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पांवों में छाले, चेहरे पर आनंद की रेख
Varanasi
Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। नंगे पांव मीलों पैदल चले। पांवों में छाले पड़ गए। इसके बावजूद चेहरे पर आनंद की रेख झलक रही है। प्रयाग कुंभ में गंगा स्नान करने के लिए मीलों का चकरप्लेटों की स्लेटी सड़क और बालू पर सफर का थकाने वाला सिलसिला श्रद्धालुओं के हौसलों को नहीं पस्त कर पाया था। मौनी अमावस्या बीतते ही पूरी उत्साह के साथ ट्रेनों में धकियाते हुए और बसों में ठूंसकर काशी पहुंचे श्रद्धालुओं को आम दिनों में सब नागवार गुजरता लेकिन आस्था गजब की चीज है। इसमें पड़ने पर पीड़ा भी आनंद में तब्दील हो जाती है। एमसीए कर चुकी दिल्ली की 23 वर्षीय तान्या कर्मकांड में जरा कम ही भरोसा रखती हैं। अपने माता-पिता को कुंभ लेकर आई थीं। उनके साथ वह काशी पहुंची। उनका कहना है कि बहुत परेशानियां हुईं लेकिन काशी में गंगा में डुबकी लगाने के बाद सब खत्म। नई ऊर्जा का संचार हो गया। जयपुर के आस्थावान मूलचंदानी (60 ) को तो लगा कि जीवन का सबसे अच्छा काम उन्होंने यही किया है। बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद मन एकदम शांत हो गया।
भागलपुर की निर्मला राय और उनकी सहेली मायादेवी के शब्दों में तीरथराज नहाय अइलिए। अहो भाग्य कि मौनी अमावस्या के गुरुजी (सतपाल महाराज) से दीक्षा मिललै। बिन गुरु ज्ञान कहा होय छै। समस्तीपुर के सूर्यकांत झा (75) बोले जीवन धन्य भेल, फिर मौका मिली त नाहाए जाएब। नेपाल के रामचंद्र यादव को प्रयाग में भी काफी पैदल चलना पड़ा और काशी में भी घंटों खड़ा रहना पड़ा। अभी घर पहुंचने के लिए पहाड़ी की चढ़ाई जैसा श्रम करना है। फिर भी वह खुद को धन्य मानते हैं। उनका कहना है कि अबकी का प्रयाग कुंभ राजाओं का राजा है। आपही सोचिए कि राजाओं के राजा का दर्शन करके कैसा लगता है। मैं क्या कहू कि क्या मिला।
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भागलपुर की निर्मला राय और उनकी सहेली मायादेवी के शब्दों में तीरथराज नहाय अइलिए। अहो भाग्य कि मौनी अमावस्या के गुरुजी (सतपाल महाराज) से दीक्षा मिललै। बिन गुरु ज्ञान कहा होय छै। समस्तीपुर के सूर्यकांत झा (75) बोले जीवन धन्य भेल, फिर मौका मिली त नाहाए जाएब। नेपाल के रामचंद्र यादव को प्रयाग में भी काफी पैदल चलना पड़ा और काशी में भी घंटों खड़ा रहना पड़ा। अभी घर पहुंचने के लिए पहाड़ी की चढ़ाई जैसा श्रम करना है। फिर भी वह खुद को धन्य मानते हैं। उनका कहना है कि अबकी का प्रयाग कुंभ राजाओं का राजा है। आपही सोचिए कि राजाओं के राजा का दर्शन करके कैसा लगता है। मैं क्या कहू कि क्या मिला।
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