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पायरिया पीडि़त मां जन्म दे सकती है कम वजन का बच्चा
Varanasi
Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गर्भवती महिलाआें के स्वास्थ्य परीक्षण के समय आम तौर पर उनके परिजन दांताें की बीमारियाें की जांच नहीं कराते हैं। जेएसएस यूनिवर्सिटी मैसूर के चिकित्सकों ने एक हजार गर्भवती महिलाआें पर शोध में पाया कि पायरिया से पीडि़त महिलाआें में 95 फीसदी ने कम वजन या समय से पहले बच्चे को जन्म दिया। मैसूर के चिकित्सकाें का दल बनारस में भी अगस्त से शोध शुरू करेगा।
मैसूर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 2010 में डा. पुनीत वैभव पटेल और उनके सहयोगियाें ने वहां के कुछ मैटर्निटी अस्पतालाें, सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालाें में एक हजार गर्भवती महिलाआें पर अध्ययन में पाया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं ओरल हेल्थ (मुंह के स्वास्थ्य) पर ध्यान नहीं देती। मुंह की नियमित सफाई न होने से उन्हें ओरल इंफेक्शन से पायरिया हो जाता है। अध्ययन में पाया गया कि पायरिया मुंह में न रहकर पूरे शरीर में फैल जाता है। इससे सायटोकाइंस पैदा हो जाते हैं, जो प्लेसेंटा के जरिए नवजात शिशु तक पहुंचते हैं। इससे बच्चे के विकास पर प्रभाव पड़ता है और मां या तो कम वजन का बच्चा पैदा करती है या समय से पूर्व शिशु जन्म लेता है। इस शोध की अगली कड़ी लंका स्थित कालिंदी ओरोकेयर एंड रिसर्च सेंटर की निदेशिका डा. अमृता पटेल के नेतृत्व में चिकित्सकाें का दल बनारस में अगस्त से शुरू करेगा। निदेशिका ने बताया कि दोनाें शहराें के शोध पर आधारित रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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मैसूर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 2010 में डा. पुनीत वैभव पटेल और उनके सहयोगियाें ने वहां के कुछ मैटर्निटी अस्पतालाें, सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालाें में एक हजार गर्भवती महिलाआें पर अध्ययन में पाया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं ओरल हेल्थ (मुंह के स्वास्थ्य) पर ध्यान नहीं देती। मुंह की नियमित सफाई न होने से उन्हें ओरल इंफेक्शन से पायरिया हो जाता है। अध्ययन में पाया गया कि पायरिया मुंह में न रहकर पूरे शरीर में फैल जाता है। इससे सायटोकाइंस पैदा हो जाते हैं, जो प्लेसेंटा के जरिए नवजात शिशु तक पहुंचते हैं। इससे बच्चे के विकास पर प्रभाव पड़ता है और मां या तो कम वजन का बच्चा पैदा करती है या समय से पूर्व शिशु जन्म लेता है। इस शोध की अगली कड़ी लंका स्थित कालिंदी ओरोकेयर एंड रिसर्च सेंटर की निदेशिका डा. अमृता पटेल के नेतृत्व में चिकित्सकाें का दल बनारस में अगस्त से शुरू करेगा। निदेशिका ने बताया कि दोनाें शहराें के शोध पर आधारित रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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