{"_id":"68768","slug":"Varanasi-68768-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला कल्याण की योजनाओं में काशी फिसड्डी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला कल्याण की योजनाओं में काशी फिसड्डी
Varanasi
Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
वाराणसी। महिलाओं के कल्याणार्थ चलाई जा रहीं केंद्र की योजनाओं का जिले की महिलाओं को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसा हो रहा है स्थानीय स्तर पर पहल न होने से। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना स्टेप, कठिन परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रही महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की योजना स्वाधार तो अब तक लागू ही नहीं की जा सकी है, जबकि नाच-गाना और वेश्यावृत्ति में संलग्न महिलाओं के पुनर्वास की योजना उज्ज्वला जिले में संचालित ही नहीं है। अल्पावास गृह संचालित तो है लेकिन उसके बारे आमजन कम ही जानते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तिविहीन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम पालन, सामाजिक वानिकी, परती भूमि विकास आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र सरकार की सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड इंपावरमेंट प्रोग्राम फार वोमेन योजना का संचालन सूबे के 11 जिलों में हो रहा है। इनमें मिर्जापुर, सोनभद्र, बस्ती, देवरिया आदि जिले भी शामिल हैं। इलाहाबाद में तो ऐसे दो केंद्र हैं पर बनारस इसमें फिसड्डी साबित हुआ है। भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास सचिव नीला गंगाधरन ने 10 जुलाई को बनारस दौरे के समय रामनगर और दुर्गाकुंड वृद्धाश्रम में स्वाधार केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव मांगा था। इसके तहत विधवा, निराश्रित परित्यक्ता, पूर्व कैदी, प्राकृतिक आपदा एवं आतंकवाद के चलते बेसहरा महिलाओं को प्रशिक्षण और आवासीय सुविधाएं दी जाती हैं। इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, संत रविदास नगर, आजमगढ़, जौनपुर, मथुरा और वृंदावन में स्वाधार योजना के 43 प्रोजेक्ट संचालित हैं लेकिन बनारस में एक भी नहीं।
उद्धार अधिकारी नरेंद्र तिवारी के मुताबिक पिछले साल अधिक मांग के कारण योजना नहीं मिल पाई। इसका प्रस्ताव इसी हफ्ते भेजा जाएगा। बनारस में गुडि़या जैसी संस्थाएं हैं जो वेश्यावृत्ति या नाच-गाने में लगी महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इसके बावजूद बनारस में उज्ज्वला योजना का केंद्र नहीं है। आजमगढ़ रोड पर 30 बेड का एक अल्पावास गृह है। संचालक डा. जेपी तिवारी के मुताबिक पुलिस, जीआरपी, एनजीओ के माध्यम से यहां महिलाएं भेजी जा सकती हैं। ऐसी महिलाओं को घर वालों को सुपुर्द कर दिया जाता है, लेकिन जो बेसहारा होती हैं वे तीन साल तक रह सकती हैं। वर्तमान में 22 महिलाएं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तिविहीन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम पालन, सामाजिक वानिकी, परती भूमि विकास आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र सरकार की सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड इंपावरमेंट प्रोग्राम फार वोमेन योजना का संचालन सूबे के 11 जिलों में हो रहा है। इनमें मिर्जापुर, सोनभद्र, बस्ती, देवरिया आदि जिले भी शामिल हैं। इलाहाबाद में तो ऐसे दो केंद्र हैं पर बनारस इसमें फिसड्डी साबित हुआ है। भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास सचिव नीला गंगाधरन ने 10 जुलाई को बनारस दौरे के समय रामनगर और दुर्गाकुंड वृद्धाश्रम में स्वाधार केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव मांगा था। इसके तहत विधवा, निराश्रित परित्यक्ता, पूर्व कैदी, प्राकृतिक आपदा एवं आतंकवाद के चलते बेसहरा महिलाओं को प्रशिक्षण और आवासीय सुविधाएं दी जाती हैं। इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, संत रविदास नगर, आजमगढ़, जौनपुर, मथुरा और वृंदावन में स्वाधार योजना के 43 प्रोजेक्ट संचालित हैं लेकिन बनारस में एक भी नहीं।
विज्ञापन
उद्धार अधिकारी नरेंद्र तिवारी के मुताबिक पिछले साल अधिक मांग के कारण योजना नहीं मिल पाई। इसका प्रस्ताव इसी हफ्ते भेजा जाएगा। बनारस में गुडि़या जैसी संस्थाएं हैं जो वेश्यावृत्ति या नाच-गाने में लगी महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इसके बावजूद बनारस में उज्ज्वला योजना का केंद्र नहीं है। आजमगढ़ रोड पर 30 बेड का एक अल्पावास गृह है। संचालक डा. जेपी तिवारी के मुताबिक पुलिस, जीआरपी, एनजीओ के माध्यम से यहां महिलाएं भेजी जा सकती हैं। ऐसी महिलाओं को घर वालों को सुपुर्द कर दिया जाता है, लेकिन जो बेसहारा होती हैं वे तीन साल तक रह सकती हैं। वर्तमान में 22 महिलाएं हैं।
विज्ञापन