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Varanasi News: काशी में हर रविवार रंग और राग का उत्सव, 13 सितंबर से ‘काशिका’ की शुरुआत
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वाराणसी। काशी में रंगमंच और संगीत को नियमित मंच देने की पहल के तहत 13 सितंबर से ‘काशिका : रंग और राग का नियमित उत्सव शुरू होगा। टाउनहॉल के प्रेक्षागृह में होने वाली उद्घाटन संध्या में पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र और पं. स्वरांश मिश्र के शास्त्रीय गायन के साथ राम की शक्ति-पूजा का मंचन होगा। इसके बाद प्रत्येक रविवार यह सांस्कृतिक आयोजन जारी रहेगा। उद्घाटन के बाद कार्यक्रमों में प्रवेश टिकट के जरिये होगा। ऑनलाइन बुकिंग का लिंक और समय-सारिणी अलग से जारी की जाएगी।
नागरीप्रचारिणी सभा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में शुरू होने वाली ‘काशिका’ का उद्देश्य काशी की साहित्यिक, सांगीतिक और रंगमंचीय परंपराओं को नियमित रूप से मंच देना है। उद्घाटन कार्यक्रम में गायन के अलावा पंडित साजन मिश्र के साथ बनारसी बतकही भी होगी। श्रृंखला के तहत प्रत्येक रविवार व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में राम की शक्ति-पूजा का मंचन किया जाएगा। इसके साथ उपशास्त्रीय संगीत, भजन, लोकधुन और कीर्तन पर आधारित संगीत सत्र भी आयोजित होंगे। राम की शक्ति-पूजा का पहला मंचन फरवरी 2013 में हुआ था। अब तक इसके 100 से अधिक मंचन हो चुके हैं।
प्रस्तुति की खासियत यह भी है कि इसमें शुरुआत से राम और लक्ष्मण की भूमिकाएं महिला कलाकार निभाती रही हैं। राम की भूमिका स्वाति, लक्ष्मण की साखी, सीता और देवी की नंदिनी, हनुमान और अंगद की तापस तथा यूथपति की भूमिका शाश्वत निभा रहे हैं। नाटक का संगीत जेपी शर्मा और आशीष मिश्र ने तैयार किया है। निर्देशन-परिकल्पना व्योमेश शुक्ल की है और नाट्यालेख दिवंगत डॉ. शकुंतला शुक्ल का है। निराला की मूल काव्यकृति पर आधारित इस प्रस्तुति में संगीत को बनारस अंग की गायकी के अनुरूप तैयार किया गया है। देश के प्रमुख कला केंद्रों और आयोजनों में मंचित हो चुकी यह प्रस्तुति यूरोप के अलग-अलग देशों में भी 10 बार खेली जा चुकी है।
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नागरीप्रचारिणी सभा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में शुरू होने वाली ‘काशिका’ का उद्देश्य काशी की साहित्यिक, सांगीतिक और रंगमंचीय परंपराओं को नियमित रूप से मंच देना है। उद्घाटन कार्यक्रम में गायन के अलावा पंडित साजन मिश्र के साथ बनारसी बतकही भी होगी। श्रृंखला के तहत प्रत्येक रविवार व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में राम की शक्ति-पूजा का मंचन किया जाएगा। इसके साथ उपशास्त्रीय संगीत, भजन, लोकधुन और कीर्तन पर आधारित संगीत सत्र भी आयोजित होंगे। राम की शक्ति-पूजा का पहला मंचन फरवरी 2013 में हुआ था। अब तक इसके 100 से अधिक मंचन हो चुके हैं।
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प्रस्तुति की खासियत यह भी है कि इसमें शुरुआत से राम और लक्ष्मण की भूमिकाएं महिला कलाकार निभाती रही हैं। राम की भूमिका स्वाति, लक्ष्मण की साखी, सीता और देवी की नंदिनी, हनुमान और अंगद की तापस तथा यूथपति की भूमिका शाश्वत निभा रहे हैं। नाटक का संगीत जेपी शर्मा और आशीष मिश्र ने तैयार किया है। निर्देशन-परिकल्पना व्योमेश शुक्ल की है और नाट्यालेख दिवंगत डॉ. शकुंतला शुक्ल का है। निराला की मूल काव्यकृति पर आधारित इस प्रस्तुति में संगीत को बनारस अंग की गायकी के अनुरूप तैयार किया गया है। देश के प्रमुख कला केंद्रों और आयोजनों में मंचित हो चुकी यह प्रस्तुति यूरोप के अलग-अलग देशों में भी 10 बार खेली जा चुकी है।
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