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है तो पब्लिक लाइब्रेरी पर प्रवेश खास को ही
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:54 AM IST
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बनारस क्लब में पब्लिक लाइब्रेरी है लेकिन यहां के प्रवेश द्वार पर साफ लिखा है कि सदस्यों के अलावा किसी अन्य के प्रवेश पर मनाही है। शहर के चुनिंदा लोगों और अफसरों के इस क्लब में पब्लिक लाइब्रेरी के होने की जानकारी बनारस बार एसोसिएशन के महामंत्री नित्यानंद राय को आरटीआई के माध्यम से मिली है। इस पर अधिवक्ताओं ने तय किया है कि बुधवार को वो क्लब में प्रवेश कर पब्लिक लाइब्रेरी देखेंगे और उनके साथ आमजन भी उसका उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था बनवाएंगे।
बनारस क्लब को मिली जमीन का 90 साल का पट्टा बीते अप्रैल में खत्म हो चुका है। वहीं, तय शर्तों के अनुसार खत्म हो चुके पट्टे का बीते 21 साल से नवीनीकरण नहीं कराया गया था। क्लब की जमीन चंद लोगोें की बजाय जगह की कमी से जूझ रही कचहरी और आमजन के काम में आए, यह मांग लेकर बनारस बार एसोसिएशन संघर्षरत है। इसके मद्देनजर क्लब के संबंध में जन सूचना अधिकार के तहत बनारस बार के महामंत्री नित्यानंद राय ने जानकारी मांगी थी। नित्यानंद ने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने अपने तबादले से पांच दिन पहले 13 अक्तूबर को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर जिस जमीन पर बनारस क्लब है उसके पट्टा के नवीनीकरण की संस्तुति की थी। हवाला दिया था कि यहां पब्लिक लाइब्रेरी सहित मनोरंजन और खेलकूद की अन्य गतिविधियां होती हैं।
ऐतिहासिक महत्व के कार्यक्रम होते हैं जिसमें क्लब के सदस्यों के साथ ही जिले के संभ्रांत लोग शामिल होते हैं। राय का आरोप है कि पूर्व डीएम की यह संस्तुति पूरी तरह से विधिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ाकर की गई है। अधिवक्ता इस कृत्य के लिए पूर्व डीएम की निंदा करते हैं। कहा कि डीएम ने क्लब में पब्लिक लाइब्रेरी होने का हवाला दिया है, यदि ऐसा है तो आमजन के प्रवेश पर पाबंदी क्यों हैं। नित्यानंद ने कहा कि शासनादेश के अनुसार सामुदायिक कार्यों से जुड़े क्लबों को ही मिली पट्टे की भूमि का नवीनीकरण करने का प्रावधान है। पूर्व डीएम ने ऐसे किसी भी तथ्य का उल्लेख अपने पत्र में नहीं किया है जिससे स्पष्ट हो सके कि बनारस क्लब सामुदायिक कार्यों से जुड़ा है। कहा कि जब तक क्लब की जमीन आमजन के उपयोग में नहीं आएगी अधिवक्ताओं का संघर्ष जारी रहेगा।
बनारस क्लब को मिली जमीन का 90 साल का पट्टा बीते अप्रैल में खत्म हो चुका है। वहीं, तय शर्तों के अनुसार खत्म हो चुके पट्टे का बीते 21 साल से नवीनीकरण नहीं कराया गया था। क्लब की जमीन चंद लोगोें की बजाय जगह की कमी से जूझ रही कचहरी और आमजन के काम में आए, यह मांग लेकर बनारस बार एसोसिएशन संघर्षरत है। इसके मद्देनजर क्लब के संबंध में जन सूचना अधिकार के तहत बनारस बार के महामंत्री नित्यानंद राय ने जानकारी मांगी थी। नित्यानंद ने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने अपने तबादले से पांच दिन पहले 13 अक्तूबर को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर जिस जमीन पर बनारस क्लब है उसके पट्टा के नवीनीकरण की संस्तुति की थी। हवाला दिया था कि यहां पब्लिक लाइब्रेरी सहित मनोरंजन और खेलकूद की अन्य गतिविधियां होती हैं।
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ऐतिहासिक महत्व के कार्यक्रम होते हैं जिसमें क्लब के सदस्यों के साथ ही जिले के संभ्रांत लोग शामिल होते हैं। राय का आरोप है कि पूर्व डीएम की यह संस्तुति पूरी तरह से विधिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ाकर की गई है। अधिवक्ता इस कृत्य के लिए पूर्व डीएम की निंदा करते हैं। कहा कि डीएम ने क्लब में पब्लिक लाइब्रेरी होने का हवाला दिया है, यदि ऐसा है तो आमजन के प्रवेश पर पाबंदी क्यों हैं। नित्यानंद ने कहा कि शासनादेश के अनुसार सामुदायिक कार्यों से जुड़े क्लबों को ही मिली पट्टे की भूमि का नवीनीकरण करने का प्रावधान है। पूर्व डीएम ने ऐसे किसी भी तथ्य का उल्लेख अपने पत्र में नहीं किया है जिससे स्पष्ट हो सके कि बनारस क्लब सामुदायिक कार्यों से जुड़ा है। कहा कि जब तक क्लब की जमीन आमजन के उपयोग में नहीं आएगी अधिवक्ताओं का संघर्ष जारी रहेगा।
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