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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Getting Out of Jail Racket Deal 15000 Fabricated Forged Documents—Here Is How Changed Identities in varanasi

जेल से बाहर निकालने का खेल: 15-20 हजार रुपये का सौदा, फर्जी दस्तावेज तैयार करवाते थे; ऐसे बदलते थे पहचान

Sun, 10 May 2026 12:52 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 10 May 2026 12:52 AM IST
सार

Varanasi News: साइबर अपराध के मामलों में जेल में बंद आरोपियों की जमानत कराने वाला एक संगठित गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य थानों की नकली मुहर बनाकर खुद ही सत्यापन रिपोर्ट तैयार करते थे। विभिन्न मुकदमों में गिरफ्तार आरोपियों से संपर्क साधकर फर्जी जमानतदार खड़े किए जाते थे। पुलिस जांच में गिरोह की कई चौंकाने वाली करतूतें सामने आई हैं।

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Getting Out of Jail Racket Deal 15000 Fabricated Forged Documents—Here Is How Changed Identities in varanasi
वाराणसी में जेल से बाहर निकालने का खेल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर अपराधियों को जेल से बाहर निकालने के लिए चल रहे फर्जी जमानत के संगठित खेल का पुलिस ने पर्दाफाश किया। साइबर थाना पुलिस ने ऐसे गिरोह के सरगना समेत दो शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी पहचान, कूटरचित दस्तावेज और नकली सत्यापन रिपोर्ट के सहारे साइबर ठगों को अदालत से जमानत दिलाते थे। 

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आरोपी जमानत कराने के एवज में पहले 15 से 20 हजार रुपये एडवांस लेते थे और जमानत होने के बाद भी मोटी रकम वसूलते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बलराम दास निवासी चमांव शिवपुर और जनार्दन सिंह निवासी चमांव अहिरान शिवपुर के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक दोनों फर्जी नाम राजकुमार और रिंकू का इस्तेमाल करते थे। जांच में सामने आया कि दोनों पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय थे और पूर्व में साइबर ठगी के दो मामलों में भी जमानतदार बन चुके हैं।

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पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, हाल ही में 10 लाख रुपये की साइबर ठगी में जेल भेजे गए आरोपियों की जमानत कराने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान साइबर थाना पुलिस को गिरोह की गतिविधियों की भनक लगी। पुलिस को जानकारी मिली कि अपराधियों के जो जमानतदार बन रहे है। ऐसे में साइबर थाना पुलिस ने दोनों की जानकारी जुटाई। पिछले इतिहास को खंगाला तो पता चला कि पूर्व में साइबर ठगी के दो मामले दोनों जमानतदार बने है। इसके बाद पुलिस चौकन्ना हुई और जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने चंदौली के एक प्रधान के नाम से फर्जी लेटर पैड तक तैयार करा रखा था। आधार कार्ड और पैन कार्ड में कूटरचना कर नाम और पते बदल दिए जाते थे। इसके बाद इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अदालत में बेल बांड दाखिल किया जाता था। 

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पहले बनाते थे प्लान

इतना ही नहीं, संबंधित थानों की नकली मुहर बनाकर खुद ही सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाती और स्पीड पोस्ट के जरिए न्यायालय रजिस्ट्री भेज दी जाती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य विभिन्न मुकदमों में गिरफ्तार आरोपियों से संपर्क साधते थे और पैसे लेकर खुद जमानतदार बनते या फर्जी जमानतदार उपलब्ध कराते थे। इस पूरे नेटवर्क में कई और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना ने बताया कि आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) समेत अन्य तकनीकी जांच कराई जा रही है। उनकी संपत्तियों की भी जांच होगी। गिरोह से जुड़े दो अन्य लोगों को चिन्हित कर दबिश दी जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि यदि जांच में कानूनी मामलों से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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ये दो मामले में जिसमें पूर्व में ये गिरोह बना था जमानतदार

केस-1 : रामनगर निवासी अनूप कुमार गुप्ता के एचडीएफसी बैंक खाते से 29 से 31 दिसंबर 2025 के बीच नेट बैंकिंग, आईएमपीएस और यूपीआई के माध्यम से कुल 8.33 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। साइबर अपराधियों ने बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर उनका ई-मेल आईडी बदल दिया और फर्जी तरीके से ट्रांजेक्शन किए। मामले की जानकारी मोबाइल मैसेज से होने पर पीड़ित ने बैंक और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी।

केस-2 : अस्सी क्षेत्र की रहने वाली एक युवती से ऑनलाइन जॉब और कार बुकिंग टास्क के नाम पर करीब 39.15 लाख रुपये की साइबर ठगी साल 2023 में हुई थी। पीड़िता को टेलीग्राम के जरिए सोकर कंपनी में काम का लालच देकर अलग-अलग चरणों में रकम जमा कराई गई। शुरुआत में कमीशन देकर भरोसा दिलाया गया, फिर प्रीमियम बुकिंग, लॉटरी टिकट और सिक्योरिटी फीस के नाम पर लगातार पैसे वसूले गए। पीड़िता ने ठगी का एहसास होने पर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

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