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देश में 60 लाख लोग मिर्गी से पीडि़त
Varanasi
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। देश में मिर्गी से करीब 60 लाख से ज्यादा लोग पीडि़त है। सत्तर के दशक में इस बीमारी की मात्र चार दवाएं थीं लेकिन निरंतर शोध के बाद अब अत्याधुनिक दवाएं और सर्जरी से इसके कारगर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो गई। बीएचयू के न्यूरोलाजी विभाग में शनिवार को मिर्गी पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता देश की प्रसिद्ध न्यूरोलाजिस्ट प्रो. गौरी देवी ने ये बातें कहीं।
उन्हाेंने कहा कि पांच साल पूर्व नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल एंड न्यूरो साइंसेज बंगलुरू के सर्वे के अनुसार एक हजार में छह लोग मिर्गी से पीडि़त पाए गए थे। अब यह आंकड़ा बढ़ गया है। बताया कि देश के पांच शहराें में सर्जरी के माध्यम से मिर्गी का उपचार होता है। 70 प्रतिशत लोगाें की बीमारी तो सामान्य दवाओं से ठीक हो जाती है लेकिन तीस फीसदी मरीज गंभीर रूप से चपेट में होते हैं। उन्हाेंने कहा कि मस्तिष्क के करेंट डिस्चार सिस्टम में गड़बड़ी आने से यह बीमारी होती है। पहले मिर्गी पीडि़त गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चे पर दवाओं का विपरीत प्रभाव पड़ता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। बीएचयू आईएमएस निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा ने कहा कि इस बीमारी से संबंधित भ्रांतियां दूर करने की जरूरत है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. यूएस द्विवेदी ने कहा कि मिर्गी के बेहतर उपचार की सुविधा सर सुंदरलाल अस्पताल में उपलब्ध है। प्रो. रामहर्ष सिंह ने आयुर्वेद के माध्यम से मिर्गी के उपचार के बारे में जानकारी दी। डा. सीबी त्रिपाठी, डा. संजय पांडेय, डा. सीवी त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियाें का स्वागत आयोजक डा. वीएन मिश्र ने और डा. आरएन चौरसिया ने आभार प्रकट किया।
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उन्हाेंने कहा कि पांच साल पूर्व नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल एंड न्यूरो साइंसेज बंगलुरू के सर्वे के अनुसार एक हजार में छह लोग मिर्गी से पीडि़त पाए गए थे। अब यह आंकड़ा बढ़ गया है। बताया कि देश के पांच शहराें में सर्जरी के माध्यम से मिर्गी का उपचार होता है। 70 प्रतिशत लोगाें की बीमारी तो सामान्य दवाओं से ठीक हो जाती है लेकिन तीस फीसदी मरीज गंभीर रूप से चपेट में होते हैं। उन्हाेंने कहा कि मस्तिष्क के करेंट डिस्चार सिस्टम में गड़बड़ी आने से यह बीमारी होती है। पहले मिर्गी पीडि़त गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चे पर दवाओं का विपरीत प्रभाव पड़ता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। बीएचयू आईएमएस निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा ने कहा कि इस बीमारी से संबंधित भ्रांतियां दूर करने की जरूरत है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. यूएस द्विवेदी ने कहा कि मिर्गी के बेहतर उपचार की सुविधा सर सुंदरलाल अस्पताल में उपलब्ध है। प्रो. रामहर्ष सिंह ने आयुर्वेद के माध्यम से मिर्गी के उपचार के बारे में जानकारी दी। डा. सीबी त्रिपाठी, डा. संजय पांडेय, डा. सीवी त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियाें का स्वागत आयोजक डा. वीएन मिश्र ने और डा. आरएन चौरसिया ने आभार प्रकट किया।
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