फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Abir-Gulal was red Kashi

अबीर-गुलाल से लाल हुई काशी

Sun, 20 Mar 2016 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी Updated Sun, 20 Mar 2016 02:13 AM IST
विज्ञापन
Abir-Gulal was red Kashi
रंगभरी एकादशी
भोले की नगरी काशी शनिवार को रंग गई। गलियां लाल हो गईं। कोई नहीं बचा। क्या बच्चे, क्या बड़े। बिना भेदभाव के लोग अबीर-गुलाल की पोटली लिए निकले। महिलाएं भी जनसैलाब के बीच धक्का खाने की परवाह किए बगैर झोली में गुलाल लेकर निकलीं। हर चेहरे पर सतरंगी खुशी और हर दिल में प्रेम-सद्भाव का अनूठा उत्साह। मौका था काशी में देवाधिदेव महादेव के गौने का। राजशाही पगड़ी, खादी सिल्क के लाल कुर्ते में बाबा डोली में सवार हुए तो उन्हें छूने और अबीर लगाने की होड़ मच गई। देखते-देखते हर हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के बीच विश्वनाथ गली से लेकर स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन तक का हर कोना लाल हो गया। इसी के साथ काशी में होली शुरू हो गई। अब पांच दिन तक होगी रंग-गुलाल और अबीर की बौछार।
विज्ञापन


काशी में महाशिवरात्रि को बाबा की शादी का दिन माना जाता है। शादी के 12 दिन बाद बाबा के गौने की रस्म में देश-दुनिया के भक्त काशी के सबसे बड़े रंगोत्सव के साक्षी बने। मस्तक पर चंद्रमा, भस्म भभूतधारी के कानों में कुंडल, गले में सर्पों की माला। बाएं हाथ में डमरू-त्रिशूल और दाहिने हाथ से भक्तों को अभयदान का आशीष देने की मुद्रा में बाबा शाम पांच बजे सज-धज कर पालकी पर सवार हुए।
विज्ञापन



भगवान शिव की चल प्रतिमाओं में पार्वती और उनकी गोद में प्रथमेश भी विराजे। महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कपूर से महाआरती की। इसके बाद डोली को घरात पक्ष से आए मंदिर के पुजारियों के साथ बारात पक्ष के महंत परिवार ने कंधे पर उठाया और गुलाब की पंखुड़ियों के साथ ही हर तरफ से अबीर-गुलाल बरसने लगे।  कुछ क्षणों में ही सिर से पैर तक लोग भांति-भांति के रंगों से रंग गए। गर्भगृह में चल प्रतिमाओं का भव्य शृंगार करने के बाद मंदिर के पायों, दीवारों की आड़ से अबीर-गुलाल उड़ाए जाने लगे। इसके पहले से ही मंदिर परिसर से लेकर विश्वनाथ गली तक अबीर-गुलाल लिए श्रद्धालुओं का सैलाब हिलोरें मारता रहा। बाबा की ड्योढ़ी पर मंगलध्वनि बजाने वाले महेंद्र प्रसन्ना महंत के आंगन में शहनाई की धुन छेड़ रहे थे। शंखध्वनि गूंजती रही। उसी समय डमरू नाद से वातावरण गुंजायमान हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed