिर क्यों की जाती है। क्या पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।

इससे पहले भी मार्च में इसी लड़की को ले जाने के आरोप में युवक को जेल भेजा गया था। तीन महीने बाद किशोरी और युवक मिले थे। उस समय भी पॉक्सो नहीं लगाया गया था।

पिता ने कहा कि बेटी का आधार कार्ड और विद्यालय के हिसाब से जन्म तिथि सात दिसंबर 2005 है, जिसको पुलिस नहीं मान रही। उन्होंने जनपद के आला अधिकारियों से इस मामले में समुचित कार्रवाई की मांग की है।

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