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सिर की पुराने चोट को न करें नजरअंदाज

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Varanasi
Varanasi Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। सिर में लगी पुरानी चोट को कभी नजरअंदाज न करें। ऐसा करना घातक हो सकता है। यह मिर्गी या अन्य बीमारियाें का कारण बन सकता है। शनिवार को बीएचयू के न्यूरोलाजी विभाग में विश्व मिर्गी दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यशाला में यह सलाह चिकित्सकाें ने दी। सिर में पुरानी चोट के कारण आए तेज झटके से बेहोश हुए चौछठवां निवासी अभिषेक तिवारी (20) की शनिवार को बीएचयू अस्पताल में मौत हो गई। अभिषेक को छह महीने पहले चोट लगी थी।
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मुख्य अतिथि आईएमएस निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा ने कहा कि मिर्गी के उपचार से कहीं अधिक इसके प्रति जागरूकता जरूरी है। तभी इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। न्यूरोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यक्रम आयोजक डा. वीएन मिश्रा ने कहा कि मिर्गी को लेकर लोगाें में तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। जैसे शादी होने के बाद बीमारी का समाप्त होना, जूता सुंघाना, झाड-फूंक कराना आदि। उन्हाेंने कहा कि सिर की पुरानी चोट इस बीमारी का कारण बन सकती है। इसीलिए इसका उचित उपचार जरूरी है। उन्हाेंने चार सौ लोगाें पर मिर्गी के संबंध में किए गए सर्वे की चर्चा करते हुए कहा कि पीडि़तों में 78 प्रतिशत अविवाहित मिले। जबकि यह बीमारी 13 से 17 वर्ष के उम्र वालाें में सबसे अधिक पाई गई। प्रो. दीपिका जोशी ने कहा कि मिर्गी के बारे में ग्रामीण इलाकाें में वृहद जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। डा. आरएन चौरसिया, डा. शैलेश, डा. गीता तिवारी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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बीमारी के कारण:
दिमाग में संक्रमण, मस्तिष्क में हार्मोन का अंसुतलन, तनाव, सिर में चोट
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मिर्गी आने पर क्या करें-
मिर्गी की अवधि कुछ सेकेंड से लेकर दो- तीन मिनट तक होती है। जब रोगी को दौरा आ रहा हो या बेहोश हो जाए तो उसे साफ जगह पर करवट लिटाकर सिर के नीचे तकिया लगा देना चाहिए। उसके बाद साफ कपड़े से उसके मुंह में जमा लार या थूक की सफाई कर दें। रोगी को कभी भी जूता या प्याज नहीं सुंघाना चाहिए। इससे मुंह में कीटाणु जाने का खतरा रहता है। दौरे के समय मरीज का हाथ पांव नहीं दबाना चाहिए न ही पंजे की मालिश करें। यदि दांताें के बीच में जीभ फंसी हो तो उसे अंगुली से अंदर कर दें। अन्यथा कटने का खतरा रहता है। दौरा अधिक समय तक हो तो तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं।
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