बुझ गया इकलौता चिराग: नो एंट्री में आए ट्रैक्टर ने कक्षा छह के छात्र को कुचला, मौत; सीमा विवाद में उलझी पुलिस
भेलूपुर थाना क्षेत्र के गायत्री नगर, सुकुलपुरा में प्रसून भट्टाचार्य लाइट एंड साउंड का काम करते हैं। प्रसून के परिवार में उनकी पत्नी प्रियंका के अलावा इकलौता बेटा सौरव था। प्रसून ने बताया कि वह स्कूटी से अपने बेटे को बीएलडब्ल्यू स्थित सेंट जॉन्स स्कूल छोड़ने जा रहे थे। लगभग 6:30 बजे वह भिखारीपुर तिराहा पहुंचे थे, तभी पीछे से ट्रॉली में बालू लादे हुए तेज रफ्तार ट्रैक्टर आया और उनकी स्कूटी पर जोरदार टक्कर मार दी।
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भिखारीपुर तिराहा के समीप शुक्रवार की सुबह नो एंट्री घुसे ट्रॉली में बालू लादे तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने सेंट जॉन्स स्कूल जा रहे स्कूटी सवार कक्षा छह के छात्र सौरव भट्टाचार्य (11) को टक्कर मारते हुए कुचल दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल छात्र की उपचार के दौरान बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई। वहीं, समीप ही स्थित सुंदरपुर चौकी और भेलूपुर थाने की पुलिस सीमा विवाद में उलझी रही।
भेलूपुर थाना क्षेत्र के गायत्री नगर, सुकुलपुरा में प्रसून भट्टाचार्य लाइट एंड साउंड का काम करते हैं। प्रसून के परिवार में उनकी पत्नी प्रियंका के अलावा इकलौता बेटा सौरव था। प्रसून ने बताया कि वह स्कूटी से अपने बेटे को बीएलडब्ल्यू स्थित सेंट जॉन्स स्कूल छोड़ने जा रहे थे। लगभग 6:30 बजे वह भिखारीपुर तिराहा पहुंचे थे, तभी पीछे से ट्रॉली में बालू लादे हुए तेज रफ्तार ट्रैक्टर आया और उनकी स्कूटी पर जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर से सौरव सड़क पर गिर पड़ा और ट्रैक्टर उसे कुचलते हुए तेजी से आगे बढ़ गया। आनन-फानन में सौरव को समीप के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत में सुधार न होते देख डॉक्टरों ने बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। ट्रॉमा सेंटर में उपचार के दौरान सौरव की मौत हो गई। वहीं, हादसे के बाद चालक ट्रैक्टर छोड़ कर भाग गया।
मुकदमा दर्ज, चालक भागा
घटना से गमगीन व गुस्साए परिजनों ने सौरव का शव पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को नहीं दिया और हरिश्चंद्र घाट पर अंत्येष्टि कर दी। उधर, भेलूपुर थानाध्यक्ष ने बताया कि ट्रैक्टर ट्रॉली सीज कर दी गई है। चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।
सड़क बना रही कंपनी सुरक्षा मानकों का नहीं रख रही ध्यान
सौरव के पिता प्रसून भट्टाचार्य ने कहा कि भिखारीपुर तिराहे के समीप सड़क खोदकर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। काम कराने के दौरान यातायात और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके चलते ट्रैक्टर चालक जल्दबाजी में निकलने के लिए अकसर हादसे का कारण बनते हैं। इसके अलावा जब नो एंट्री खुलने का समय रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक ही रहता है तो 6:30 बजे स्कूल के समीप से ट्रैक्टर कैसे गुजर रहा था।
सीमा विवाद में उलझी पुलिस, दिया गैर जिम्मेदाराना बयान
हादसे की सूचना पाकर मौके पर भारी संख्या में छात्र-छात्राओं के अभिवावक पहुंच गए। भाजपा नेता और सेंट जांस पैरेंट्स व्हाट्स एप ग्रुप के एडमिन अमित राय अभिभावकों को लेकर समीप ही स्थित सुंदरपुर चौकी पर गए। अमित राय का आरोप है कि चौकी में इंचार्ज मौजूद नहीं थे। सुंदरपुर चौकी इंचार्ज को फोन करने पर जवाब मिला कि घटनास्थल भेलूपुर थाना क्षेत्र में है। चितईपुर थाने की सुंदरपुर चौकी क्षेत्र में नहीं है। अभिभावकों ने एसीपी भेलूपुर के सीयूजी नंबर पर बात की तो उनकी सूचना पर महमूरगंज चौकी इंचार्ज हादसे के एक घंटे बाद पहुंचे। भेलूपुर थानाध्यक्ष के सीयूजी नंबर पर फोन कर अभिभावकों ने घटनास्थल पर आने के लिए कहा तो जवाब मिला कि मेरे पास और भी महत्वपूर्ण काम हैं, मैं नहीं आ सकता।
अभिभावकों ने किया रक्तदान, की कार्रवाई की मांग
अमित राय ने बताया कि सौरव को रक्त की आवश्यकता थी। इसके लिए छह यूनिट रक्त सेंट जॉन्स स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों ने दिया। साथ ही सुंदरपुर चौकी और भेलूपुर थाने की पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये और बयान की पुलिस आयुक्त और भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव से शिकायत की। कहा कि बच्चे का मामला संवेदनशील होता है, इसके बावजूद पुलिस का रवैया निंदनीय रहा। संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ अभिभावकों ने पुलिस आयुक्त और विधायक सौरभ श्रीवास्तव से कार्रवाई की मांग की।
सब कुछ बर्बाद हो गया, अब जीकर क्या करेंगे...?
बीएचयू अस्पताल में सौरव की मौत के बाद उसकी मां प्रियंका की हालत बेसुधों जैसी थी। वह बार-बार यही कह रही थी कि हमारा सब कुछ बर्बाद हो गया... अब जीकर क्या करेंगे...? परिजन बड़ी ही मुश्किल से उन्हें संभाले हुए थे। प्रियंका ने कहा कि उनका बेटा स्कूल जाने के लिए कभी ना-नुकुर नहीं करता था। सुबह अच्छे से तैयार होकर वह स्कूल गया था। कुछ ही देर बाद सूचना मिली कि ट्रैक्टर के कुचलने से सौरव के कमर के नीचे की हड्डियां टूट गई है। यह सुनकर हाथ-पैर सुन्न पड़ गया और समझ ही नहीं आया कि क्या से क्या हो गया। न जाने किसकी नजर लग गई कि हमारा फूल सा बच्चा हमें छोड़ कर बहुत दूर चला गया। वहीं, सौरव के दादा मानस भट्टाचार्य का भी रो-रोकर बुरा हाल था। बिजली विभाग से सेवानिवृत्त मानस भट्टाचार्य को परिजन बड़ी ही मुश्किल से संभाले हुए थे। उधर, भाजपा नेता अमित राय ने बताया कि सौरव अपने क्लास का मॉनीटर था। सौरव अपनी कक्षा का होनहार छात्र था। उसकी गिनती तेजतर्रार छात्रों में होती थी।
50 से 200 रुपये के चक्कर में नो एंट्री के बाद भी चलते हैं ट्रैक्टर
विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य तौर पर रोजाना रात 11 बजे से सुबह सात बजे तक नो एंट्री खुली रहती है। इसके बावजूद पुलिस की मिलीभगत से नो एंट्री लागू होने के बाद भी सुबह के समय शहर में धड़ल्ले से ट्रैक्टर फर्राटा भरते हैं। इसके लिए चौराहों और तिराहों पर तैनात पुलिसकर्मी या फिर उनके एजेंट ट्रैक्टर चालक से 50 रुपये से लेकर 200 रुपये तक वसूलते हैं। मिट्टी, बालू, गिट्टी ढोने वाले इन ट्रैक्टर के साथ खास बात यह भी रहती है कि इनका पंजीयन आरटीओ में कृषि कार्य के लिए होता है, लेकिन काम व्यावसायिक किया जाता है। इनके ड्राइवर भी प्रशिक्षित और लाइसेंसधारक नहीं होते हैं। सुबह के समय शहर के अंदर ट्रैक्टरों की सर्वाधिक आवाजाही डाफी, नुआव, अमरा अखरी, मोहनसराय, शिवपुर, पांडेयपुर और सारनाथ की ओर से होती है। हादसा होता है तो दो-चार दिन पुलिस अभियान चलाकर कार्रवाई करती है और फिर सारा मामला जस का तस हो जाता है।